पेड़ों को बचाने अनाज से बनाई नरेंद्र मोदी की तस्वीर, जैविक उत्पादों से होलिका दहन की तैयारी
नर्मदापुरम में पर्यावरण संरक्षण को लेकर नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री का बनाया चित्र, वृक्षों को बचाने बना रहे हैं जैविक उत्पाद.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 1:06 PM IST
रिपोर्ट: देवेंद्र वैश
नर्मदापुरम: सुपरली गांव के किसान योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी ने विभिन्न प्रकार के अनाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का चित्र बनाकर होली पर वृक्षों को बचाने का संदेश दिया है. अनाज के इन चित्रों के माध्यम से किसान ने होलिका दहन में वृक्षों की लकड़ी की जगह जैविक या गोबर के उपलों की होली जलाने की अपील की है.
25 वर्षों से चला रहे जैविक होली का अभियान
नर्मदापुरम के ग्राम सुपरली के किसान योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी बताते हैं कि "मैं पिछले 25 वर्ष से जैविक होलिका दहन का अभियान चला रहा हूं. पिछले कुछ वर्षों से गोबर और फसलों के अपशिष्ट से जैविक उत्पाद तैयार कर रहा हूं. होली से कई दिन पूर्व यह उत्पाद बनाकर लोगों में वितरित करता हूं. जिससे वन और पर्यावरण की रक्षा होती है."
वृक्षों को बचाने बना रहे हैं गोबर के जैविक उत्पाद
योगेंद्र पाल सिंह कहते हैं कि "कई संस्था और संगठन भी अब मेरे इस अभियान से जुड़ चुके हैं. यह लोग भी जैविक लकड़ी बनाकर मेरे अभियान में शामिल हैं. हम लोग कई स्कूलों में बच्चों को गोबर और फसलों के अपशिष्ट कचरे से जैविक लकड़ी बनाने का प्रशिक्षण दे चुके हैं. यदि ज्यादा से ज्यादा लोग इस जैविक लकड़ी का उपयोग करें, तो हम अधिक से अधिक वृक्षों को बचा सकते हैं."
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'होलिका दहन से पहले बढ़ जाती है लकड़ी की कटाई'
किसान योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि "होलिका दहन से पहले जंगलों में लकड़ी की कटाई बढ़ जाती है. एक होलिका दहन में कम से कम 5 क्विंटल तक लकड़ी का उपयोग होता है. जबकि इतनी लकड़ी देने में एक वृक्ष को 8 से 10 साल लगते हैं. होलिका दहन के दौरान बड़ी संख्या में लकड़ी नष्ट होती है. इससे वायु प्रदूषण भी होता है. हमने अनाज के चित्र बनाकर यह संदेश दिया है कि वृक्ष से ही अनाजों का अस्तित्व है और अनाज मानव जीवन का अस्तित्व है."

