जाते-जाते जिंदगी बांट गईं संतोष वर्मा, स्किन, आंखें और देह का किया दान, मिला गार्ड ऑफ ऑनर
नर्मदापुरम की संतोष वर्मा जाने से पहले कई लोगों को दे गईं जीवनदान, देहदान और आंखों को किया दान, दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 2:50 PM IST
नर्मदापुरम: किसी का भी इस दुनिया से जाना उनके लिए बहुत तकलीफ भरा होता है, जिसे वह अपने पीछे छोड़ गए हैं. हर विदाई आंखें नम तो करती ही है, लेकिन कुछ विदाइयां सिर्फ आंखों को नम नहीं करतीं बल्कि सोच भी बदल देती हैं. नर्मदापुरम के पुरानी इटारसी के पलकमतिनगर कॉलोनी की 79 वर्षीय संतोष वर्मा की अंतिम यात्रा भी कुछ ऐसी ही रही. जहां शोक के बीच सेवा का उजाला था और बिछड़ने के दर्द में मानवता की सबसे बड़ी सीख छिपी थी.
23 फरवरी को इंदौर में इलाज के दौरान इटारसी की संतोष वर्मा ने अंतिम सांस ली, लेकिन जाने से पहले वे 2 लोगों की दुनिया रोशन करने का इंतजाम कर गईं. उनके नेत्रदान से 2 जरूरतमंदों को रोशनी मिलेगी, त्वचादान से बर्न पीड़ितों को नई जिंदगी की उम्मीद मिलेगी और देहदान से 150 से ज्यादा मेडिकल विद्यार्थियों को सीखने का अवसर मिलेगा. उनका पार्थिव शरीर इंडेक्स मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को समर्पित किया गया है.
जब बेटियों ने थामा मां की अर्थी
इंदौर के सुदामानगर से निकली शवयात्रा में वह पल हर किसी की आंखें नम कर गया, जब संतोष वर्मा की 5 बेटियों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया. यह नजारा सिर्फ भावुक करने वाला नहीं था, बल्कि यह समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती भी दे रहा था. गायत्री परिवार की परंपरा से प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार हुआ. साथ ही शासन की अंगदान-देहदान योजना के तहत उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.

बताजा रहा है क 40 साल पहले संतोष वर्मा के पति का निधन हो गया था, तब उनकी उम्र सिर्फ 39 वर्ष थी. 5 बेटियों की जिम्मेदारी, सीमित साधन और लंबा संघर्ष, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. संतोष वर्मा ने बेटियों को पढ़ाया-लिखाया.
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सेवा में जुटा रहा पूरा परिवार
संतोष वर्मा के जीवन के आखिरी पड़ाव में उनकी बेटियां और बीच वाली बेटी के पति और नातिन साथ रहे. बताया जा रहा है कि परिवार ने उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी. 1 मार्च को इंदौर में देहदान-अंगदान दिवस पर संतोष वर्मा को मरणोपरांत महर्षि दधीचि सम्मान दिया जाएगा.

