दिल्ली: 100 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी नरेला हाई सिक्योरिटी जेल, तिहाड़ पर कम होगा दबाव
नरेला हाई सिक्योरिटी प्रिजन को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा.

Published : July 7, 2026 at 4:16 PM IST
|Updated : July 7, 2026 at 4:25 PM IST
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सबसे बड़ी व सर्वाधिक भीड़भाड़ वाली जेल तिहाड़ पर वर्षों से बने दबाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नरेला हाई सिक्योरिटी प्रिजन का ई-शिलान्यास किया. दिल्ली सरकार के अनुसार, इस अत्याधुनिक जेल के निर्माण पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. परियोजना पूरी होने के बाद तिहाड़ जेल में बंद उच्च सुरक्षा श्रेणी के कैदियों व चयनित अन्य बंदियों को चरणबद्ध तरीके से यहां स्थानांतरित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि तिहाड़ जेल आज घनी आबादी वाले क्षेत्र के बीच स्थित है. इससे सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों के उत्पादन (कोर्ट पेशी), ट्रैफिक और स्थानीय लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, तिहाड़ जेल अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक कैदियों का भार झेल रही है. ऐसे में नरेला में नई हाई सिक्योरिटी जेल बनने से तिहाड़ पर दबाव कम होगा.
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन एवं माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी के नेतृत्व में विकसित दिल्ली का संकल्प निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) July 7, 2026
इसी क्रम में आज माननीय गृह मंत्री जी ने दिल्ली को 300 नई इलेक्ट्रिक बसों, 3… pic.twitter.com/NZv8jE2FO3
सरकार का कहना है कि नरेला हाई सिक्योरिटी प्रिजन को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा. परिसर में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, ऊंची परिधि दीवार, अत्याधुनिक सीसीटीवी निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस कंट्रोल, वॉच टावर, सुरक्षित बैरक व आधुनिक नियंत्रण कक्ष जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसका उद्देश्य ऐसे कैदियों को सुरक्षित वातावरण में रखना है, जिनकी निगरानी के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध आवश्यक होते हैं.
तिहाड़ जेल देश की सबसे बड़ी जेल परिसरों में शामिल है, जहां समय-समय पर स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक कैदी रहने की स्थिति सामने आती है. विशेषज्ञों का मानना है कि क्षमता से अधिक कैदियों के कारण सुरक्षा प्रबंधन, बंदियों के पुनर्वास व प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. नरेला में नई हाई सिक्योरिटी जेल बनने से इन चुनौतियों को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी के जेल ढांचे को आधुनिक व सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है. नई जेल बनने से न केवल तिहाड़ जेल का बोझ घटेगा बल्कि जेल प्रशासन को भी उच्च सुरक्षा श्रेणी के कैदियों के प्रबंधन में सुविधा मिलेगी. सरकार का लक्ष्य जेल व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित व आधुनिक बनाना है, जिससे सुरक्षा व प्रशासन दोनों के स्तर पर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें.
दिल्ली की तिहाड़ जेल में क्षमता से अधिक कैदी
बता दें कि राजधानी दिल्ली के तिहाड़ जेल की कुल क्षमता 10 हजार है जबकि वर्तमान में 19,500 कैदी रह रहे हैं. जो औसत से करीब दोगुना है. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के समय में यहां पर सोशल डिस्टेंसिंग की गंभीर समस्या पैदा हो गई थी. जेल में भीड़ कम करने के लिए करीब चार हजार कैदियों को पैरोल पर छोड़ना पड़ा था. जेल में आए दिन हत्या जैसी घटनाएं भी होती रहती हैं. भीड़ कम करने के लिए समय-समय पर रिव्यु कमेटी की मीटिंग्स भी होती है. दिल्ली में मौजूदा तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेल हैं. इसके अलावा अब नरेला में जेल तैयार होने से समस्या का समाधान होगा.
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