Narasingha Jayanti : खंभे को फाड़कर प्रकट हुए भगवान नरसिंह, अजमेर-पुष्कर और बाड़मेर में उमड़ा लोगों का हुजूम
राजस्थान में नरसिंह जयंती 2026. बाड़मेर, अजमेर और पुष्कर में भगवान नरसिंह प्राकट्य महोत्सव की रही धूम...

Published : April 30, 2026 at 10:07 PM IST
बाड़मेर/अजमेर: सरहदी जिले बाड़मेर में गुरुवार को नरसिंह जयंती का पर्व धूमधाम से मनाया गया. बाड़मेर शहर के प्राचीन बालाजी मंदिर में शाम को भगवान नरसिंह का प्राकट्य महोत्सव मनाया गया. कार्यक्रम को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. वहीं, अजमेर और पुष्कर में भी धार्मिक अनुष्ठान हुए.
राजस्थान के बाड़मेर में शाम 7:00 बजे भगवान नरसिंह कागज के खंभे को फाड़कर उग्र रूप में प्रकट हुए. सबसे पहले भक्त प्रहलाद के रूप धारण कर बैठे बच्चे को आशीर्वाद दिया और इसके बाद श्रद्धालुओं की भीड़ में कागज का खम्भा फाड़कर निकलने भगवान नरसिंह के उग्र स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और उनसे आशीर्वाद लेने की होड़ मच गई.

इससे पूर्व मंदिर में भगवान की विधिवत रूप से आरती की गई. जैसे ही भगवान नरसिंह अवतार के रूप में कागज के खंभे को फाड़कर प्रकट हुए तो चारों तरफ भगवान नरसिंह के जयकारे गूंज उठे. लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिस के जवान भी तैनात रहे.
जिस कागज के खम्भे को फाड़कर भगवान नरसिंह रूप में प्रकट हुए, उसी कागज को प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटा गया. इस प्रसाद को लेने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मन्दिर से जुड़े कमल सिंहल के अनुसार ऐसी मान्यता है कि इस कागज को पर्स, दुकान के गल्ले या तिजोरी में रखने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और घर-परिवार में समृद्धि बनी रहती है.
मंदिर के पुजारी मुरली मनोहर दवे ने बताया कि वीर बालाजी मंदिर में पिछले 200 वर्षों से नरसिंह जयंती मनाई जा रही है. उन्होंने बताया कि परिवार से जुड़े दिनेश श्रीमाली ने आज भगवान के मुखौटे को धारण कर कागज के खम्भे को फाड़कर भगवान नरसिंह रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए. कागज खम्भे के टुकड़े प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटे गए. भगवान नरसिंह का प्रकटोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त तरीके का उत्साह देखने को मिला.
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अजमेर और पुष्कर में भी नरसिंह जयंती की रही धूम : अजमेर और पुष्कर में गुरुवार को भगवान नरसिंह का प्राकट्य महोत्सव धूमधाम से मनाया गया. सुबह से ही श्री लक्ष्मी नरसिंह मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान हुए. वहीं, शाम को भगवान नरसिंह के प्राकृतिक का कई जगह मंचन भी हुआ. अजमेर में सुप्रसिद्ध लाल्या काल्या के मेले में भी हजारों लोग जुटे. इधर तीर्थ नगरी पुष्कर के पुराने रंगजी के मंदिर में भी धूमधाम से भगवान नरसिंह का प्राकट्य महोत्सव मनाया गया.
अजमेर में गुरुवार को भगवान नरसिंह के प्राकट्य महोत्सव की धूम मची रही. भगवान लक्ष्मी नरसिंह के मंदिरों में सुबह से भक्तों का तांता लगा रहा. मंदिरों में भगवान नरसिंह का अभिषेक कर उनका नयनाभिराम श्रृंगार किया गया. मंदिर को फूलों से सजाया गया. भगवान नरसिंह की कथा के आयोजन हुए. वहीं, दोपहर में भगवान नरसिंह की महाआरती हुई. अजमेर में होलीदड़ा नरसिंह मंदिर में कई धार्मिक आयोजन हुए.

इसी तरह नया बाजार स्थित श्री लक्ष्मी नरसिंह मंदिर में भी धूमधाम से प्राकट्य महोत्सव मनाया गया. यहां भगवान को नगर सेठ भी कहा जाता है. यहां मंदिर में फूल बंगला सजाया गया. दोपहर की महाआरती के बाद मंदिर में ही बने खाद्य पदार्थों का भगवान को भोग लगाया गया. बाद में आमजन में प्रसाद वितरित किया गया. शाम को मंदिर के बाहर भगवान नरसिंह के प्राकट्य का मंचन हुआ. वहीं, बाहर मौजूद हजारों लोगों के बीच लाल्या काल्या और नकटी ने जमकर सोटे चलाए. लाल्या के सोटे की मार खाने के लिए लोगों में होड़ रही. वहीं, काल्या और नकटी के सोटे से लोग बचते नजर आए. शाम को अजमेर में जय जय नरसिंह के जयकारों से माहौल धार्मिक रहा.
मेले में आस्था का उमड़ा सैलाब : मेला समिति से जुड़े सोमेश अग्रवाल ने बताया कि 350 वर्षों से भगवान का प्राकट्य महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता रहा है. गुरुवार को भगवान के प्राकट्य महोत्सव में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. भगवान नरसिंह ने खंभ में से प्रकट होकर आतंक के पर्याय राजा हिरण्यकश्यप का वध का मंचन किया गया. लोगों की भीड़ के बीच लाल्या काल्या और नकटी ने जमकर सोटे चलाए. समिति के पदाधिकारी संदीप गोयल ने बताया कि भगवान लक्ष्मी नरसिंह के 300 साल पुराने मंदिर और यहां की परंपरा से लोगों की आस्था पीढ़ी दर पीढ़ी जुड़ी हुई है. नरसिंह चतुर्दशी पर भगवान ने खंभ से प्रकट होकर भक्त प्रहलाद की रक्षा ही नहीं की, बल्कि समूचे संचार को यह भी बता दिया कि सच्ची श्रद्धा रखने वालों की रक्षा भगवान जरूर करते हैं. मंचन के बाद भक्त प्रहलाद को राजगद्दी सौंपी गई.
पुष्कर के पुराने रंगजी के मंदिर में प्राकट्य मोहत्सव : इधर पुष्कर के पुराने रंग जी के मंदिर में भी पारंपरिक तरीके से भगवान नरसिंह का प्राकट्य महोत्सव मनाया गया. पंडित मोहन कुमार राजोरिया ने बताया कि नरसिंह चतुर्दशी के दिन पुराने रंग जी के मंदिर में आस्था के साथ भगवान नरसिंह का प्रकटिया महोत्सव मनाया गया है.

उन्होंने बताया कि भगवान नरसिंह ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था. 50 वर्षों से भी अधिक समय से पुष्कर के पुराने रंग जी के मंदिर में भगवान का प्राकट्य महोत्सव मनाया जा रहा है. पुष्कर ही नहीं, बल्कि आसपास क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोगों के अलावा तीर्थ यात्री भी भगवान के दर्शन और लीला को देखने के लिए आते हैं. उन्होंने बताया कि भगवान को चने और ककड़ी का भोग लगाया जाता है. चने और ककड़ी का ही प्रसाद भक्तों में भी वितरित किया जाता है.

