नंदादेवी राजजात को लेकर बड़ी बैठक, मीटिंग में बढ़ा विवाद, जानिये वजह
नंदादेवी राजजात आयोजन को लेकर लगातार बैठकों को आयोजन किया जा रहा है. इन बैठकों में भी विवाद की स्थिति देखने को मिल रही है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 24, 2026 at 1:05 PM IST
चमोली: नंदादेवी राजजात के आयोजन को लेकर कुलसारी काली मंदिर के प्रांगण में एक समन्वय बैठक का आयोजन किया गया. जिसमें तीनों विकासखंडों के जनप्रतिनिधियों , बधाण पट्टी चौदह सयानों ,कुरुड़ के गौड़ पुजारियों समेत धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों ने राजजात के आयोजन को लेकर विचार रखे.
बैठक में राजजात के आयोजन को 2027 में कराने को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी रही. एक ओर चौदह सयानो ने नंदादेवी राजजात की तैयारी को लेकर जिलाधिकारी चमोली के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि सरकार स्वयं 2026 में राजजात कराने की स्थिति में नहीं है. निर्जन पड़ावों में रास्तों की बदहाल स्थिति है, उसे देखते हुए राजजात 2027 में ही होनी चाहिए.
चौदह सयानों ने एकमत होकर कहा कि राजजात का इतिहास रहा है कि बारह वर्ष में मनौती की जाती है. 12 वर्षों के बाद ही राजजात का आयोजन होता आया है. इसलिए वे 2027 में ही राजजात के पक्षधर हैं. वहीं कुरुड़ बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि कुरुड़ में हुई महापंचायत के बाद भगवती के पश्वा को अवतरित किया गया. अवतरण के बाद बड़ी जात के आयोजन को 2026 में ही कराए जाने का निर्णय लिया गया था. उन्होंने कहा इस बीच कोई विषम परिस्थिति निकल कर आती है तभी 2026 में बड़ी जात के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाएगा. अन्यथा महापंचायत में लिए गए निर्णय के अनुसार 2026 में ही बड़ी जात का आयोजन किया जाएगा.
बैठक के बाद एक समन्वय समिति का भी गठन किया गया. इस समन्वय समिति का विरोध भी देखने को मिला. कुल मिलाकर कहा जाए तो नंदादेवी राजजात के 2027 में और बड़ी जात के 2026 में होने के निर्णयों पर बैठक में भारी विवाद देखने को मिला. सभी पक्षों के इसे लेकर अपने अपने मत थे.
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