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बिहार के लाल की ऊंची उड़ान, युवा एयरोस्पेस इंजीनियर सुब्रत शांडिल्य बनाएंगे स्वदेशी 'जेट इंजन'

बिहार के युवा एयरोस्पेस इंजीनियर सुब्रत शांडिल्य ने किफायती स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने की पहल की है. रिपोर्ट- महमूद आलम

Subrat Shandilya
सुब्रत शांडिल्य बनाएंगे स्वदेशी जेट इंजन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 1, 2026 at 8:44 PM IST

7 Min Read
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नालंदा: ज्ञान, धर्म और इतिहास की प्राचीन धरती नालंदा अब आधुनिक विज्ञान और एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है. नालंदा की मिट्टी से निकला एक होनहार युवा अब देश के एयरोस्पेस सेक्टर में एक नई क्रांति लाने की तैयारी में है. युवा एयरोस्पेस इंजीनियर सह उद्यमी सुब्रत शांडिल्य ने बेहद कम लागत वाले स्वदेशी जेट इंजन और थ्री-डी कार्गो ड्रोन विकसित करने की एक ऐतिहासिक पहल की है.

नालंदा के लाल की ऊंची उड़ान: 'शांडिल्य एयरोस्पेस' का पटना में एक महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन हुआ है. यह विजन जमीन पर उतरता है, तो जल्द ही बिहार में देश का पहला 'कॉम्पैक्ट जेट इंजन' निर्माण कारखाना स्थापित करने की दिशा में काम शुरू हो जाएगा. यह न सिर्फ बिहार के लिए बल्कि पूरे देश के 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी.

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नालंदा के लाल सुब्रत शांडिल्य का कमाल (ETV Bharat)

कुल्ती जियर गांव के रहने वाले हैं सुब्रत शांडिल्य: वह मूल रूप से नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड अंतर्गत कुल्ती जियर गांव निवासी दादा उमेश प्रसाद 'उमेश' एक जाने-माने साहित्यकार हैं, जबकि उनके पिता संजीव मुकेश और मां मीनाक्षी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में कार्यरत हैं. सुब्रत दो भाइयों में सबसे बड़े हैं और उनके छोटे भाई सार्थक शांडिल्य फिलहाल दिल्ली में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर रहे हैं. सुब्रत की प्रतिभा बचपन से ही दिखने लगी थी.

बेटे की कामयाबी पर पिता को गर्व: सुब्रत शांडिल्य की इस शानदार तकनीकी उपलब्धि पर आज पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है. उनके पिता संजीव मुकेश भावुक होते हुए बताते हैं कि वह बचपन से ही जहाज के मैकेनिज्म से लगाव था. वह पढ़ाई में काफी बिताता था. हम चाहते हैं कि स्वदेशी जेट इंजन का उपयोग देश हित और राष्ट्र को मजबूती प्रदान करने के लिए हो.

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परिवार के साथ सुब्रत शांडिल्य (ETV Bharat)

"जब सुब्रत बहुत छोटा था, तब उसे खेलने के लिए एक खिलौना हवाई जहाज दिया गया था. सामान्य बच्चों की तरह उस जहाज से खेलने के बजाय सुब्रत उसकी बनावट और मैकेनिज्म को 'रीड' करने में ज्यादा वक्त बिताता था. वो जो भी मुकाम हासिल करें, उसका उपयोग देश हित और राष्ट्र को मजबूती प्रदान करने के लिए करे."- संजीव मुकेश, सुब्रत शांडिल्य के पिता

पढ़ाई में अव्वल रहे हैं सुब्रत शांडिल्य: परिजनों ने बताया कि सुब्रत ने अपनी शुरुआती और माध्यमिक शिक्षा पटना तथा दिल्ली से सीबीएसई (CBSE) बोर्ड के माध्यम से पूरी की. पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले सुब्रत साल 2018 में 10वीं कक्षा में अपने स्कूल के टॉपर रहे थे. साल 2022 में उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की और अपने सपनों को उड़ान देने के लिए साल 2023 में देहरादून का प्रतिष्ठित एंट्रेंस एग्जाम क्रैक कर लिया. इसके बाद उन्होंने देहरादून की ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में दाखिला लिया.

जेट इंजन निर्माण पर काम: इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कुछ नया और लीक से हटकर करने की ठान ली थी, जिसके परिणामस्वरूप आज वह जेट इंजन और स्वदेशी कार्गो ड्रोन के निर्माण की दिशा में गंभीरता से काम कर रहे हैं. वर्तमान में सुब्रत शांडिल्य का पूरा तकनीकी ध्यान करीब दो किलो न्यूटन श्रेणी के एक कॉम्पैक्ट जेट इंजन को विकसित करने पर केंद्रित है. इस विशेष इंजन का इस्तेमाल भविष्य में मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी/ड्रोन) और विभिन्न एयरोस्पेस प्लेटफार्मों में किया जा सकेगा.

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'शांडिल्य एयरोस्पेस' का पटना में महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन (ETV Bharat)

क्या है उद्देश्य?: सुब्रत के डिजाइन का मुख्य उद्देश्य जेट प्रोपल्शन को कम लागत वाला, निर्माण में आसान और विशिष्ट मिशनों के हिसाब से अनुकूल बनाना है. सुब्रत का मानना है कि हर एयरोस्पेस मिशन के लिए बेहद लंबी परिचालन अवधि वाले और अत्यधिक महंगे इंजनों की आवश्यकता नहीं होती है.

वे कहते हैं कि पारंपरिक छोटे जेट इंजनों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली महंगी सामग्री, जटिल निर्माण प्रक्रिया, सटीक मशीनिंग और कठोर दीर्घकालिक मजबूती (ड्यूरेबिलिटी) की आवश्यकता होती है, जो इसकी लागत को कई गुना बढ़ा देती है. सुब्रत अपने नए 'डिजाइन दर्शन' के साथ इसी बड़ी चुनौती का समाधान तलाश रहे हैं, ताकि जरूरत और मिशन के हिसाब से इंजन का किफायती निर्माण किया जा सके.

क्या है प्लान?: अपने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए सुब्रत की कंपनी 'शांडिल्य एयरोस्पेस' आधुनिक 'मेटल एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग' यानी मेटल थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक को अपनी तकनीकी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा मान रही है. इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जेट इंजन के जटिल आकार वाले कलपुर्जों (कंपोनेंट) को बहुत कम निर्माण चरणों में तैयार करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.

थ्री-डी प्रिंटिंग के जरिए न सिर्फ इंजन का शुरुआती प्रोटोटाइप तेजी से बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि डिजाइन में तुरंत बदलाव करने और भविष्य में बड़े पैमाने पर इसके व्यावसायिक उत्पादन को अत्यधिक प्रभावी और सस्ता बनाने में भी बड़ी कामयाबी मिल सकती है.

कम उम्र में बनाई पहचान: सुब्रत शांडिल्य ने एयरोस्पेस डिजाइन की दुनिया में बहुत कम उम्र में अपनी मजबूत पहचान बना ली है. उन्होंने छात्र रहते हुए ही यूएवी और एयरक्राफ्ट डिजाइन पर काम शुरू कर दिया था और वे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तथा उपयोगकर्ताओं के लिए कई बेहतरीन यूएवी डिजाइन तैयार कर चुके हैं. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उनके एयरक्राफ्ट कॉन्सेप्ट का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयनित होना है.

अमेरिका के बेहद प्रतिष्ठित 'डारपा लिफ्ट चैलेंज यूएसए' के शुरुआती चरण में दुनिया भर से आए 500 से अधिक आवेदनों में से सुब्रत के डिजाइन को शीर्ष 72 कॉन्सेप्ट में जगह मिली थी. एयरक्राफ्ट डिजाइन के क्षेत्र में मिले इसी अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने उन्हें अब प्रोपल्शन तकनीक जैसी सबसे जटिल इंजीनियरिंग चुनौती की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है.

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सुब्रत शांडिल्य (ETV Bharat)

"मेरा उद्देश्य केवल एक साधारण जेट इंजन बनाना नहीं है, बल्कि देश के प्रोपल्शन सिस्टम को एक बिल्कुल नए और आधुनिक नजरिए से विकसित करने का प्रयास है. मेरी कंपनी डिजाइन की शुरुआत से ही मिशन की जरूरत के अनुसार परिचालन अवधि, निर्माण योग्यता और लागत को संतुलित करने पर काम कर रही है."- सुब्रत शांडिल्य, एयरोस्पेस इंजीनियर

सुब्रत शांडिल्य कहते हैं कि किसी भी युवा एयरोस्पेस कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ एक अच्छा आइडिया होना नहीं है, बल्कि उस आइडिया को वास्तविक हार्डवेयर में बदलना और उसका सफल परीक्षण करना है. फिलहाल उनकी कंपनी डिजाइन और इंजीनियरिंग के साथ-साथ प्रोटोटाइप के निर्माण और उसके परीक्षण की क्षमता विकसित करने पर दिन-रात काम कर रही है. सुब्रत की यह दीर्घकालिक योजना भारत में स्वदेशी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, प्रोपल्शन और एडवांस निर्माण क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की है.

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