कर्पूरी ठाकुर से प्रभावित होकर राजनीति में आए, नीतीश के 'भरोसेमंद' हो गए, 8वीं बार मंत्री बने श्रवण कुमार
नालंदा से जेडीयू विधायक श्रवण कुमार आठवीं बार बिहार सरकार में मंत्री बने हैं. उनको नीतीश कुमार का 'भरोसेमंद' माना जाता है. पढ़ें..

Published : May 7, 2026 at 4:58 PM IST
नालंदा: पटना के गांधी मैदान में गुरुवार को जैसे ही नालंदा विधानसभा से आठवीं बार विधायक चुने गए कद्दावर नेता श्रवण कुमार ने सम्राट कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली, उनका पैतृक गांव बेन जश्न में डूब गया. बेन बाजार से लेकर मुरगावां, बड़ी आंट, नोहसा और अरावां तक कार्यकर्ता झूम उठे. समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर बधाई दी और मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया.
श्रवण कुमार के मंत्री बनने पर इलाके में खुशी: जेपी आंदोलन की उपज रहे श्रवण कुमार ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक धमक साबित की है. हाल ही में संपन्न हुए 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार को 33,008 मतों के विशाल अंतर से हराया था. स्थानीय लोगों का कहना है, कि नई सम्राट सरकार में मंत्री पद मिलना उनकी सादगी, जनसेवा और क्षेत्र के प्रति 30 वर्षों के समर्पण का परिणाम है.
#WATCH बिहार कैबिनेट विस्तार | श्रवण कुमार, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप कुमार जायसवाल, निशांत कुमार और लेशी सिंह ने बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ ली।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 7, 2026
(सोर्स: DD न्यूज) pic.twitter.com/f2RyRLkpXl
शपथ लेने के बाद मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि नई जिम्मेदारी को वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे. उन्होंने क्षेत्रवासियों को भरोसा दिलाया कि एनडीए की सरकार में डबल इंजन की ताकत से बिहार और नालंदा के विकास को नई गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार देश स्तर पर अव्वल साबित होगा और जनता की समस्याओं का समाधान ही मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी.
जमीन से जुड़े नेता की छवि: ग्रामीणों का कहना है कि मंत्री बनने के बावजूद श्रवण कुमार का अपने गांव और लोगों से जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ. हर सुख-दुख में शामिल होना और लोगों के दरवाजे तक जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है. यही वजह है कि पिछले 30 वर्षों से नालंदा विधानसभा क्षेत्र में कोई भी प्रतिद्वंद्वी उनके सामने टिक नहीं पाया है. बेन गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि श्रवण बाबू ने बहुत गरीबी देखी है, लेकिन कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज उन्हें फिर से मंत्री बनते देख पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है.

नालंदा के रहने वाले हैं श्रवण: मंत्री श्रवण कुमार का जन्म 20 अगस्त 1957 को नालंदा जिले के बेन प्रखंड मुख्यालय में एक साधारण किसान (कुर्मी) परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम स्व. हरि प्रसाद सिंह है. 3 बहनों के बीच वे इकलौते भाई हैं. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी की और मैट्रिक की पढ़ाई बगल के गुरुशरणपुर हाई स्कूल से की. इसके बाद 1977 में उन्होंने बिहारशरीफ के प्रतिष्ठित एसपीएम कॉलेज से इंटरमीडिएट की डिग्री हासिल की. उनकी पत्नी का नाम मंजू कुमारी है और उनके एक पुत्र व दो पुत्रियां हैं.

कर्पूरी ठाकुर से प्रभावित: श्रवण कुमार का राजनीतिक जीवन संघर्षों की भट्ठी में तपकर कुंदन बना है. कर्पूरी ठाकुर के समय से राजनीति में आए श्रवण कुमार 1973 में सक्रिय हुए और 1974 के जेपी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. जेपी आंदोलन के समय से ही वे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथी रहे. लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्हें 1974 और 1978 में जेल की यातनाएं भी सहनी पड़ी. 1994 में जब समता पार्टी का गठन हुआ, तो उन्होंने वहां से राजनीतिक गुर सीखे. वे दिग्गज नेता जॉर्ज फर्नांडिस के इलेक्शन एजेंट भी रह चुके है.

1995 से लगातार विधायक: वे पहली बार 1995 में समता पार्टी के टिकट पर नालंदा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वर्ष 2000, फरवरी 2005, नवंबर 2005, 2010, 2015, 2020 और अब 2025 में लगातार 8वीं बार जीत दर्ज कर उन्होंने नालंदा को अपना अभेद्य किला बना दिया है. वर्ष 2000 में जब जेडीयू बिहार की सत्ता में आई तो वे मुख्य सचेतक भी रहे.

किन-किन विभागों में रहे मंत्री?: श्रवण कुमार ने 2014 में पहली बार जीतन राम मांझी के शासनकाल में ग्रामीण कार्य विभाग का मंत्री बनाया गया था. इसके अलावे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में भी वे ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य, परिवहन, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण और समाज कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. अब एक बार फिर भाजपा के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार में उन्हें मंत्री पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. लगातार कई बार मंत्री पद संभालना उनके राजनीतिक कद और प्रशासनिक अनुभव को दर्शाता है.
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