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स्कूल में ताला, बरामदे में क्लास... क्या बिहार में यही है शिक्षा का अधिकार?

नालंदा के चंडी प्रखंड स्थित स्कूल में कमरों की कमी और डबल शिफ्ट के विरोध में ताला लगने से बच्चों को बरामदे में पढ़ना पड़ा.

NALANDA SCHOOL CLASSROOM SHORTAGE
बरामदे में पढ़ते बच्चे (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 7, 2026 at 8:37 PM IST

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नालंदा: बिहार में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली कोई नई बात नहीं है. बदहाली और अव्यवस्था का खामियाजा अक्सर नौनिहालों को भुगतना पड़ता है. ऐसा ही एक मामला नालंदा के चंडी प्रखंड स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय बढ़ौना से सामने आया है. यहां पढ़ाई करने की उम्मीद लेकर सुबह विद्यालय पहुंचे कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को बंद कमरों और लटके तालों का सामना करना पड़ा. कक्षाओं के दरवाजे बंद होने के कारण मासूम बच्चों को बरामदे और खुले परिसर में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ी.

आधारभूत संसाधनों की कमी: इस मामले ने विद्यालय की व्यवस्था और आधारभूत संसाधनों की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल विद्यालय में कक्षा एक से 12वीं तक कुल 809 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. जबकि पढ़ाई के लिए महज 13 कमरे उपलब्ध हैं. इनमें एक कमरा प्रधानाध्यापक कक्ष, एक पुस्तकालय और एक मध्याह्न भोजन (एमडीएम) कक्ष है. यानी पठन-पाठन के लिए केवल 11 कमरे ही उपलब्ध हैं. इसी कमी के कारण विद्यालय में दो शिफ्ट में पढ़ाई कराई जा रही है.

NALANDA SCHOOL CLASSROOM SHORTAGE
ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

जिला शिक्षा कार्यालय का आदेश: विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनुज कुमार ने बताया कि जिला शिक्षा कार्यालय के आदेश के अनुसार पहली पाली में कक्षा 9 से 12 तक तथा दूसरी पाली में कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं संचालित की जानी हैं. उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों के हित को देखते हुए शिफ्ट परिवर्तन के लिए वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है. वर्तमान व्यवस्था के तहत कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई सुबह 6:30 बजे से 11 बजे तक और कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं 11:30 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होती हैं, लेकिन भीषण गर्मी में दोपहर की पाली में पढ़ाई करने से छोटे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

"जिला शिक्षा कार्यालय के आदेश के अनुसार पहली पाली में कक्षा 9 से 12 तक तथा दूसरी पाली में कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं संचालित की जानी हैं. उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों के हित को देखते हुए शिफ्ट परिवर्तन के लिए वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है." - अनुज कुमार, प्रधानाध्यापक

देखें स्पेशल रिपोर्ट (ETV Bharat)

बरामदे में बैठाकर पढ़ाई: इसी कारण पिछले करीब ढाई महीने से पहली से आठवीं तक के छात्र सुबह ही विद्यालय पहुंच रहे हैं. सोमवार को भी बच्चे रोज की तरह सुबह विद्यालय पहुंचे, लेकिन सभी कक्षाओं में ताले लगे मिले. ऐसे में शिक्षकों ने बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित न हो, इसके लिए उन्हें बरामदे और खुले स्थानों पर बैठाकर पढ़ाई कराई. हालांकि यह व्यवस्था बच्चों के लिए असुविधाजनक रही. मध्य विद्यालय में कुल 13 शिक्षक है. बच्चा का नामांकन करीब 400 है. जिसमें सोमवार को करीब 300 बच्चे उपस्थित हुए.

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स्कूल कंपाउंड में बैठे बच्चे (ETV Bharat)

सर्वांगीण विकास में बाधा: दरअसल दो शिफ्ट में पढ़ाई के कारण बच्चों के सर्वांगीण विकास में बाधा उतपन्न हो रही है. देर शाम तक छुट्टी होने से बच्चों को खेल-कूद व खुद की पढ़ाई के लिए वक्त नहीं मिल पा रहा है. इसलिए ग्रामीणों से साझा प्रयास से विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से बीते सोमवार को स्कूल बंद करा दिया. छात्रों का भी कहना है कि दोपहर की तेज गर्मी में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है. शाम पांच बजे छुट्टी होने के कारण उन्हें खेलकूद, स्वाध्याय और अन्य गतिविधियों के लिए भी समय नहीं मिल पाता.

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राखी कुमारी, छात्रा (ETV Bharat)

मॉर्निंग शिफ्ट में पढ़ाई की मांग: छात्र-छात्राओं की मांग है कि यदि पहली से 8वीं तक की पढ़ाई मॉर्निंग शिफ्ट में हो तो पढ़ाई के साथ-साथ उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी बेहतर होगा. विद्यालय के शिक्षक श्रवण कुमार के मुताबिक विद्यालय प्रधान के द्वारा मनमानी तरीके से बच्चों को डबल शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन बच्चे आने में असमर्थ है. उन्होंने बताया कि सोमवार को कमरे बंद रहने के कारण बच्चों को बरामदे और खुले स्थानों पर बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ी ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो.

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श्रवण कुमार, शिक्षक (ETV Bharat)

"विद्यालय प्रधान के द्वारा मनमानी तरीके से बच्चों को डबल शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन बच्चे आने में असमर्थ है. रोज स्कूल खुला रहता था लेकिन सोमवार को कमरे बंद रहने के कारण बच्चों को बरामदे और खुले स्थानों पर बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ी ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो." - श्रवण कुमार, शिक्षक

मामले ने लिया राजनीतिक रंग: हालांकि इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है. स्थानीय विधायक हरिनारायण सिंह ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर शिफ्ट व्यवस्था में बदलाव की मांग की है. उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को दोपहर की भीषण गर्मी में पढ़ाना व्यावहारिक नहीं है. उन्होंने कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई मॉर्निंग शिफ्ट और कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई दोपहर की शिफ्ट में संचालित करने की मांग की है.

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अंकुश कुमार, छात्र (ETV Bharat)

शिक्षकों से स्पष्टीकरण: वहीं पूरे मामले पर चंडी के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुमित कुमार ने बताया कि डीईओ कार्यालय के निर्देश के अनुसार ही विद्यालय में शिफ्टवार पढ़ाई कराई जानी है. निर्धारित व्यवस्था से अलग पठन-पाठन संचालित किए जाने के मामले में संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. दूसरी ओर अभिभावकों ने भी शिक्षा विभाग से जल्द निर्णय लेने की अपील की है. उनका कहना है कि बच्चों के हितों को प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उन्हें गर्मी में परेशानी न हो और कक्षाओं में सामान्य ढंग से पढ़ाई हो सके.

संसाधनों की उपलब्धता जरूरी: एक ओर सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्मार्ट स्कूलों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर 800 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालय में पर्याप्त कमरे तक नहीं हैं. नतीजा यह है कि छोटे बच्चों को कभी भीषण गर्मी में पढ़ना पड़ता है तो कभी बंद कमरों के कारण बरामदे में बैठकर पढ़ाई करवाई जा रही है. जाहिर है शिक्षा व्यवस्था में आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता भी काफी जरूरी है, ताकि नौनिहालों का भविष्य बेहतर हो सके.

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