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'प्लांट की गंदगी से खराब हो चुके हैं गांव के लोगों के किडनी-लीवर, कई पशुओं की मौत, स्किन प्रॉब्लम से जूझ रहा गांव'

दभोटा स्थित माजरा गांव में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के खिलाफ धरना 3 महीने से जारी है. लोगों ने प्रदूषण फैलने के आरोप लगाए.

धरने पर बैठे ग्रामीण
धरने पर बैठे ग्रामीण (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 27, 2026 at 1:57 PM IST

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नालागढ़: बीबीएन के दभोटा क्षेत्र में स्थित माजरा गांव में कथित कैमिकलयुक्त पानी को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. यहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ ग्रामीण पिछले करीब तीन महीने से कंपनी के बाहर धरने पर बैठे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी से निकलने वाले कथित कैमिकलयुक्त पानी के कारण गांव के हैंडपंप और घरों के नलों तक दूषित पानी पहुंच रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है.

दभोटा के माजरा गांव में कंपनी के बाहर पिछले करीब तीन महीने से ग्रामीणों का धरना जारी है. धरने पर बैठी गांव की बुजुर्ग महिला अजीत कौर का कहना है कि कंपनी के आसपास से निकलने वाले कैमिकलयुक्त पानी के कारण गांव में पेयजल को लेकर गंभीर समस्या पैदा हो गई है. गांव के हैंडपंप और घरों के नल में आने वाले पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. इस समस्या से शायद ही कोई परिवार अछूता हो. हमें त्वचा संबंधी परेशानियों सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

'कई पशुओं की हो चुकी है मौत'

धरने पर बैठे देविंद्र सिंह ने कहा कि 'इस प्लांट ने आतंक मचा रखा है. ट्रीटमेंट के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है. हमारे कई पशुओं की मौत हो चुकी है. सही से जांच की जाए तो कई लोगों की किडनी, लीवर सब डैमेज निकलेगा. पहले कंपनी की गंदगी सड़क तक फैली होती थी, लेकिन धरना शुरू होने के बाद से सड़क साफ हुई है. प्रशासन हमारा बिल्कुल साथ नहीं दे रहा है.'

कविता भी यहां लोगों के साथ धरने पर बैठी हैं उनका कहना है कि 'कंपनी सॉलिड वेस्ट के नाम पर लगी है, लेकिन यहां हर तरह का लिक्विड वेस्ट पहुंच रहा है. इससे हमारे बच्चों के भविष्य खराब हो रहा है. यहां पूरे बद्दी, नालागढ़ का कचरा पहुंच रहा है. हमारी मांग है कि यहां से इस कंपनी को हटाया जाए. वेस्ट मैनजमेंट कंपनी घनी आबादी के बीच लग ही नहीं सकती.'

'कंपनी का पक्ष सुनने के बाद लौटे अधिकारी'

ग्रामीणों का कहना है कि हम लगातार तीन महीने से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या उठा रहे हैं. कुछ दिन पहले अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन सिर्फ कंपनी का पक्ष सुनने के बाद वापस लौट गए और ग्रामीणों की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. बस अधिकारी और विधायक यहां एक बार आकर चले गए, लेकिन दूसरी बार यहां का रुख नहीं किया.

जांच के लिए भरे गए पानी के सैंपल

ग्रामीणों का दावा है कि कंपनी में काम करने वाला एक व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित और डॉक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं. हाल ही में जन्मे एक नवजात बच्चे की टांग में जन्म से समस्या है. ग्रामीण इन घटनाओं को लेकर चिंता जता रहे हैं, हालांकि इन मामलों और कथित प्रदूषण के बीच किसी संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है. हालांकि विभाग ने पानी के सैंपल भरे हैं, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है.

1 सितंबर को नालागढ़ में धरने का ऐलान

ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई केवल आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और भविष्य की लड़ाई है. उनका आरोप है कि कंपनी को आबादी से पर्याप्त दूरी पर स्थापित किया जाना चाहिए था. ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा. उन्होंने स्थानीय विधायक और प्रशासन से मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की बात सुनने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक जवाब दिया जाएगा. साथ ही 1 सितंबर को नालागढ़ में धरने का ऐलान कर दिया है. वहीं, दूसरी तरफ हमने कंपनी का पक्ष भी जानना चाहा और उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन हमारा कंपनी के किसी अधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया.

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