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गर्मी से पहले बूंद-बूंद पानी को तरसता बिहार का ये गांव, फेल है नल-जल योजना

कैमूर में नल जल योजना कई गावों में फेल है. यहां गली-गली पाइप बिछी है, लेकिन ग्रामीण तालाब-कुओं का पानी पीने को मजबूर हैं. पढ़ें-

नल जल योजना की पाइप दिखाती ग्रामीण महिला
नल जल योजना की पाइप दिखाती ग्रामीण महिला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : March 14, 2026 at 8:17 AM IST

7 Min Read
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रिपोर्ट: विशाल कुमार

कैमूर : साफ और स्वच्छ पानी जीवन का आधार है. यही कारण है कि साफ पानी अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों की श्रेणी में माना जाता है. नल का साफ पानी घर-घर पहुंचाना सीएम नीतीश की महत्वकांक्षी नल जल योजना भी है. केंद्र सरकार भी साफ पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, बावजूद इसके आज बिहार में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां लोग साफ पानी के लिए तरस रहे हैं.

बूंद-बूंद पानी को तरसता कैमूर का ये गांव : बिहार के कैमूर का भरीगांवा भी कुछ ऐसी ही समस्या से जूझ रहा है. भभुआ प्रखंड के रतवार पंचायत में पूरे गांव में नल जल की पाइप बिछी है लेकिन पानी का नामोनिशान तक नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि जब से पाइप बिछी है तब से आज तक इसके नल से जल आता नहीं देखा. गांव वाले आज भी तालाब या कुओं के जल से अपनी प्यास बुझाते हैं और जरूरतों को पूरा करते हैं.

देखें रिपोर्ट (ETV Bharat)

गली-गली नल जल योजना कि बिछी है पाइप : भरीगांवा गर्मी के पहले ही भीषण जल संकट से गुजर रहा है. गांव वालों का कहना है कि गांव में कोई सरकारी हैंडपंप नहीं है. कुछ हैंडपंप हैं भी तो वहां से पीने का पानी भरने नहीं दिया जाता है. ग्रामीण जल के लिए मछली की तरह छटपटा रहे हैं. नल जल योजना का सिस्टम यहां दिखाने के लिए फिट है बाकी ठेकेदार और अधिकारियों की लापरवाही के चलते जल संकट से घिरे हैं.

7-8 सौ घरों पर जल का संकट : अभी गर्मी ने हल्की सी दस्तक दी है और चांपाकलों का हलक सूख गया है. जलस्तर भी यहां पर तेजी से नीचे जा रहा है. भरीगांवा गांव में वार्ड नंबर 14 और 15 में 700-800 घर हैं. यहां के लोग आज भी कुआं का प्रदूषित पानी पीते हैं. जिसके चलते ग्रामीण बीमारियों से घिरे रहते हैं. ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही का अंजाम गांव वाले भुगत रहे हैं.

नल जल योजना की पाइप दिखाती ग्रामीण महिला
नल जल योजना की लगी पाइप लेकिन जल गायब (ETV Bharat)

क्या कहते हैं भरीगांवा गांव के ग्रामीण? : गांव के पानी की समस्या जब ईटीवी भारत की टीम को मिली तो हमने गांव जाने का फैसला किया. भरीगांवा गांव में पहुंचते ही महिला सुराही देवी एवं सोन मती देवी और शिवनाथ बिंद से मुलाकात हुई. उन्होंने बताया कि हम लोगों के गांव में पानी की काफी समस्या है, साफ पानी पीने को नहीं मिलने से 7-8 सौ घर के ग्रामीण परेशान हैं.

''हम लोगों के गांव में पानी की बड़ी समस्या है. नल का जल के लिए पाइप बिछी है लेकिन पानी नहीं आता. पीने के पानी के लिए काफी मुश्किल होती है. कभी कुआं तो कभी यहां वहां मांगकर पानी पीते हैं. तालाब के पानी का बी इस्तेमाल करते हैं.''-सुराही देवी, ग्रामीण महिला

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

'हमें साफ पानी दो सरकार..' : साफ पानी नहीं मिलने के चलते घर के सदस्यों का स्वास्थ्य भी खराब हो जाता है. इसको गांव वालों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के पेयजल की समस्या से निजात दिलाए, लेकिन फिर भी प्रशासन ने उनकी आज तक नहीं सुनी है. आलम ये है कि आजादी के इतने 7 दशक बीत जाने के बाद भी भरीगांवा गांव की समस्या खत्म नहीं हुई है.

क्या कहते हैं वार्ड सदस्य? : भरीगांवा गांव में क्यों पेयजल का संकट है तो इस मामले में वार्ड सदस्य सुशील कुमार ने कहा कि यहां पानी का स्टेटा 3 सौ फिट नीचे है, जिस कारण सभी लोग बोरिंग नहीं करा पाते हैं. गांव में कोई धनी लोग हैं जिनके पास बोरिंग कराया गया है, वहीं से गांव के सभी लोग पानी लेकर पीते हैं. बाकी लोग कुओं-तालाबों का सहारा लेते हैं.

''7 से 8 सौ घर के लोग कुंआ से आज भी पानी पीते हैं. पानी की समस्या को लेकर मैने कई बार पीएचईडी विभाग से अनुरोध किया तब जाकर दो टंकी पास हुई. 14 और 15 वार्ड में नल जल योजना के तहत टंकी लगाया गया और पानी का पाइप बिछाया गया. ठेकेदार अजीत ने नल जल योजना के तहत टंकी लगाया उससे तो पानी मिलता है, लेकिन ठेकेदार दिनेश सिंह द्वारा लगाये गये टंकी से नल जल योजना के तहत ग्रामीणों को आज तक पानी नहीं मिल पा रहा है.'' - सुशील कुमार, वार्ड सदस्य

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

क्या कहता है लोक स्वास्थ विभाग ? : कैमूर के लोक स्वास्थ्य विभाग ने इस मसले पर पूछे जाने पर प्रतिक्रिया दी है. कैमूर के लोक स्वास्थ्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता रवि प्रकाश ने कहा कि बंद पड़े चापाकलों को रिपेयर करने के लिए टीम को प्रखंड स्तर पर भेजा गया है. टीम 2164 बंद पड़े चापाकलों को सुधारेगी ताकि गर्मी से पहले-पहले लोगों को समस्या से छुटकारा दिलाया जा सके. लोग कंट्रोल रूम में बंद पड़े चापाकलों की सूचना 06189-223445 नंबर पर दे सकते हैं.

''हर साल की भांति इस साल भी हमारे विभाग के द्वारा चापाकल मरम्मती दल को रवाना किया गया है. कैमूर डीएम नितिन कुमार सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है. ये दल जिले के सभी प्रखंडों में जाकर बंद पड़े चपकालों की मरम्मती करेंगे, विभाग के द्वारा बंद पड़े चपकलों का सर्वे कराया जा रहा है, फिलहाल हम लोग के पास 2164 बंद पड़े चककलों का लक्ष्य है.''- रवि प्रकाश, कार्यपालक अभियंता, कैमूर लोक स्वास्थ प्रमंडल

नल जल योजना की पाइप दिखाती ग्रामीण महिला
जल के लिए तरसते भरीगांवा के ग्रामीण (ETV Bharat)

एक महीना चलेगा मरम्मती कार्य : कार्यपालक अभियंता ने बताया कि गर्मी के दिनों में वाटर लेबल भाग जाने से चापाकलों का पानी चला जाता है. वैसे चापाकलों में पाइप, छड़ और वासर लगाकर उसे चालू किया जाता है. हर प्रखंड में चार लोगों की टीम भेजा जा रहा है, ताकि बंद पड़े चांपाकलों कि मरम्मती किया जा सके. अगर जरूरत पड़ती है तो टीम में और लोगों को बढ़ाया जाएगा. हम लोगों का लक्ष्य है कि एक महीना में सभी चापाकलों की मरम्मती का कार्य पूरा किया जाए.

पानी की समस्या का कैसे होगा निपटारा? : बता दें कि कैमूर जिला में अधौरा पहाड़ी क्षेत्र में बसे 108 गांव हैं, जहां कई गांवों में आज भी लोग शुद्ध पानी पीने को तरसते हैं. अब देखना यह होगा कि इन लोगों के लिए इस बार जिला प्रशासन क्या पहल करता है? ताकि बूंद-बूंद जल के लिए तरस रहे इन लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाई जा सके.

नल जल योजना की पाइप दिखाती ग्रामीण महिला
गली-गली बिछी है नल जल की पाइप, कब मिलेगा पानी? (ETV Bharat)

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