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भीमताल के जून एस्टेट में पेड़ काटने की नहीं मिलेगी अनुमति, हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

नैनीताल जिले के जून एस्टेट भीमताल क्षेत्र में पेड़ों के कटान मामले पर हाईकोर्ट सख्त, अब नही दी जाएगी अनुमति

Nainital High Court
नैनीताल उच्च न्यायालय (फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 2, 2026 at 10:46 PM IST

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नैनीताल: भीमताल के जून एस्टेट क्षेत्र को लेकर पीटर स्मेटा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस क्षेत्र में पेड़ों के कटान और कटाई के लिए कोई भी अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी. यह अंतरिम रोक वन विभाग, स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों पर समान रूप से लागू होगी.

कोर्ट ने एक पुरानी रिपोर्ट पर विशेष संज्ञान लिया है, जिसे तत्कालीन उप वन संरक्षक मनोज चंद्रन की ओर से तैयार किया गया था. इस रिपोर्ट में जोन्स एस्टेट को 'वन पंचायत' और एक महत्वपूर्ण 'जलागम क्षेत्र' के रूप में वर्णित किया गया है. हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने इस रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि इस पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर या मुहर नहीं है.

सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य ये भी सामने आया कि यह महत्वपूर्ण सरकारी रिपोर्ट कथित तौर पर गायब हो गई है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस दस्तावेज के गुम होने की खबर मार्च 2014 में एक समाचार पत्र में भी प्रकाशित हुई थी. कोर्ट ने अब राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे संबंधित अखबार के प्रकाशक से इस खबर की सत्यता की पुष्टि करें.

वहीं, हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जनहित याचिका कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है, बल्कि समाज और पर्यावरण की बेहतरी के लिए एक सामूहिक प्रयास है. पीठ ने टिप्पणी की कि चूंकि इस मामले में कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि, पूरी नागरिक सभ्यता हितधारक है, इसलिए रिपोर्ट की गहन जांच आवश्यक है.

संवेदनशील जलागम क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए? कोर्ट ने सरकार को ये भी सोचने को कहा कि क्या इतने संवेदनशील जलागम क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तारीख निर्धारित की है. तब तक क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.

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