पंचायत चुनाव से जुड़े रंजिश में दर्ज आपराधिक मामले में कार्रवाई पर रोक, जानिए पूरा मामला
चंपावत में पंचायत चुनाव से संबंधित रंजिश में दर्ज एक आपराधिक मामले की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 25, 2026 at 8:49 PM IST
नैनीताल: चंपावत जिले में पंचायत चुनाव से संबंधित रंजिश में दर्ज एक आपराधिक मामले की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. साथ ही मामले में राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है. न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने महेंद्र सिंह ढेक और अन्य की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंपावत के समक्ष लंबित आपराधिक मामले की कार्रवाई को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है.
क्या है पूरा मामला? यह पूरा विवाद अगस्त 2025 की एक घटना से शुरू हुआ था. शिकायतकर्ता महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 14 अगस्त 2025 की रात करीब 11:25 बजे महेंद्र ढेक समेत अन्य ने उनके घर का दरवाजा तोड़ा. जिसके बाद वो बेडरूम में घुस आए. महिला का दावा था कि उसने अपने पति और बच्चों के साथ किसी तरह कमरे में खुद को बंद कर जान बचाई और पुलिस के आने के बाद ही आरोपी वहां से भागे.
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी. महेंद्र ढेक के वकील संजय भट्ट ने अदालत में तर्क दिया कि यह पूरा मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. उन्होंने बताया याची ने बीडीसी सदस्य का चुनाव लड़ा था और अन्य आवेदक उनके समर्थक हैं.
दूसरी ओर शिकायतकर्ता के पति प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थक थे. जिसे महेंद्र ढेक ने चुनाव में हराया था. बचाव पक्ष का कहना है कि इसी राजनीतिक रंजिश का बदला लेने के लिए पत्नी के जरिए यह झूठी और मनगढ़ंत शिकायत दर्ज कराई गई है. सुनवाई के दौरान ये तथ्य भी सामने आया कि पुलिस की जांच रिपोर्ट में शिकायतकर्ता के दावों की पुष्टि नहीं हुई है.
याची के वकील ने कोर्ट को बताया कि शिकायत में दरवाजा तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया गया था, लेकिन पुलिस की किसी भी रिपोर्ट में घर का दरवाजा टूटा हुआ नहीं पाया गया. साथ ही एफआईआर में 10 लोगों के नाम थे, लेकिन पुलिस ने बिना किसी पुख्ता सबूत के केवल 9 लोगों (वर्तमान आवेदकों) के खिलाफ ही चार्जशीट पेश कर दी, जो जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है.
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