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रजिस्ट्रार के वैधानिक आदेश पर हुई सेवा समाप्ति के खिलाफ दायर स्पेशल अपील सुनवाई योग्यः नैनीताल हाईकोर्ट

नैनीताल हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है. जानिए क्या है पूरा मामला?

Nainital High Court
नैनीताल हाईकोर्ट (फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 26, 2026 at 10:36 PM IST

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि 'यदि किसी सहकारी समिति के कर्मचारी की सेवा समाप्ति, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार या वैधानिक अधिकार का प्रयोग करने वाले अधिकारी के निर्देश पर की गई हो, तो उसके खिलाफ दायर याचिका याचिका सुनवाई योग्य होगी.' अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में ये नहीं कहा जा सकता कि याचिका केवल सहकारी समिति की कार्रवाई के विरुद्ध ही हो.

मामले की सुनवाई बीते हफ्ते मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में विशेष अपील पर हुई. यह अपील उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें एकलपीठ ने याचिका को सुनवाई योग्य न पाते हुए खारिज कर दिया था.

क्या है मामला? दरअसल, अपीलकर्ता सहकारी समिति में सहायक के पद पर कार्यरत था. उसने जिला सहायक निबंधक, सहकारी समितियों की ओर से जारी उस आदेश को एकलपीठ में रिट याचिका दायर कर चुनौती थी, जिसमें समिति को उसकी नियुक्ति रद्द करने और उसे वेतन भुगतान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिए गए थे.

जिला सहायक निबंधक के आदेश का अनुपालन में सहकारी समिति ने अपीलकर्ता की सेवाएं समाप्त कर दी थीं. इसी सेवा समाप्ति आदेश को भी याचिका में चुनौती दी गई. एकलपीठ ने ये कहते हुए याचिका को खारिज किया कि प्राथमिक सहकारी समिति संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' की परिभाषा में नहीं आती, इसलिए उसके खिलाफ याचिका याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.

सुनवाई के दौरान खंडपीठ में अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि उसकी सेवा समाप्ति का वास्तविक आधार जिला सहायक निबंधक द्वारा वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया था. इसलिए मामले की वैधता की जांच हाईकोर्ट में रिट याचिका के माध्यम से की जा सके.

खंडपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता की सेवाएं वास्तव में उत्तराखंड सहकारी समितियां अधिनियम 2003 के तहत रजिस्ट्रार की शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला सहायक निबंधक की ओर से दिए गए निर्देशों के आधार पर समाप्त की गईं. अदालत ने कहा कि इस मामले में यह जांच करना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी ने जो निर्देश जारी किया है, क्या वे वास्तव में अधिनियम के तहत प्राप्त शक्तियों के दायरे में है और क्या उन शक्तियों का प्रयोग नियमों के तहत किया गया.

याचिका में एक महत्वपूर्ण प्रश्न ये था कि जिला सहायक निबंधक की ओर से जारी निर्देश, अधिनियम के तहत उनकी शक्तियों के दायरे में थी या नहीं. मामले के तथ्यों में उन शक्तियों का प्रयोग वैध था या नहीं. इस प्रश्न की वैधता की जांच रिट कोर्ट निश्चित रूप से कर सकती है. खंडपीठ ने कहा कि इसलिए ये नहीं माना जा सकता कि याचिका केवल सहकारी समिति की कार्रवाई के विरुद्ध थी. इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने एकलपीठ के आदेश से असहमत होकर उसे रद्द किया और विशेष अपील स्वीकार किया.

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