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कोसी नदी अवैध खनन मामला, हाईकोर्ट में सुनवाई, राज्य सरकार से मांगा जबाव

नैनीताल हाईकोर्ट में आज कोसी नदी अवैध खनन मामला और समाजसेवी भुवन पोखरिया गिरफ्तारी मामले पर सुनवाई हुई.

NAINITAL HIGH COURT
नैनीताल हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : April 29, 2026 at 8:25 PM IST

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उधम सिंहनगर के सुल्तानपुर पट्टी में कोसी नदी पर अवैध खनन के मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने राज्य सरकार, सहित खनन विभाग से दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है. साथ में कोर्ट ने पूछा है कि पूर्व के आदेश को क्यों अमल नही लाया गया. दो सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करें.

पूर्व में कोर्ट ने अवैद्ध खनन को लेकर एसएसपी, जिला खनन अधिकारी सहित जिला अधिकारी से जवाब पेश करने के साथ साथ खनन कार्य मे लगे भारी मशीनों पर रोक लगाते हुए अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा था. जिसकी रिपोर्ट अब तक पेश नहीं की गई. जिस पर आज कोर्ट ने रिपोर्ट पेश करने को कहा है. मामले के अनुसार उधमसिंह नगर के सुल्तानपुर पट्टी निवासी सलीम अहमद ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि कोसी नदी में धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है. कोसी नदी के तट पर मौजूद बिजली के हाई टेंशन टावर के लगभग 20 फीट नीचे तक खुदाई की जा रही है. जिससे टावर कभी भी धराशाई हो सकता है. इससे भारी जानमाल का नुक़सान हो सकता है. लिहाजा इस खनन कार्य पर रोक लगाई जाये. जिससे भविष्य में कोई अप्रिय घटना घटित न हो.

वहीं, ​हल्द्वानी के चोरगलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत नंधौर रेंज में वन विभाग की टीम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच विवाद का मामला गरमा गया है. जानकारी के अनुसार, अगस्त 2025 में वन विभाग की टीम लखनमंडी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी. जहां समाजसेवी भुवन पोखरिया, प्रतीक्षा पांडे और महेश जोशी ने स्थानीय निवासी हरीश पोखरिया के आशियाने को बचाते हुए कार्रवाई का विरोध किया था. इस दौरान मौके पर हुए समझौते के बावजूद, बाद में वन क्षेत्राधिकारी की तहरीर पर समाजसेवियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और अधिकारियों के साथ अभद्रता करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (132, 221, 352) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया.

​इस मामले में नया मोड़ तब आया जब समाजसेवी भुवन पोखरिया ने एफआईआर (FIR) निरस्त करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया है. कोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि वन विभाग के अधिकारियों (SBO Forest) और जनप्रतिनिधियों के बीच लिखित समझौता हुआ था. जिसे आधार बनाकर अब मुकदमा रद्द करने की मांग की जा रही है. कोर्ट ने डीएफओ (DFO) हल्द्वानी वन प्रभाग को शनिवार तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई के लिए शनिवार की तिथि निर्धारित की गई है.

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