उत्तराखंड में पत्राचार के जरिए बीटीसी करने वाले अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई, HC ने दिए ये आदेश
उत्तराखंड में पत्राचार के माध्यम से बेसिक टीचर सर्टिफिकेट हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, जानिए क्या है पूरा मामला?

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 9, 2026 at 3:49 PM IST
नैनीताल: उत्तराखंड में पत्राचार के माध्यम से बेसिक टीचर सर्टिफिकेट (बीटीसी) प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं से निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देने को कहा है. साथ ही शिक्षा निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार 3 महीने के भीतर उचित निर्णय लें. इस पूरे मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई.
दरअसल, याचिकाकर्ता प्रतीक सकलानी समेत अन्य ने पत्राचार के माध्यम से बीटीसी यानी बेसिक टीचर सर्टिफिकेट की डिग्री ली थी. हालांकि, उनकी मार्कशीट में एक विशेष शर्त अंकित थी कि यह प्रमाण पत्र राज्य के अधीन नियुक्ति के लिए मान्य नहीं होगा. याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क ये था कि उनके साथ ही इसी माध्यम से डिग्री हासिल करने वाले कई अन्य उम्मीदवारों को सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया है, इसलिए उन्हें भी सार्वजनिक रोजगार के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं का यह दावा गलत है कि समान स्थिति वाले व्यक्तियों को नियमित नियुक्तियां दी गई हैं. सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि कुछ उम्मीदवारों को केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए समेकित मानदेय पर संविदात्मक नियुक्ति दी गई थी, न कि नियमित नियुक्ति. साथ ही सरकार ने 27 नवंबर 2006 के शासनादेश की वैधता का भी हवाला दिया, जिसे पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ भी बरकरार रख चुकी है.
याचिकाकर्ताओं के वकील ने रखी ये मांग: याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट के समक्ष यह मांग रखी कि चूंकि कुछ अन्य समान योग्यता वाले लोग अभी भी संविदा के आधार पर सेवा में बने हुए हैं, इसलिए उनके मुवक्किलों के प्रत्यावेदन पर भी विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि सक्षम प्राधिकारी को उनके अनुबंध के आधार पर नियुक्ति के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए निर्देशित किया जाए. राज्य सरकार के वकील ने इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं जताई.
वहीं, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने याचिकाओं को एक साथ निस्तारित करते हुए शिक्षा विभाग को समयबद्ध निर्णय लेने का आदेश दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ अपना प्रत्यावेदन निदेशक प्रारंभिक शिक्षा के समक्ष पेश करना होगा, जिस पर अगले 90 दिनों के भीतर फैसला लिया जाएगा.
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