रामपुर तिराहा कांड के आरोपियों को सजा दिलाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई, जानिए हाईकोर्ट में क्या हुआ?
नैनीताल हाईकोर्ट में रामपुर तिराहा कांड बर्बरता करने वाले आरोपियों को सजा दिलाए जाने को लेकर मामले पर सुनवाई, याचिकाकर्ता से मांगी लिखित प्रति

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : June 29, 2026 at 9:57 PM IST
नैनीताल: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहा कांड के आरोपियों को सजा दिलाए जाने से जुड़े मामले को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वे इस संबंध में जो कुछ कहना चाह रहे हैं, उसका लिखित प्रति कोर्ट के पेश करें.
सुनवाई कहां हो इलाहाबाद हाईकोर्ट में या नैनीताल हाईकोर्ट में? आज सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह प्रश्न उठा कि इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में होनी चाहिए या नैनीताल हाईकोर्ट में? क्योंकि, रामपुर तिराहा कांड के समय दोनों राज्य एक ही थे, जो बाद में अलग हुए. इस मामले पर कोर्ट ने याचिककर्ता से लिखित जवाब पेश करने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी.
दरअसल, उत्तराखंड आंदोलनकारी अधिवक्ता मंच के अध्यक्ष रमन साह ने जिला जज व विशेष जज सीबीआई देहरादून की अदालत की ओर से मुजफ्फरनगर कांड से संबंधित मुकदमे को देहरादून से मुजफ्फरनगर कोर्ट में ट्रांसफर करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

याकचिकाकर्ता का कहना है कि 2 अक्टूबर 1994 को उत्तराखंड आंदोलन के दौरान दिल्ली जा रहे सैकड़ों उत्तराखंडियों के साथ रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर) में बर्बरतापूर्ण व्यवहार हुआ था. इस मामले की सीबीआई जांच के बाद सीबीआई ने देहरादून की अदालत में उक्त आरोपियों के खिलाफ 304 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी.
जिसका कोर्ट ने 302 के तहत संज्ञान लिया था. इस मामले में अधिवक्ता रमन साह ने सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को हाईकोर्ट में दायर करने की छूट दी थी. जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट में दायर हुआ है. जबकि, मुजफ्फरनगर के तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह अब सेवानिवृत्त हैं.
क्या था मामला? गौर हो कि साल 1994 को 2 अक्टूबर के दिन उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) पृथक राज्य की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए आंदोलनकारी दिल्ली जा रहे थे. जिन पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस ने बर्बरता की थी.
इस दौरान महिला आंदोलनकारियों के साथ जोर जबरदस्ती के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था. जबकि, फायरिंग में कुछ आंदोलनकारियों की जान चली गई थी. इस घटना ने पूरे उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) को झकझोर कर रख दिया था.
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