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विभिन्न सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत असिस्टेंट लाइब्रेरियनों के वेतनमान पर सुनवाई, जानिए क्या हुआ?

नैनीताल हाईकोर्ट में विभिन्न सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत असिस्टेंट लाइब्रेरियनों के वेतनमान संशोधन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई,मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेजा

Nainital High Court
नैनीताल हाईकोर्ट (फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : July 6, 2026 at 10:54 PM IST

3 Min Read
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नैनीताल: उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत असिस्टेंट लाइब्रेरियनों के वेतनमान संशोधन से जुड़ी याचिका को हाईकोर्ट ने निस्तारित कर दिया है. कोर्ट ने पूर्व में राज्य सरकार की ओर से याचिकाकर्ताओं के दावे को खारिज करने वाले आदेश में कमियां पाते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है. मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में हुई.

क्या है मामला? याचिकाकर्ता योगेंद्र सिंह राणा समेत अन्य का तर्क था कि वे उत्तराखंड के सरकारी डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं. उनके पास लाइब्रेरी साइंस में उच्च शैक्षणिक डिग्री है. इसके बावजूद उन्हें कैटलॉगर्स के समान ही 2,800 रुपए का ग्रेड पे दिया जा रहा है. जबकि, कैटलॉगर्स के पास केवल लाइब्रेरी साइंस में डिप्लोमा होता है.

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि उच्च पद और उच्च योग्यता होने के बावजूद समान ग्रेड पे देना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है. वहीं, राज्य सरकार ने पूर्व में 14 सितंबर 2020 को एक आदेश जारी कर इस दावे को ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि समता समिति की रिपोर्ट लागू होने के बाद विभिन्न कैडरों की पारस्परिक समानता समाप्त कर दी गई है.

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के तर्कों पर सहमति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने फैसला लेते समय कैटलॉगर्स और असिस्टेंट लाइब्रेरियन की शैक्षणिक योग्यता के अंतर पर ध्यान नहीं दिया. अदालत ने ये भी रेखांकित किया कि असिस्टेंट लाइब्रेरियन वास्तव में कैटलाॅगर के लिए एक पदोन्नति (प्रमोशनल) पद है, जिसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया था.

इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को तीन हफ्ते के भीतर राज्य सरकार के समक्ष नया प्रतिवेदन पेश करने की छूट दी है. साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वो कानून के अनुसार 8 महीने के भीतर इस वेतनमान संशोधन के मामले पर सहानुभूतिपूर्वक और नए सिरे से निर्णय लें. फिलहाल, इस सुनवाई को असिस्टेंट लाइब्रेरियनों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है.

अभियोजन निदेशक के पद को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई: नैनीताल हाईकोर्ट ने अभियोजन निदेशक के पद को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि आपकी ओर से अभियोजन निदेशक पद के लिए क्या नियम बनाए गए हैं? इस पर एक महीने के भीतर जवाब पेश करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई एक महीने बाद होगी.

आज हुई सुनवाई पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पूर्व में कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से स्थिति से अवगत कराने को कहा था, लेकिन अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया. इस पर राज्य सरकार की तरफ से जवाब पेश करने के लिए और समय दिए जाने की मांग की गई. जिस पर कोर्ट ने सरकार को एक महीने का समय देते हुए पूछा है कि इसके लिए क्या नियम बनाए गए हैं, उसको भी पेश करें.

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