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पौड़ी के सिद्धपीठ मां ज्वाल्पा देवी मंदिर में अतिक्रमण मामले पर सुनवाई, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

पौड़ी के प्रसिद्ध ज्वाल्पा देवी मंदिर में अतिक्रमण मामले पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को रखना होगा पक्ष

Nainital High Court
नैनीताल हाईकोर्ट (फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 6, 2026 at 8:31 PM IST

2 Min Read
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नैनीताल: पौड़ी गढ़वाल के सुप्रसिद्ध मंदिरों में से एक सिद्धपीठ मां भगवती ज्वाल्पा देवी मंदिर पर कई लोगों की ओर से अतिक्रमण करने और मंदिर पर अपना हकहकूक दायर करने के मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया है. साथ ही राज्य सरकार समेत उनसे अपना पक्ष कोर्ट में दो हफ्ते के भीतर रखने को कहा है.

दरअसल, पौड़ी गढ़वाल निवासी हरि किशन थपलियाल ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है. जिसमें उन्होंने कहा है कि पौड़ी में सिद्धपीठों में से एक मां भगवती ज्वाल्पा देवी मंदिर स्थापित है. जिस पर स्थानीय लोगों की अटूट आस्था और श्रद्धा है. जहां रोजाना श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं. नवरात्रि हो या अन्य खास मौकों पर तो यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है.

यह मंदिर सिद्धपीठ होने की वजह से इसकी धार्मिक महत्ता दूर-दूर तक है, लेकिन आरोप है कि कई लोगों की ओर से मंदिर की भूमि और मंदिर पर अपना कब्जा किए हुए हैं. जिसकी वजह से पूजा करने वालों श्रद्धालुओं को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है.

याचिका में कहा गया है कि ज्वाल्पा मंदिर को इन अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जाए. ताकि, श्रद्धालु बिना रोक टोक के मंदिर में अपनी पूजा अर्चना कर सकें. जिस पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया है. जबकि, राज्य सरकार से कोर्ट में पक्ष रखने के आदेश दिए हैं. अब पूरे मामले में अगली सुनवाई दो हफ्ते के बाद होगी.

मां ज्वाल्पा देवी मंदिर के बारे में जानिए: बता दें कि मां ज्वाल्पा देवी मंदिर पौड़ी-कोटद्वार सड़क पर नयार नदी के किनारे स्थित है. जो मां दुर्गा को समर्पित एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ है. मान्यता है कि इस सिद्धपीठ में पहुंचने वाले भक्तों की हर मुराद को मां भगवती पूरा करती हैं.

स्कंदपुराण के मुताबिक, यहां पर देवी शची ने देवराज इंद्र को पाने के लिए मां पार्वती की आराधना की थी. जो यहां पर पूरी हुई थी. यही वजह है कि अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर की मनोकामना को लेकर ज्वाल्पा देवी मंदिर पहुंचती हैं. ज्वाल्पा देवी को खासकर थपलियाल और बिष्ट जाति के लोगों की कुलदेवी माना जाता है.

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