उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में नियुक्ति मामले में सुनवाई, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछे ये सवाल
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर नियुक्ति मामले में सुनवाई, पुलिस टेली कम्युनिकेशन असिस्टेंट ऑपरेटरों की पदोन्नति मामले में भी सुनवाई

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 19, 2026 at 10:47 PM IST
नैनीताल: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से अगले हफ्ते यानी बुधवार तक जवाब मांगा है.
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि दो बार आदेश देने के बाद भी इसका अनुपालन क्यों नहीं किया गया? इस पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि यह प्रक्रिया गतिमान है. बिना सरकार के अनुमोदन के इस पोस्ट को फिलअप नहीं कर सकते है. अभी मामला शासन में विचाराधीन है.
बता दें कि इस मामले को शादाब आलम की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वक्फ बोर्ड के सीईओ के पद पर राज्य सरकार की ओर से संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी के बजाय अंडर सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी नियुक्ति की गई है, जो कि पूरी गलत है.
सरकार की ओर से सीएससी चंद्र शेखर रावत की ओर से अदालत को बताया गया कि यह नियुक्ति अंतरिम व्यवस्था के तहत की गई है. स्थायी प्रक्रिया जारी है. जल्द ही उपयुक्त अधिकारी की तैनाती कर दी जाएगी. खंडपीठ ने सरकार को इस संबंध में जवाब देने को कहा है. अब इस मामले में अगले हफ्ते सुनवाई होगी.
पुलिस विभाग में असिस्टेंट ऑपरेटरों की पदोन्नति मामले में भी सुनवाई: उत्तराखंड पुलिस विभाग में टेली कम्युनिकेशन में कार्यरत असिस्टेंट ऑपरेटरों की पदोन्नति नियमावली 2 वर्ष की जगह 5 वर्ष करने और पदों की संख्या कम किए जाने की नियमावली 2021 को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है.
दरअसल, पुलिस विभाग के टेली कॉमनुकेशन के पद पर कार्यरत असिस्टेंट ऑपरेटर राधेश सिंह रावत, विपिन समेत अन्य ने पुलिस में सहायक ऑपरेटरों की पदोन्नति 2 वर्ष की सेवा अवधि को 5 वर्ष व पदों की संख्या कम किए जाने जाने वाले 2021 के शासनादेश को चुनौती दी है. जिसको लेकर उन्होंने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.
उनका कहना है कि साल 2017 में जब वे पुलिस विभाग में टेली कम्युनिकेशन असिस्टेंट ऑपरेशन नियुक्त हुए थे. तब 2 साल की सेवा अवधि के बाद उन्हें पदोन्नति कर हेड ऑपरेटर के पद पर नियुक्त कर दिया जाता था. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से जारी 2021 के शासनादेश के बाद पिछले 9 सालों बाद भी उन्हें पदोन्नति नहीं मिल पाई है.
पहले इस विभाग में दो साल की सेवा करने के बाद पदोन्नति देने का नियम था, लेकिन सरकार ने इस संसोधन करने कर दिया है. 9 साल की सेवा करने के बाद भी उनकी पदोन्नति नहीं हुई है. ऐसे में मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है.
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