बागेश्वर खड़िया खनन मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई, एक कंपनी को मिली काम करने की अनुमति
नैनीताल हाईकोर्ट ने बागेश्वर के कांडा तहसील समेत अन्य गांवों में खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में सुनवाई की.एक कंपनी राहत दी है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 25, 2026 at 10:39 PM IST
नैनीताल: बागेश्वर जिले के कांडा तहसील समेत कई अन्य गांवों में अवैध खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इसके अलावा 165 खनन इकाइयों से संबंधित याचिकाओं पर भी सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कंपनी के हक में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि कंपनी फिर से अपना काम कर सकती है, बशर्ते उसे राज्य प्रदूषण बोर्ड के मानक पूरे करने होंगे.
कंपनी को फिर से संचालन करने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के चार महीने के बाद नो ऑब्जेक्शन प्रमाण पत्र (NOC) यूकेपीसीबी यानी उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) से लेना होगा. न लेने पर कोर्ट का आदेश यथावत रहेगा. कोर्ट ने बाकी खनन इकाइयों को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है.
सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कंपनी के बंद होने के कारण सरकार के राजस्व में कमी आई है. लिहाजा, इसे खोलने की अनुमति दी जाए. जबकि. इस कंपनी ने कोई भी अवैध खनन नहीं किया है. कंपनी ने यूकेपीसीबी के मानकों व उसकी अनुमति के बिना कोई खनन नहीं किया है.
कंपनी सभी मानकों को पूरा करती है. इसलिए कंपनी पर लगी रोक को हटाया जाए. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने कंपनी पर लगी रोक को हटाते हुए कहा कि वे सभी नियमावलियों का अनुपालन करें. साथ ही राज्य प्रदूषण बोर्ड के नियमों का अनुपालन करें. कोर्ट ने किसी अन्य खनन इकाइयों पर लगी लगी रोक पर किसी को अंतरिम राहत नहीं दी है.
क्या है मामला? बता दें कि पूर्व में बागेश्वर के कांडा तहसील के ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा था कि अवैध खड़िया खनन से उनकी खेती बाड़ी, घर, पानी की लाइनें चौपट हो चुकी है. जो धन से सपन्न थे, उन्होंने अपना आशियाना हल्द्वानी या अन्य जगहों पर बना दिया है. अब गांवों में निर्धन लोग ही बचे हुए हैं.
आरोप है कि उनके जो आय के साधन थे, उन पर अब खड़िया खनन के लोगों की नजर टिकी हुई है. इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को प्रत्यावेदन भी दिया गया, लेकिन उनकी समस्या का कुछ हल नहीं निकला. इसलिए अब हम सभी न्यायालय की शरण में आए हैं, उनकी समस्या का समाधान किया जाए.
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