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उत्तराखंड हाईकोर्ट की निचली अदालत को कड़ी फटकार, ₹31 करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़ा है मामला

नैनीताल HC ने पतंजलि ग्रुप की यूनिट्स से जुड़े हाई-प्रोफाइल फ्रॉड केस में लोअर कोर्ट को फटकार लगाई.

PATANJALI GROUP
उत्तराखंड हाईकोर्ट की निचली अदालत को कड़ी फटकार (PHOTO- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 31, 2026 at 10:29 PM IST

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने पतंजलि समूह की इकाइयों से जुड़े बहुचर्चित ठगी मामले में हरिद्वार की निचली अदालत को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने न्यायिक अनुशासन का पालन न करने पर नाराजगी जताते हुए ट्रायल कोर्ट को धोखाधड़ी से जुड़े ₹31.21 करोड़ की फ्रीज राशि के निस्तारण (धारा 451 सीआरपीसी) पर दो सप्ताह के भीतर अंतिम फैसला सुनाने के सख्त निर्देश दिए हैं.

मामला जून 2022 का है, जब पतंजलि के प्रतिनिधि रमण पंवार की शिकायत पर कनखल थाने में मुख्य आरोपी राकेश मेहरा और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी. जिसके बाद जांच एजेंसी ने राकेश मेहरा और उनकी बेटियों के खातों से ₹31.21 करोड़ की राशि फ्रीज कर दी थी.

​पीड़ित पक्ष द्वारा फ्रीज राशि को मुक्त कराने के लिए दाखिल अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई 2025 को ट्रायल कोर्ट को कानून के अनुसार निस्तारण का स्पष्ट आदेश दिया था. इसके बावजूद 22 जुलाई 2026 को हरिद्वार की ट्रायल कोर्ट ने यह तर्क देते हुए फैसला टाल दिया कि हाईकोर्ट द्वारा प्रशासनिक स्तर पर उनसे कुछ टिप्पणियां मांगी गई है.

इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने 24 अगस्त 2026 को कहा कि, सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत है और प्रशासनिक पत्राचार का बहाना बनाकर उसके आदेश का पालन न करना न्यायिक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है.

उच्च न्यायालय ने आरोपी पक्ष की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के जज पर पक्षपात का आरोप लगाकर मामला ट्रांसफर करने की मांग की थी. याचिकाओं का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने हरिद्वार के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय को आदेश दिया कि वे आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर 15 जुलाई 2026 को पूरी हो चुकी सुनवाई के आधार पर 451 सीआरपीसी के तहत दाखिल आवेदनों पर अपना अंतिम फैसला सुनाएं.

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