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हाईकोर्ट की चमोली जिला प्रशासन और यूकाडा को फटकार, हेलीपैड अधिग्रहण आदेशों को किया निरस्त, जानें पूरा मामला

नैनीताल HC ने गोविंदघाट हेलीपैड के अस्थायी अधिग्रहण के चमोली जिला प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया है.

Govindghat helipad acquisition
हाईकोर्ट की चमोली जिला प्रशासन और यूकाडा को फटकार (PHOTO- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 26, 2026 at 5:13 PM IST

3 Min Read
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​नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चमोली जिले के गोविंदघाट स्थित हेलीपैड के अस्थाई अधिग्रहण को पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रक्रियागत नियमों का उल्लंघन करार दिया है. न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने मामले में फैसला सुनाते हुए जिला प्रशासन चमोली द्वारा 23 मई 2024 और 27 जून 2025 को जारी किए गए अधिग्रहण आदेशों को निरस्त कर दिया. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 'भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013' की धारा 81(2) के तहत किसी भी संपत्ति के अस्थाई अधिग्रहण से पहले प्रभावित पक्ष को लिखित नोटिस और पर्याप्त समय देना अनिवार्य था, जिसका पालन करने में राज्य प्रशासन पूरी तरह विफल रहा.

​यह मामला मेसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिकाओं से जुड़ा है. कंपनी वर्ष 2011 से गोविंदघाट से श्री हेमकुंड साहिब जी के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन कर रही थी और उसने निजी भूस्वामियों से लीज पर जमीन लेकर भारी लागत से वहां हेलीपैड और यात्री लाउंज विकसित किया था.

मई 2024 में चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा की शुरुआत के दौरान, नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण और चमोली जिला प्रशासन ने जल्दबाजी में आपात स्थिति का हवाला देते हुए हेलीपैड का ताला तोड़कर कब्जा ले लिया था और उसका संचालन पवन हंस लिमिटेड को सौंप दिया था.

​सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि यात्रा सीजन के कारण जनहित में यह कदम उठाना आवश्यक था और कंपनी की लीज अवधि का पंजीकरण समाप्त हो चुका था. इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि, 24 घंटे का समय देकर या बिना पूर्व सूचना के किसी की संपत्ति का अधिग्रहण करना कानून का उल्लंघन है.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपंजीकृत लीज के बावजूद कंपनी वहां वास्तविक कब्जे में थी और 2013 अधिनियम की धारा 3(एक्स) के तहत 'हितबद्ध व्यक्ति' की श्रेणी में आती है, जिसे नोटिस पाने और अपनी बात रखने का विधिक अधिकार है.

​अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए चमोली के जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर गोविंदघाट स्थित हेलीपैड का पूरा नियंत्रण और कब्जा याचिकाकर्ता कंपनी को वापस सौंपें और कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट जमा करें. इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अवैध अधिग्रहण की पूरी अवधि के लिए कंपनी को यूकाडा की 'हेलीपैड नीति 2023-24' और 'लैंडिंग दर सूची 2018' की बाजार दरों के मुताबिक उचित मुआवजा और लैंडिंग शुल्क का भुगतान किया जाए.

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