नैनीताल में कृषि और आवासीय भूमि पर बना डाले रिजॉर्ट, अब सरकार में निहित हो गई जमीन
नैनीताल जिले में कृषि और आवासीय भूमि पर रिसॉर्ट संचालन करना पड़ा भारी, डीएम ललित मोहन रयाल ने लिया कड़ा एक्शन, इन पर हुई कार्रवाई

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : June 4, 2026 at 3:41 PM IST
नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल की अदालत ने विभिन्न मामलों की सुनवाई के बाद कई भूखंडों को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए हैं. यह कार्रवाई कृषि, बागवानी और आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित या खरीदी गई जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाए जाने एवं भूमि उपयोग परिवर्तन की शर्तों के उल्लंघन के मामलों में की गई है.
नैनीताल जिले में भूमि उपयोग नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल की न्यायालय ने विभिन्न मामलों में सुनवाई के बाद कई भूखंडों को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी किए हैं. जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को भूमि उपयोग नियमों के प्रभावी पालन और कृषि एवं बागवानी भूमि के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
पहला मामला कैंचीधाम क्षेत्र के ग्राम छड़ा का है. यहां आनंद सिंह और राजेंद्र सिंह को कृषि कार्य के लिए पट्टे पर भूमि आवंटित की गई थी. जांच में पाया गया कि उक्त भूमि पर आवासीय मकान और दुकान का निर्माण कर लिया गया है. पट्टे की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर न्यायालय ने 0.033 हेक्टेयर भूमि का पट्टा निरस्त करते हुए उसे राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए.
दूसरा मामला हल्द्वानी के तल्ली क्षेत्र का है. यहां बच्ची राम, मोहन चंद्र, लीला देवी और भगवती देवी की ओर से 750 वर्ग फीट भूमि का अंतरण (लैंड ट्रांसफर) नियमों के विपरीत किया गया था. मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने संबंधित भूमि को अंतरण की तिथि से ही राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने का आदेश दिया.
रामनगर तहसील के ढेला बंदोबस्ती क्षेत्र में बाग सिंह को कृषि प्रयोजन के लिए 0.100 हेक्टेयर भूमि पट्टे पर आवंटित की गई थी. निरीक्षण के दौरान वहां रिजॉर्ट संचालित होता पाया गया. भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के कारण पहले रिजॉर्ट को सील किया गया और बाद में पूरी भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश पारित किए गए.
तीसरा मामला कुमायूं पेपर पैक्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े व्यक्तियों का है. जहां आवासीय प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि पर रिजॉर्ट संचालन पाया गया. भूमि उपयोग परिवर्तन की शर्तों के उल्लंघन के चलते 3,572 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया.
चौथा मामला कैंचीधाम क्षेत्र का है. जहां ग्राम सुल्तान में भानवी सिंह की ओर से बागवानी प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि का निरीक्षण किया गया. जांच में भूमि पर मौजूद 27 नाशपाती के पेड़ों और उनके लिए आवश्यक पहुंच मार्ग को सुरक्षित रखते हुए 0.0344 हेक्टेयर भूमि उनके पक्ष में बरकरार रखी गई. जबकि, शेष 0.5206 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई.
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