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मसूरी में शिव मंदिरों तक में जल चढ़ाने के लिए नहीं पानी, वॉटर क्राइसिस से जूझ रही जनता

मसूरी में 144 करोड़ की पंपिग योजन है. जिस पर अब सवाल उठने लगे हैं. पर्यटन सीजन में मसूरी बूंद-बूंद पानी को तरस रही है.

MUSSOORIE WATER CRISIS
मसूरी पेयजल संकट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 2, 2026 at 2:05 PM IST

5 Min Read
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मसूरी: पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचते ही पहाड़ों की रानी मसूरी एक बार फिर पेयजल संकट से जूझने लगी है. शहर के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बाधित होने से होटल व्यवसायी, होमस्टे संचालक, व्यापारी और स्थानीय लोग परेशान हैं. हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि करोड़ों रुपये की यमुना पंपिंग पेयजल योजना पर भी सवाल उठने लगे हैं. सोमवार को मसूरी होटल एसोसिएशन, मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन तथा मसूरी होमस्टे संगठन के पदाधिकारियों ने एसडीएम कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन भेजकर तत्काल समाधान की मांग की. वहीं दूसरी ओर संगठनों ने गढ़वाल जल संस्थान कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की.

पर्यटन सीजन में पानी की किल्लत से बढ़ी मुश्किलें: होटल व्यवसायियों का कहना है कि इस समय मसूरी में पर्यटकों की भारी आमद है, लेकिन पानी की आपूर्ति सामान्य दिनों से भी कम हो रही है. कई क्षेत्रों में नलों में पर्याप्त प्रेशर तक नहीं है. जिससे होटल, रेस्तरां और स्थानीय परिवारों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. होटल एसोसिएशन के सचिव अजय भार्गव ने कहा कि मसूरी की पेयजल समस्या को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए करीब 144 करोड़ रुपये की यमुना पंपिंग पेयजल योजना शुरू की गई थी. उस समय दावा किया गया था कि वर्ष 2054 तक मसूरी में पानी की कमी नहीं होगी, लेकिन वर्तमान हालात दावों के बिल्कुल विपरीत हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जल निगम और जल संस्थान के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा जनता और पर्यटन व्यवसाय को भुगतना पड़ रहा है. जल संस्थान जल निगम पर और जल निगम जल संस्थान पर जिम्मेदारी डाल रहा है, जबकि परेशान जनता समाधान की राह देख रही है.

पर्यटकों को सुविधा नहीं, समस्याएं मिल रही हैं: अजय भार्गव ने कहा कि यदि पर्यटक मसूरी घूमने आएं और उन्हें होटल में पानी तक उपलब्ध न हो तो इसका सीधा असर शहर की छवि पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पर्यटकों को बेहतर सुविधाओं के बजाय पानी की कमी, ट्रैफिक जाम और चालान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जिससे पर्यटन कारोबार प्रभावित हो रहा है.

शिव मंदिरों में जल चढ़ाने तक का पानी नहीं: मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा शहर में पेयजल संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई मंदिरों में भगवान शिव को जल अर्पित करने तक के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि 144 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद यदि शहर पानी के लिए तरस रहा है तो यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है. उन्होंने आरोप लगाया कि जल निगम और जल संस्थान के बीच तालमेल के अभाव के कारण पूरी योजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है.

टैंकरों से बढ़ रहा ट्रैफिक जाम: मसूरी होमस्टे संगठन के अध्यक्ष देवी दयाल ने बताया पानी की कमी के चलते होटल और होमस्टे संचालकों को रोजाना बड़ी संख्या में निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं. उनके अनुसार प्रतिदिन 100 से 120 पानी के टैंकर शहर में पहुंच रहे हैं. जिससे पहले से ही दबाव झेल रही यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है. जाम की समस्या बढ़ रही है.


तीन दिन में समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन: रजत अग्रवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तीन दिनों के भीतर पानी की व्यवस्था सुचारु नहीं की गई तो व्यापारी और सामाजिक संगठन उग्र आंदोलन शुरू करेंगे. उन्होंने कहा गढ़वाल जल संस्थान कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी. मसूरी से मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च निकालकर सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया जाएगा.

जल संस्थान ने दी तकनीकी खराबी की दलील: गढ़वाल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने कहा पिछले दिनों हुई भारी बारिश के कारण कई पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं. इसके अलावा यमुना पंपिंग पेयजल योजना के दूसरे चरण में पानी लिफ्ट करने वाली मशीन में तकनीकी खराबी आने से भी आपूर्ति प्रभावित हुई. उन्होंने बताया अधिकांश तकनीकी समस्याओं को दूर कर लिया गया है. देर शाम तक सभी क्षेत्रों में जलापूर्ति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा वितरण व्यवस्था को लेकर मिल रही शिकायतों का स्वयं स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा.

अधिशासी अभियंता के अनुसार मसूरी में प्रतिदिन लगभग 14 एमएलडी पानी की मांग है. वर्तमान में 14 से 15 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. उनके अनुसार पानी की उपलब्धता पर्याप्त है. समस्या मुख्य रूप से वितरण व्यवस्था और तकनीकी बाधाओं से जुड़ी है.

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