पति को 10 साल जेल में गुजारनी होगी रात, पत्नी की हत्या का आरोप, पटना HC ने सजा बरकरार रखा
पटना उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है. हत्या के आरोपी पति को 10 साल जेल में रहना होगा. पढ़ें खबर

Published : December 2, 2025 at 1:10 PM IST
पटना : पटना हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोप में पति को दस साल कठोर कारावास की सजा सुनाई और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया. जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दो महीने अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. इसी के साथ जस्टिस आलोक कुमार पाण्डेय ने दहेज हत्या के दोषी शौहर मोहम्मद हसीब की ओर से दायर आपराधिक अपील को खारिज कर दिया.
क्या है पूरा मामला? : यह मामला मुजफ्फरपुर जिला के कथैया थाना कांड केस संख्या 189/2018 से सम्बंधित है. मुजफ्फरपुर के जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश 13 ने मामले की सुनवाई की थी और 14 मई को आरोप पति को दोषी करार दिया था. 22 मई को आईपीसी की धारा 304 (बी) के तहत दोषी ठहराते हुए दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. साथ 10 हजार का जुर्माने भी लगाया.
लगातार बढ़ती जा रही थी डिमांड : दरअसल, सूचक की पुत्री की शादी आवेदक के साथ 28 मार्च, 2014 को हुई थी. आरोप है कि शादी के छह महीने बाद दहेज में मोटरसाइकिल और ढाई लाख रुपये की मांग की जाने लगी. मांग पूरा नहीं किये जाने की स्थिति में पत्नी को कई तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा. बाद में सूचक ने अपने दामाद को एक मोटरसाइकिल खरीदकर दी.
ससुर ने दामाद को एक लाख दिए थे : कुछ दिनों के बाद पति ने फिर से पत्नी पर हमला किया और उसे कई तरह से प्रताड़ित किया. छत की ढलाई और विदेश घूमने के लिए ढाई लाख रुपये नकद की मांग की. पत्नी ने इसका विरोध किया लेकिन दामाद को विदेश जाने के लिए एक लाख रुपये कर्ज लेकर अपने दामाद को दिया.
शव छोड़कर फरार थे ससुरालवाले : इसके बाद 13 जुलाई, 2018 को मिली सूचना पर जब पिता बेटी के ससुराल पहुंचे तो देखा कि बेटी का शव खाट पर पड़ा है और ससुराल के सभी सदस्य फरार थे. पुलिस ने मृतक के बगल वाले कमरे से एक सफेद रंग का दाग लगा तकिया बरामद किया था. माना गया कि पैसे की मांग पूरी नहीं होने पर बेटी का मुंह तकिये से दबाकर उसकी हत्या कर दी गई.
मृतका के पति का आरोप- मुझे फंसाया गया : वहीं पति की ओर से दलील दी गई कि पत्नी ने आत्महत्या कर ली है और उसे इस केस में फंसाया गया है. कोर्ट ने कहा कि ''आवेदक मृतका का पति है और उसकी पत्नी की मृत्यु शादी के 5 वर्ष के भीतर हुई है. ट्रायल कोर्ट ने जो सजा दी है, उस सजा को कम करने का कोई कारण नहीं बन रहा है. सजा देने वाले कोर्ट का दायित्व हैं कि दोनों पक्षों को न्याय सुनिश्चित करना.'' इसी के साथ, कोर्ट ने आवेदक के अपील को रद्द कर दिया.
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