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रांची में स्थायी और अस्थायी आश्रय गृह में नहीं पहुंच रहे लोग! नगर निगम के सामने ये है चुनौती

रांची नगर निगम ने बेसहारा और बेघर लोगों के लिए स्थायी और अस्थायी आश्रय गृह तैयार किए हैं ताकि वे आराम से रात गुजार सके.

permanent and temporary shelter homes
आश्रय गृह (Etv bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 5, 2026 at 5:43 PM IST

4 Min Read
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रांची: ठंड के मौसम में गरीब, बेघर और बेसहारा लोगों को राहत देने के लिए रांची नगर निगम की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए हैं. शहर में स्थायी और अस्थायी आश्रय गृह संचालित किए जा रहे हैं, ताकि कोई भी शख्स खुले में रात बिताने को विवश न हो. बावजूद इसके राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में आज भी लोग डिवाइडर, फुटपाथ और सड़कों के किनारे सोते हुए नजर आते हैं, जो व्यवस्था और व्यवहार के बीच मौजूद खाई को उजागर करता है.

रांची नगर निगम की ओर से फिरायालाल चौक, रातू रोड और रांची रेलवे स्टेशन जैसे इलाकों में अस्थायी आश्रय गृह बनाए गए हैं. इन स्थानों को इसलिए चुना गया है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में बेघर और जरूरतमंद लोग रात के समय ठहरते हैं. नगर निगम ने इसके साथ ही एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो शहर में घूमकर सड़कों पर सो रहे लोगों को चिन्हित कर उन्हें आश्रय गृहों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.

जानकारी देते नगर आयुक्त सुशांत गौरव (Etv bharat)

नगर निगम के सामने व्यवहारिक चुनौती

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह केवल संसाधनों की कमी का नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यवहारिक चुनौती का मामला है. कई लोग आश्रय गृह की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद वहां रुकने को तैयार नहीं होते. कुछ लोग आदतन सड़क पर रहना पसंद करते हैं तो कई मामलों में नशे या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं.

roadside temporary shelter
सड़क किनारे स्थित अस्थायी आश्रय गृह (Etv bharat)

नगर निगम की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ठंड के कारण किसी की जान को खतरा न हो. लगातार निगरानी अभियान चलाया जा रहा है और रात के समय टीमों को शहर के विभिन्न इलाकों में तैनात किया गया है: सुशांत गौरव, नगर आयुक्त

10 स्थायी आश्रय गृह, सैकड़ों बेड की सुविधा

दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के तहत रांची में शहरी बेघरों के लिए कुल 10 स्थायी आश्रय गृह संचालित किए जा रहे हैं, इनमें पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है. बिरसा मुंडा बस टर्मिनल परिसर, खादगढ़ा में पुरुषों के लिए 50 और महिलाओं के लिए 49 बेड उपलब्ध हैं.

roadside temporary shelter
अस्थायी आश्रय गृह में नहीं पहुंच रहे लोग (Etv bharat)

धुर्वा बस स्टैंड के पास 16 बेड, एजी मोड़ डोरंडा के पास 10 बेड, मधुकम चुन्ना भट्टा में 16 बेड और रिम्स परिसर में 19 बेड की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा बकरी बाजार, कर्बला चौक, जगन्नाथ मंदिर और आईटीआई बस स्टैंड के समीप भी आश्रय गृह संचालित हैं, जहां 10 से 16 बेड तक की सुविधा मौजूद है.

अस्थाई आश्रय गृहों से बढ़ी क्षमता

ठंड को देखते हुए नगर निगम ने अस्थायी आश्रय गृह भी तैयार किए हैं. मेन रोड क्षेत्र में 50 बेड और रातू रोड इलाके में 20 बेड की अस्थायी व्यवस्था की गई है. इन आश्रय गृहों में बिस्तर, कंबल एवं दूसरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

निगरानी और जागरूकता पर जोर

रांची नगर निगम की टीमें केवल लोगों को आश्रय गृहों तक पहुंचाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें वहां रहने के लिए जागरूक भी कर रही हैं. निगम का मानना है कि लगातार संवाद के जरिए ही इस चुनौती का स्थायी समाधान संभव है.

व्यवस्था मौजूद लेकिन चुनौती बरकरार

रांची नगर निगम के प्रयासों से यह स्पष्ट है कि व्यवस्था के स्तर पर कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है. हालांकि सामाजिक व्यवहार और जागरूकता को लेकर अभी और प्रयास की जरूरत है. नगर निगम का लक्ष्य है कि ठंड के मौसम में शहर का कोई भी शख्स असुरक्षित स्थिति में न रहे.

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