नहीं था कोई बेटा, पूरे गांव ने ऐसे निकाली सब्जी विक्रेता वीडियो मंडल की शव यात्रा
माहौल ऐसा जैसे किसी की शादी हो, डीजे की धुन, ढोल-नगाड़ों की गूंज, अबीर-गुलाल उड़ाते लोग, बिहार के मुंगेर में अनोखी शव यात्रा. पढ़ें

Published : July 9, 2026 at 1:38 PM IST
मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले से मानवता, सामाजिक एकजुटता और रिश्तों की मिसाल पेश करने वाली एक अनोखी तस्वीर सामने आई है. यहां एक सब्जी विक्रेता वीडियो मंडल (55 वर्षीय) की अंतिम शव यात्रा ऐसी निकली कि देखने वालों को पहली नजर में लगा मानो किसी दूल्हे की बारात जा रही हो. लेकिन जब लोगों को पता चला कि यह किसी की बारात नहीं, बल्कि अंतिम यात्रा है, तो हर किसी की आंखें नम हो गईं.
नहीं देखी होगी ऐसी अनोखी शव यात्रा: यह भावुक कर देने वाला मामला मुंगेर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के तौफिर पीड़ पहाड़ स्थित चंद्र टोला का है. परिजनों के अनुसार, रविवार देर रात अचानक वीडियो मंडल की तबीयत बिगड़ गई. उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी. परिजन तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई. उनके निधन की खबर पूरे गांव में फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई.

सब्जी बेचकर परिवार चलाते थे वीडियो मंडल: वीडियो मंडल वर्षों तक सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे. उनकी पहचान एक मेहनती, ईमानदार और मिलनसार व्यक्ति के रूप में थी. उनके परिवार में पत्नी और एक बेटी (20 वर्ष) है. ग्रामीणों की माने तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी.
गांव वालों ने निभाया बेटे का फर्ज: वीडियो मंडल का बेटा नहीं था. इस बात को लेकर रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने आपस में चर्चा की और निर्णय लिया कि उनके अंतिम संस्कार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी. ग्रामीण संजय पासवान ने बताया कि ''जब बेटे का फर्ज निभाने वाला कोई नहीं है, तो पूरा गांव ही उनका बेटा बनेगा.''
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब: इसके बाद ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने मिलकर अंतिम यात्रा की पूरी व्यवस्था की. शव वाहन को सजाया गया. डीजे और ढोल-नगाड़ों की व्यवस्था की गई और पूरे सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई. पूरा गांव ही उनका बेटा बनकर अंतिम यात्रा में शामिल हुआ.

बारात जैसा दिखा नजारा, लोग रह गए हैरान: मंगलवार को जब अंतिम यात्रा गांव से निकली तो उसके आगे डीजे पर भक्ति और विदाई के गीत बज रहे थे. ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग नाचते हुए चल रहे थे. ग्रामीण एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर वीडियो मंडल को अंतिम विदाई दे रहे थे.
'ऐसी शवयात्रा नहीं देखी': यह दृश्य सभी को चौंका रहा था. लोग इस तस्वीर को अपने मोबाइल में कैद करते देखें गए. जब यह शव यात्रा लाल दरवाजा सहित अन्य इलाकों से होकर गुजरी तो बड़ी संख्या में लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए. पहले लोगों को लगा कि किसी की बारात निकाली जा रही है, लेकिन जब उन्हें सच्चाई पता चली तो कई लोग भावुक हो गए और कहा कि ऐसी शवयात्रा नहीं देखी.
क्या बोले ग्रामीण?: ग्रामीण सूरज मंडल ने कहा कि ''वीडियो मंडल ने हमेशा लोगों के सुख-दुख में साथ दिया. वे जरूरतमंदों की मदद करने से कभी पीछे नहीं हटते थे. यही कारण रहा कि उनके निधन के बाद पूरा गांव उनके सम्मान में एकजुट हो गया और उन्हें यादगार विदाई दी.''
'लोगों ने मिलकर बेटे की जिम्मेदारी निभाई': ग्रामीण सुलो मंडल ने बताया कि ''वीडियो मंडल का कोई बेटा नहीं था, इसलिए गांव के सभी लोगों ने मिलकर बेटे की जिम्मेदारी निभाई. उनका कहना था कि वीडियो मंडल जैसे अच्छे इंसान को सम्मानजनक विदाई देना पूरे गांव का कर्तव्य था.''

मानवता और सामाजिक एकता की मिसाल: बिहार के मुंगेर में निकली यह अनोखी अंतिम यात्रा अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोगों की माने तो इस घटना ने यह संदेश दिया है कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्रेम, अपनापन और सामाजिक सरोकार से भी बनते हैं. वीडियो मंडल को दी गई यह विदाई हर किसी की आंखे नम कई गई.
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