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लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री जनदर्शन की फिर शुरुआत, सीएम साय करेंगे जनता से सीधा संवाद

सीएम विष्णुदेव साय गुरुवार को रायपुर में जनता से संवाद करेंगे. लंबे समय बाद वे जनता से बात करेंगे

Mukhyamantri jandarshan In Chhattisgarh
सीएम साय का जनदर्शन (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 7, 2026 at 11:09 PM IST

2 Min Read
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रायपुर: करीब लंबे समय बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री निवास में जनदर्शन का आयोजन होने जा रहा है. 8 जनवरी गुरुवार को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रदेशवासियों की समस्याएं सुनेंगे. बड़ा सवाल ये है कि जनता की आवाज सुनने के लिए सरकार को इतना लंबा वक्त क्यों लग गया? क्या सरकार अब तक फाइलों और आंकड़ों की दुनिया में ही उलझी रही.

सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री सीधे जनता से संवाद करेंगे और समस्याओं का समाधान करेंगे, लेकिन सियासी गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि अगर सब कुछ ठीक चल रहा था, तो जनदर्शन बंद क्यों था? जनता पूछ रही है, क्या अब शिकायतों का अंबार इतना बढ़ गया कि कुर्सी से उठकर जनता के बीच आना पड़ा ?

CM Public Interaction Program
सीएम जनदर्शन कार्यक्रम (ETV BHARAT)

कागज़ों में समाधान, ज़मीन पर इंतज़ार?

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनदर्शन में मिले आवेदनों का त्वरित और संवेदनशील निराकरण किया जाए. उसके बावजूद हकीकत यह है कि प्रदेश के हजारों आवेदन पहले से ही सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये निर्देश भी बाकी आदेशों की तरह सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाएंगे?

जनता पूछेगी असली सवाल

प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, आवास, राशन, और सरकारी योजनाओं की धीमी रफ्तार जैसे मुद्दों पर लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है. जनदर्शन में मुख्यमंत्री से सिर्फ आवेदन ही नहीं, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवालों की बौछार तय मानी जा रही है.

जनदर्शन या जन-नुकसान या डैमेज कंट्रोल ?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जनदर्शन सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बढ़ती नाराजगी को कंट्रोल करने की कोशिश भी है. क्योंकि अगर सरकार सच में संवेदनशील होती, तो जनता को अपनी बात कहने के लिए इतने लंबे इंतजार की जरूरत ही नहीं पड़ती.

8 जनवरी का जनदर्शन सिर्फ समस्याएं सुनने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता की असली परीक्षा होगा।अब देखना ये होगा कि यह आयोजन जनता के लिए राहत बनता है या फिर एक और फोटो सेशन और फाइलों का औपचारिक खेल साबित होता है.

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