मुकेश अग्निहोत्री बोले: भगवान इन्हें सद्बुद्धि दे, हिमाचल को नहीं मिल रहा अपना हक
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व की बात है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 16, 2026 at 7:12 PM IST
मंडी: प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज मंडी शिवरात्रि महोत्सव का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को लेकर केंद्र के रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि वो ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि केंद्र सरकार को सद्बुद्धि दे, ताकि हिमाचल प्रदेश की आरडीजी को तुरंत बहाल किया जा सके.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ये कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व, विकास और आम जनता से जुड़ा गंभीर विषय है. राज्य के गठन के समय ही यह स्वीकार किया गया था कि हिमाचल एक पहाड़ी प्रदेश है और अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ये पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो सकता. केंद्र सरकार की सहायता, विशेषकर रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट, राज्य की आर्थिक रीढ़ मानी जाती रही है. बिना किसी पूर्व चेतावनी के इस ग्रांट को बंद कर देना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि प्रदेश की जनता के साथ खुला अन्याय भी है.
उपमुख्यमंत्री ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि आरडीजी में कटौती से हिमाचल प्रदेश को लगभग 54 हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है, यदि इसमें जीएसटी कंपनसेशन की राशि को भी जोड़ा जाए, तो एक वित्त आयोग की अवधि के दौरान ये घाटा करीब 75 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. ये धनराशि प्रदेश के विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन, सामाजिक कल्याण योजनाओं और बुनियादी ढांचे के लिए अत्यंत आवश्यक थी. उत्तराखंड की निर्भरता आरडीजी पर केवल 5 प्रतिशत है, जबकि हिमाचल की निर्भरता 13 प्रतिशत तक है. इसके बावजूद हिमाचल को वो सहयोग नहीं मिल रहा, जिसका वो हकदार है. जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों को उनकी भौगोलिक स्थिति और सीमावर्ती परिस्थितियों के कारण विशेष पैकेज और फंडिंग मिलती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश, जो उत्तर भारत के फेफड़ों की तरह काम करता है, उसे जंगलों के संरक्षण और नदियों के जल स्रोतों के बावजूद कोई विशेष मुआवजा नहीं दिया जा रहा.
'आरडीजी हिमाचल की जीवन रेखा'
मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के भाजपा नेताओं ने दिल्ली जाकर हिमाचल के हक को रुकवाने का काम किया है. भाजपा नेताओं की सोच में 'हिमाचलियत' नहीं, बल्कि केवल सत्ता की राजनीति है. उन्होंने संघीय ढांचे को लेकर कहा कि यदि केंद्र सरकार राज्यों की आर्थिक मदद नहीं करेगी, तो संघीय व्यवस्था का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता.
उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि आरडीजी हिमाचल की आर्थिक जीवन रेखा है और इसे तुरंत बहाल किया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ सके.

