डिप्टी CM की बड़ी चेतावनी, हिमाचल पर ₹10 हजार करोड़ का संकट!
डिप्टी CM ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार खासकर कांग्रेस शासित राज्यों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है.

By ANI
Published : February 22, 2026 at 3:05 PM IST
दिल्ली: हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है. राज्य के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने के बाद प्रदेश को करीब 10 हजार करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने यह बात दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही.
डिप्टी सीएम ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार खासकर कांग्रेस शासित राज्यों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों से हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान मिल रहा था, लेकिन इसे अचानक बंद कर दिया गया.
सेब उद्योग और अनुदान पर चर्चा
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भी कहा कि पार्टी नेतृत्व के साथ प्रदेश के अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि सेब उद्योग की स्थिति और राजस्व घाटा अनुदान बंद होने का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया. उनका कहना है कि इन फैसलों का सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ेगा. वहीं, राज्यसभा सांसद रजनी पाटिल ने बताया कि बैठक में संगठनात्मक विषयों पर भी चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने राज्य के सभी मंत्रियों की कार्यप्रणाली की रिपोर्ट मांगी है और उन्हें इस जिम्मेदारी का दायित्व सौंपा गया है.
16वें वित्त आयोग के बाद बढ़ा दबाव
राज्य सरकार के सामने 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने के बाद वित्तीय दबाव बढ़ गया है. इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार आंतरिक संसाधन बढ़ाने पर जोर दे रही है. वर्ष 2026-27 के लिए नई टोल नीति लागू की जा रही है, जिसमें टोल नाकों की पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी, इलेक्ट्रॉनिक टोल वसूली, सीसीटीवी निगरानी और चरणबद्ध फास्टैग व्यवस्था शामिल होगी. इसके साथ ही सरकार ने आबकारी नीति में भी बदलाव किए हैं. वहीं, 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए प्रवेश शुल्क बढ़ा दिया गया है. सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था से राजस्व बढ़ेगा, हालांकि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने बढ़ी लागत पर चिंता जताई है.
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