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मध्य प्रदेश में 5 साल में 35 प्रतिशत बढ़े जंगली जानवरों के हमले, करोड़ों में चुकाना पड़ रहा मुआवजा

मध्य प्रदेश में घटते जंगल और जंगली जानवरों के बढ़ते मामलों के आंकड़े चिंताजनक. बीते एक साल में 71 मौतें, 15 हजार मवेशियों का शिकार.

MADHYA PRADESH WILD ANIMALS ATTACK
5 साल में 35 प्रतिशत बढ़े हमले (ETV Bharat Gfx)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 28, 2026 at 9:10 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट: विश्वास चतुर्वेदी

भोपाल: मध्य प्रदेश में मानव-वन्य जीव संघर्ष तेजी से गंभीर रूप लेता जा रहा है. जंगल से सटे गांवों और कस्बों में जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही अब सीधे इंसानी जीवन और पशुधन पर भारी पड़ रही है. वन विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि साल 2024-25 में प्रदेश में वन्य जीव हमलों से 71 लोगों की मौत हुई, जबकि 15,259 पालतू पशु शिकार बने. इन घटनाओं के बाद वन विभाग को मृतकों के परिजनों, घायलों और पशुपालकों को करीब 27 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा चुकाना पड़ा.

5 साल में 35 प्रतिशत बढ़े हमले

आंकड़े बताते हैं कि बीते 5 सालों में पालतू पशुओं के शिकार की घटनाओं में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2019-20 में जहां जंगली जानवरों के हमलों में 9,760 पशु मारे गए थे, जिन पर करीब 8.83 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया. यह संख्या 2022-23 में बढ़कर 13,685 तक पहुंच गई. वहीं साल 2024-25 में 15,259 पशुओं की मौत जंगली जानवरों के हमलों से हुई. जिसका 20 करोड़ से अधिक का मुआवजा चुकाया गया. मतलब पशुधन हानि पर मुआवजे की राशि में भी काफी बढ़ोतरी हुई है.

WILD ANIMALS ATTACK CASES INCREASED
जंगली जानवरों के हमलों में 6 साल में मौत (ETV Bharat Gfx)

मानव जीवन पर बढ़ता खतरा

जनहानि यानि लोगों की मौत के आंकड़े भी चिंताजनक हैं. साल 2020-21 में 90 लोगों की मौत हुई थी, जिस पर 3.27 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया. साल 2023-24 में 76 मौतों पर 5.88 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ. वहीं 2024-25 की बात करें तो 71 मौतों पर 5,53,26,292 रुपये मुआवजा दिया गया. इसी तरह जंगली जानवरों के हमले से 2024-25 में घायल लोगों की संख्या भी 896 है. जिन्हें 1,33,99,690 रुपये की सहायता दी गई.

WILD ANIMALS ATTACK CASES INCREASED
जंगली जानवरों के हमलों में 6 साल में घायल लोग (ETV Bharat Gfx)

इसलिए बढ़ रहा वन्य जीवों से संघर्ष

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट सुदेश वाघमारे के अनुसार "मानव-वन्य जीव संघर्ष के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ी वजह सघन वनों का सिकुड़ना है. जल स्रोतों का सूखना और भोजन की कमी जंगली जानवरों को आबादी वाले क्षेत्रों की ओर धकेल रही है. जब जंगलों में प्राकृतिक शिकार कम होता है तो तेंदुआ, भालू और अन्य वन्य जीव गांवों में मवेशियों को आसान शिकार मानते हैं."

ANIMAL ATTACK COMPENSATION
वन्य जीव हमलों में 6 साल में पशुओं की मौत (ETV Bharat Gfx)

'मुत्यु या गंभीर नुकसान पर मुआवजा'

पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ शुभरंजन सेन का कहना है कि "वन विभाग मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में फेंसिंग, जागरूकता अभियान और ग्रामीणों को सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है. वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों में रेस्क्यू टीम और त्वरित प्रतिक्रिया दल भी सक्रिय किए गए हैं.

TIGER BEAR LEOPARD WOLF ATTACK
मानव जीवन पर बढ़ता खतरा (Getty Image)

वन विभाग के नियमों के तहत बाघ, तेंदुआ, हाथी, मगरमच्छ, भालू, लकड़बग्घा, भेड़िया, गेंडा और घड़ियाल जैसे वन्य जीवों के हमले में मृत्यु या गंभीर नुकसान की स्थिति में मुआवजा देने का प्रावधान है."

'जल स्रोतों और वन क्षेत्र का विस्तार जरूरी'

सुदेश बाघमारे का सुझाव है कि "वन क्षेत्र का विस्तार, जल स्रोतों का संरक्षण और प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी है. घने जंगल होंगे तो वन्य जीवों को बाहर आने की जरूरत कम पड़ेगी और वन्य जीवों से संघर्ष कम होगा." साल 2024-25 के आंकड़ों को जोड़ें, तो 5.53 करोड़ रुपये मृतकों के परिजनों को, 1.33 करोड़ रुपये घायलों को और 20.05 करोड़ रुपये पशुधन हानि पर दिए गए. कुल मिलाकर यह राशि लगभग 27 करोड़ रुपये होती है.

WILD ANIMAL ATTACK HUMAN
बीते एक साल में 71 मौतें, 15 हजार मवेशियों का शिकार (Getty Image)