मध्य प्रदेश में सरपंच और पंचों के मानेदय पर प्रहलाद पटेल का बयान, विधायक बोले- मेरा भी बाकी
विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल पर लगाया गलत जानकारी देने का आरोप. मानदेय बढ़ाने की मांग की.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 4:41 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के 7वें दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही जनजातीय बहुल जिलों बड़वानी, धार और झाबुआ में कृषि कैबिनेट करने की तैयारी कर रही है. उधर प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल पर सदन में गलत जानकारी दिए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक के पहले मैं सरपंच था, लेकिन मेरा मानदेय ही अभी तक नहीं मिला, यही स्थिति मेरे बेटे की है. उधर मंत्री ने सरपंचों के मानदेय बढ़ोत्तरी के बारे में स्थिति स्पष्ट की है.
विधायक बोले मेरा मानदेय भी बाकी
कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने कहा कि "प्रदेश में सरपंच को 4250 रुपए और वार्ड पंच को 200 रुपए प्रति माह मानदेय दिया जाता है. महंगाई के इस दौर में मानदेय की यह राशि बहुत कम है. सरपंच का मानदेय 25 हजार रुपए और वार्ड पंच का मानदेय 15 हजार प्रतिमाह करने की मांग उठाई. प्रदेश में सरपंचों को मानदेय कई महीनों से नहीं दिया गया. मेरा मानदेय भी अब तक बकाया है."
मानदेय में बढ़ोत्तरी के लिए अभी और इंतजार
सरपंच और पंच के मानदेय को लेकर पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि "अब किसी का भी मानदेय बकाया नहीं है." उधर मानदेय बढ़ाए जाने के मामले में पंचायत मंत्री ने कहा कि पुर्ननिरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. 2013 के बाद 2023 में पुनरीक्षण किया गया था. मैं नहीं कहता कि अब इसका पुनरीक्षण नहीं होगा. जब समय आएगा तो इसका पुनरीक्षण कराया जाएगा."
यूनिफॉर्म सिलाई का भुगतान केस में अटका
उधर विधानसभा में सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स की यूनिफार्म सिलाई का पैसा स्व-सहायता समूहों को न दिए जाने का मामला भी उठा. बीजेपी विधायक रीती पाठक ने प्रश्नकाल में भुगतान न किए जाने का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि "समूहों का बड़ी संख्या में पैसा बकाया है."
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पंचायत मंत्री ने बताया क्यों अटका 40 करोड़ का भुगतान
यूनिफार्म सिलाई का पैसा अटकने को लेकर पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने विधानसभा में लिखित में जवाब दिया. उन्होंने बताया कि "प्रदेश में 2022-23 और 2023-24 में यूनिफॉर्म सिलाई का काम समूहों से कराया गया था. प्रदेश भर में समूहों का करीबन 40 करोड़ से भी ज्यादा का भुगतान अटका हुआ है. अभी तक 305 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है. शिक्षा विभाग और ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच समन्वय न होने की वजह से इसको लेकर गतिरोध बना है. भुगतान का प्रमाणीकरण नहीं हो सका. इस वजह से भुगतान रूका है. रिपोर्ट आने के बाद भुगतान कर दिया जाएगा."

