निजी टोल कंपनियां ही नहीं, MPRDC भी वसूल रहा अवैध टोल, कोर्ट जाएंगे व्हिसल ब्लोअर पारस सकलेचा
निजी टोल कंपनियों द्वारा की जा रही अवैध टोल वसूली को लेकर व्हिसल ब्लोअर पारस सकलेचा दायर करेंगे जनहित याचिका. एमपीआरडीसी पर लगाए गंभीर आरोप.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 26, 2026 at 8:33 PM IST
रतलाम: मध्य प्रदेश में निजी टोल कंपनियों के द्वारा नियमों के खिलाफ की जा रही अवैध टोल वसूली का मामला उठाने वाले पारस सकलेचा अब एमपीआरडीसी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में हैं. उनका आरोप है कि प्रदेश में अवैध रूप से 40 सड़कों पर एमपीआरडीसी टोल वसूल रही है.
कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के द्वारा विधानसभा में लगाए गए प्रश्न के आधार पर यह जानकारी मिली थी कि एमपीआरडीसी मध्य प्रदेश की 43 सड़कों पर टोल वसूल कर रही है. जिसे कांग्रेस नेताओं ने अवैध बताया था और करीब 1102 करोड़ रुपए की टोल राशि वसूल कर 604 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाने का आरोप भी लगाया था.
एमपीआरडीसी पर अवैध टोल वसूली का आरोप
व्यापम सहित कई घोटालों पर सरकार को घेरने वाले पारस सकलेचा ने एक बार फिर एमपीआरडीसी के द्वारा मध्य प्रदेश की 43 सड़कों पर की जा रही टोल वसूली को जनता के साथ लूट बताते हुए सवाल खड़े किए हैं. पारस सकलेचा ने आरोप लगाए हैं कि "एमपीआरडीसी ने बिना राज्यपाल की अधिसूचना के ही 40 सड़कों से 1100 करोड़ रुपए की अवैध टोल वसूली की है, जो नियमों के विपरीत है. यह वसूली 2019 से 2024 तक प्रदेश में अलग-अलग सड़कों से की गई है. जो इंडियन टोल एक्ट 1851 के विपरीत है."
'ट्रस्टी नहीं वसूल सकती जनता से पैसे'
पारस सकलेचा का आरोप है कि "एमपीआरडीसी ट्रस्टी है, जो जनता से पैसे वसूल नहीं कर सकती. जबकि सड़कों से वही कंपनी पैसा वसूल कर सकती है जो उसके निर्माण में पैसा लगाती है ना की एमपीआरडीसी. यह अवैध वसूली का 600 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमा चुकी है."
'जनहित याचिका लगाने की तैयारी में सकलेचा'
पारस सकलेचा ने बताया कि "इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार और राज्यपाल को चिट्ठी भी लिखी गई थी लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. वहीं मध्य प्रदेश विधानसभा में भी कांग्रेस के विधायक प्रताप ग्रेवाल ने यह प्रश्न उठाया था . इसके बाद अब वह जनता के साथ हो रही इस खुली लूट को रोकने के लिए कोर्ट में जनहित याचिका लगाने की तैयारी कर रहे हैं.

लेबड़-नयागांव फोरलेन मामला कोर्ट में लंबित
मध्य प्रदेश की सड़कों पर टोल वसूली को लेकर केवल एमपीआरडीसी ही नहीं बल्कि निजी टोल कंपनियों द्वारा भी अवैध रूप से टोल वसूला गया है. जिससे संबंधित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. जिसमें लेबड़-नयागांव फोरलेन की लागत ₹590 करोड़ थी. जिसकी बदले में टोल कंपनी द्वारा 1910 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वसूली की गई थी. जिस पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
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कंपनी द्वारा सुविधाएं नहीं देने और अवैध वसूली की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन को जवाब देने के निर्देश दिए थे. पारस सकलेचा ने बताया कि "मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार ही लेबड़ से जावरा तक के रोड पर 2349 करोड़ रुपए की टोल वसूली हो चुकी है जबकि इसकी लागत मात्र 590 करोड़ रुपए थी. वहीं, जावरा से नयागांव तक के फोरलेन की लागत भी करीब 425 करोड़ रुपए थी. इसके बदले में टोल कंपनी कई गुना 2607 करोड़ रुपये की वसूली कर चुकी है."

