कवाल में शान से दहाड़ेंगे मध्य प्रदेश के बाघ, टाइगर रिलोकेशन आबाद करेगा तेलंगाना का जंगल
मध्य प्रदेश से तेलंगाना बाघ रिलोकेशन को दी सीएम मोहन यादव ने मंजूरी. NTCA करेगा कवाल टाइगर रिजर्व आदिलाबाद आबाद.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 23, 2026 at 2:51 PM IST
|Updated : February 23, 2026 at 3:33 PM IST
सागर: तेलंगाना के कावल बाघ अभयारण्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश से बाघ बुलाए जाने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंजूरी दे दी थी. इसके बाद टाइगर शिफ्टिंग के लिए तेलंगाना राज्य द्वारा प्रक्रिया शुरू की गई है. हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को नहीं मिला है, क्योंकि एक राज्य से दूसरे राज्य में बाघों की शिफ्टिंग के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) अंतिम फैसला लेता है और इसकी एक निश्चित प्रक्रिया होती है.
पहले तेलंगाना राज्य को अपना प्रस्ताव एनटीसीए को भेजना होगा. तेलंगाना के प्रस्ताव पर एनटीसीए विस्तार से रिसर्च और अध्ययन के बाद मध्य प्रदेश सरकार को अनुमति देगा. फिर जाकर मध्य प्रदेश से तेलंगाना बाघ शिफ्ट किए जा सकेंगे.
क्या कहना है मध्य प्रदेश के अधिकारियों का
पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ शुभ रंजन सेन ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि "इस मामले में तेलंगाना सरकार से चर्चा हुई है, लेकिन आधिकारिक प्रस्ताव अभी तक नहीं मिला है. वैसे भी किसी दूसरे राज्य में टाइगर शिफ्टिंग के लिए एनटीसीए में अपील करना होता है. पहले तेलंगाना सरकार एनटीसीए में अपील करेगी. एनटीसीए जिन राज्यों में बाघों की संख्या पर्याप्त है और किसी दूसरी जगह शिफ्ट किए जा सकते हैं. उनसे चर्चा करेगा और उसके बाद टाइगर शिफ्टिंग पर फैसला किया जाएगा. फिलहाल यह प्रस्ताव एनटीसीए के स्तर पर हो सकता है. एनटीसीए हमें जो निर्देश देगा, उसके अनुसार भविष्य में कार्रवाई की जाएगी.

एक राज्य से दूसरे राज्य में टाइगर शिफ्टिंग की प्रक्रिया
दरअसल, अगर किसी राज्य से दूसरे राज्य में बाघ को शिफ्ट किया जाना होता है, तो सबसे पहले जिस राज्य को बाघ की जरूरत होती है. वह एनटीसीए में अपील करता है. फिर एनटीसीए उन राज्यों से संपर्क करता है, जिन राज्यों में बाघों की संख्या पर्याप्त है और वहां से बाघ दूसरे राज्यों में शिफ्ट किया जा सकते हैं. चर्चा के बाद मामला भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को मांग के अनुसार रिसर्च के लिए भेजा जाता है.
देहरादून के वैज्ञानिक रिसर्च करते हैं कि क्यों संबंधित राज्य में बाघों की संख्या कम है. बाघों की जरूरत क्यों है ? संबंधित राज्य में बाघों के लिए आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाएं कैसी हैं ? तमाम पहलुओं पर रिसर्च के बाद एनटीसीए के लिए रिपोर्ट भेजी जाती है. एनटीसीए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित राज्यों के बीच बैठक आयोजित करता है और फिर शिफ्टिंग पर अंतिम फैसला लिया जाता है. जब एनटीसीए शिफ्टिंग को लेकर हरी झंडी दे देता है, उसके बाद प्रदेश में वाइल्डलाइफ अधिकारी पूरी रिसर्च के बाद तय करते हैं कि किस टाइगर रिजर्व से बाघ संबंधित राज्य को भेजे जाएंगे.
- जंगल टू जंगल 600 किमी सफर, बायसन को बसाने बांधवगढ़ चले आए वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट
- सेंट्रल इंडिया टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर से जुड़ेंगे 4 रिजर्व, पर्यटन करेगा मध्य प्रदेश की इकोनॉमी दुरुस्त
2026 की गणना में बाघों की संख्या 1000 हो सकती है पार
बताते चलें देश में अभी टाइगर स्टेट का दर्जा मध्य प्रदेश के पास है. साल 2022 की गणना के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में 785 पाए गए थे. वहीं 2026 में हुई गणना के बाद वनअधिकारियों का अनुमान है कि यह आंकड़ा 1000 को पार सकता है. हालांकि साल 2026 के आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं. वहीं अगर टाइगर रिजर्व की बात करें तो प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व हैं.
| टाइगर रिजर्व | जिले |
| नौरादेही टाइगर रिजर्व | सागर |
| संजय दुबरी टाइगर रिजर्व | सीधी |
| पन्ना टाइगर रिजर्व | पन्ना |
| बांधवगढ़ टाइग रिजर्व | उमरिया |
| सतपुड़ा टाइगर रिजर्व | नर्मादपुरम |
| कान्हा टाइगर रिजर्व | मंडला |
| पेंच टाइगर रिजर्व | सिवनी |
| रातापानी टाइगर रिजर्व | भोपाल |
| माधव टाइगर रिजर्व | शिवपुरी |

