सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मध्य प्रदेश के 1.5 लाख शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य
शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त. सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं, पूरे देश के शिक्षकों पर लागू होगा नियम. 1 साल की अतिरिक्त राहत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 29, 2026 at 10:33 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश समेत देशभर के सरकारी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण फैसला आया है. सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बच्चों के बेहतर शैक्षणिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है. इसलिए सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना पूरी तरह अनिवार्य होगा. हांलाकि कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को एक बड़ी राहत भी दी है. कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए योग्यता प्राप्त करने की समय सीमा 1 साल के लिए बढ़ा दी है.
बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोपरि
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह साफ किया कि "आरटीई अधिनियम एक बाल-केंद्रित कानून है. बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में निरंतरता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना सबसे ऊपर है." कोर्ट ने टिप्पणी की है कि "शिक्षकों की सेवा को बच्चों के शैक्षणिक भविष्य की कीमत पर नहीं बचाया जा सकता है. टीईटी योग्यता केवल एक नई सेवा शर्त नहीं है, बल्कि यह अनुच्छेद 21ए के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से उत्पन्न एक अनिवार्य संवैधानिक आवश्यकता है."
समय सीमा 2 वर्ष से बढ़कर हुई 3 साल
शिक्षकों के विस्थापन और बड़े पैमाने पर रोजगार के संकट की व्यावहारिक वास्तविकताओं को देखते हुए कोर्ट ने बीच का रास्ता निकाला है. पूर्व में सेवारत शिक्षकों को टीईटी योग्यता प्राप्त करने के लिए 2 वर्ष की समय सीमा दी गई थी. लेकिन अब न्यायालय ने इसे बढ़ाकर 3 वर्ष कर दिया है. इसका मतलब यह है कि जिन शिक्षकों को पहले यह योग्यता 31 अगस्त 2027 तक प्राप्त करनी थी, वे अब 31 अगस्त 2028 तक इसे पूरा कर सकते हैं.

सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं, पूरे देश के शिक्षकों पर लागू होगा नियम
शुरुआती तौर पर यह मामला मध्य प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से जुड़ा हुआ लग रहा था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह फैसला केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा. यह नियम देश भर के उन सभी इन सर्विस शिक्षकों पर समान रूप से प्रभावी होगा, जिन्होंने आरटीई लागू होने के बाद पात्रता पूरी नहीं की है.
हर वर्ष 2 बार आयोजित हो टीईटी परीक्षा
शिक्षकों को इस वैधानिक आवश्यकता का अनुपालन करने का उचित अवसर मिल सके, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्यों और सक्षम अधिकारियों को भी कड़े निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि संबंधित प्राधिकारियों का यह प्रयास होना चाहिए कि वह हर वर्ष कम से कम 2 बार टीईटी परीक्षा का आयोजन करें. इन परीक्षाओं के बीच लगभग 6 महीने की अवधि का अंतर होना चाहिए, ताकि अनुत्तीर्ण रहने वाले शिक्षकों को दोबारा तैयारी का मौका मिल सके.
कोर्ट की अंतिम चेतावनी, अब आगे नहीं बढ़ेगा समय
राहत देने के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने भविष्य के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए हैं. कोर्ट ने अपने फैसले के अंत में बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि योग्यता प्राप्त करने की समय सीमा को और आगे बढ़ाने की किसी भी अगली प्रार्थना या याचिका पर भविष्य में बिल्कुल विचार नहीं किया जाएगा. यह शिक्षकों के लिए खुद को योग्य साबित करने का आखिरी और अंतिम अवसर है.
शिक्षक संगठन ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर मध्य प्रदेश शासकीय शिक्षक संगठन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल का कहना है, "शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले जो शिक्षक नियुक्त हो चुके हैं, उन पर टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता थोपना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है." उन्होंने स्पष्ट किया कि "सालों से अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है."
- मोहन यादव ने दी मध्य प्रदेश के शिक्षकों को राहत, TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
- शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में सरकारी शिक्षकों का हल्लाबोल, टीचर्स ने बताया क्यों जरुरी नहीं है परीक्षा देना
- दिग्विजय सिंह की सीएम मोहन यादव को लिखी चिट्ठी, टीईटी की अनिवार्यता पर रोक लगाने की मांग
केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने की मांग
उपेंद्र कौशल ने बताया, "संगठन जल्द ही शिक्षकों की इन जायज भावनाओं और व्यावहारिक चिंताओं से केंद्र सरकार को अवगत कराएगा. संगठन की मुख्य मांग केंद्र सरकार से आरटीई एक्ट में आवश्यक संशोधन करने के लिए संसद में एक विशेष अध्यादेश लेकर आए, जिससे इस कानून के लागू होने से पहले नियुक्त हुए वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से स्थाई रूप से छूट प्रदान की जा सके."
उपेंद्र कौशल का कहना है, "यदि सरकार ने इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो अपने हक की लड़ाई के लिए शिक्षक संगठन सड़कों पर उतरकर उग्र संघर्ष करने से भी पीछे नहीं हटेगा."

