अवमानना का दोषी करार दिये जाने के मामले में नगर निगम कमिश्नर को राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिया आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश को किया निरस्त. अवमानना की दोषी करार भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को मिली राहत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 3:40 PM IST
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई निरस्त कर दी है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने बुधवार को एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए महिला आईएएस अधिकारी के पक्ष में राहतकारी आदेश जारी किये. इस मामले में एकलपीठ ने उन्हें अवमानना का दोषी करार देते हुए सजा पर सुनवाई निर्धारित की थी. जिसके खिलाफ आईएएस महिला अधिकारी ने अपील दायर की थी.
बिल्डिंग का हिस्सा तोड़ने पर दायर की थी याचिका
नगर निगम भोपाल के द्वारा मर्लिन बिल्डकॉन प्रा लि. कि श्यामला हिल्स स्थित नादिर कॉलोनी में स्थित उसकी 3520 वर्ग फीट में बिल्डिंग की अनुमति 28 अगस्त 2025 को निरस्त कर दी गई थी. जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका के लंबित रहने के दौरान नगर निगम ने विगत 18 जनवरी को बिल्डिंग का एक हिस्सा तोड़ दिया था. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नगर निगम की कार्रवाई को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर एक्ट के तहत पारित दिशा-निर्देश के विपरीत पाते हुए मनमानी कार्रवाई किये जाने पर नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को तलब किया था.
एकलपीठ ने अवमानना का माना था दोषी
याचिका की सुनवाई के दौरान 5 फरवरी को नगर निगम आयुक्त भोपाल संस्कृति जैन एकलपीठ के समक्ष उपस्थित हुुई थीं. दो चरणों में सुनवाई के दौरान पहले चरण में नगर निगम आयुक्त भोपाल संस्कृति जैन एकलपीठ के समक्ष उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगते हुए हलफनामा प्रस्तुत करने की बात कही थी. वहीं दूसरे चरण में हुई सुनवाई के दौरान हलफनामा पेश नहीं करने पर एकलपीठ ने मौखिक माफी स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की तोड़ी गई बिल्डिंग को बहाल करने के संबंध में जानकारी मांगी थी.
एकलपीठ को बताया गया कि नियम अनुसार बिल्डिंग को तोड़ा गया है, उसे बहाल नहीं किया जा सकता है. एकलपीठ ने सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर एक्ट के तहत जारी की गई गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर अवमानना का दोषी करार देते हुए 6 फरवरी को सजा के लिए सुनवाई निर्धारित की गई थी.
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नगर निगम भोपाल और निगमायुक्त की तरफ से अवमानना का दोषी मानने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. अपील में कहा गया था कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना मामले की सुनवाई अधीनस्थ न्यायालय नहीं कर सकता है. अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार तभी है जब न्यायालय के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन हुआ हो.
मर्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड की पूरी याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि नगर निगम ने उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश या निर्देश का उल्लंघन किया गया है. पूर्व में अपील की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी. बुधवार को अपील की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अवमानना की कार्रवाई निरस्त कर दी.

