मध्य प्रदेश का कर्ज 5.61 लाख करोड़ तक पहुंचा, फिर भी सरकार की लाड़ली है बहना
मोहन यादव सरकार की लाड़ली बहना योजना से बढ़ रहा राज्य पर कर्ज, किश्त के लिए हर महीने का कर्ज क्यों मंजूर. रिपोर्ट शिफाली पांडे.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 28, 2026 at 9:30 PM IST
|Updated : August 28, 2026 at 10:12 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहां बहनों को समर्पित पूरी एक योजना शुरु की गई. लगातार बढ़ते वित्तीय भार के बावजूद सरकार द्वारा मार्च 2023 से अब तक बहनों के खाते में 63 हजार 248 करोड़ रुपए पहुंचाए जा चुके हैं. हर साल रक्षाबंधन के मौके पर पंद्रह सौ रुपए की राशि को बढ़ाकर 1750 कर दी जाती है. अकेले 250 रुपए के शगुन की राशि बढ़ाने से सरकार के खजाने पर 2, 148 करोड़ रुपए का बोझ आता है. 2026-27 में केवल लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ खर्च किए गए जो प्रदेश के सालाना खर्च का करीब 5.4 प्रतिशत है. इस पर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है कि घोषणा पत्र में किए गए वादे के मुताबिक लाड़ली बहना योजना की धनराशि तीन हजार कब होगी.
केवल शगुन के 250 रुपए से वित्तीय भार दो हजार करोड़ से ज्यादा
लाड़ली बहना योजना में इस बार रक्षाबंधन के त्योहार की जो किश्त दी गई है. उस किश्त में 1500 रुपए की मासिक किश्त के साथ 250 रुपये अलग से शगुन के दिए गए हैं. केवल इस राशि की वजह से सरकार के खजाने पर दो हजार 148 करोड़ का वित्तीय भार बढ़ा है. सरकार ने 2026-27 के 4.38 लाख करोड़ के बजट में केवल लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपए अलग से रखे. एक आंकलन के मुताबिक जो राज्य के सालाना खर्चे का 5.4 फीसदी बैठता है.

प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा कहते हैं, "हम इसे बोझ की तरह नहीं देखते. बहनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ये एक महती योजना है. जिस योजना की वजह से हमारी बहनों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है. जिस योजना की वजह से उनके परिवार के खर्चे में उन्हें सहयोग मिल रहा है. तो हमारे लिए तो ये योजना नहीं सरकार का कत्तर्व्य है." तीन हजार रुपए दिए जाने के सवाल पर उनका कहना है कि जो वादा किया है वो पूरा करेंगे.
मध्य प्रदेश पर कर्ज 5.61 लाख करोड़ तक पहुंचा
लाड़ली बहना योजना में इस महीने 39 वीं किश्त जारी की गई है. जिसमें प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खाते में 1750 रुपए की राशि ट्रांसफर की गई. भारी भरकम खर्च वाली इस योजना के कारण कमोबेश हर महीने देखें तो सरकार के खजाने पर 1500 से लेकर 1900 करोड़ रुपए तक का बोझ बढ़ रहा है. वार्षिक रूप से ये आंकड़ा 23,000 करोड़ तक पहुंच रहा है. लाड़ली बहना के अलावा फ्री बीज की बाकी योजनाओं को सुचारु संचालन हो सके इसके लिए सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है.
मध्य प्रदेश सरकार पर ताजा कर्ज का आंकड़ा बढ़कर 5.61 लाख करोड़ रुपए तक हो गया है. शुरुआत में देखें तो जब ये योजना शुरू की गई थी तब इसका बजट करीब 18, 984 करोड़ था. 2026-27 में फिर बढ़कर जो 23 हजार करोड़ से ज्यादा पहुंच गया. नवम्बर 2025 से मोहन सरकार ने मासिक किश्त 1250 से बढ़ाकर 1500 कर दी. जिसके बाद 1,794 करोड़ का नया बोझ सरकार के खजाने पर आया. जून 2023 से जो मासिक किश्त शुरु हुई इस योजना में अब तक 39 किश्तें जो दी गई हैं उनमें लाड़ली बहनों के अकाउंट में 63, 248 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा चुके हैं.
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उधर, कांग्रेस ये मांग कर रही है कि वादे के अनुरूप ला़ड़ली बहनों को तीन हजार की मासिक किश्त क्यों नहीं दे रही सरकार. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सवाल उठाते हैं जितनी राशि सरकार दे रही है उतने का तो सिलेंडर आ रहा है. ऐसे कैसे आर्थिक मजबूती बहन को मिलेगी.
ऐसे बढ़ती गई लाड़ली बहना योजना में किश्त की राशि
लाड़ली बहना योजना मध्य प्रेदश में शिवराज सरकार के कार्यकाल में मार्च 2023 में प्लान हुई और जून 2023 में इसकी पहली किश्त महिलाओ के खाते में डाली गई. शुरुआत एक हजार रुपए से हुई थी. बाद में जिसे बढ़ाकर 1250 कर दिया गया. 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में इस योजना ने बीजेपी को सियासी लाभ भी दिया. नवम्बर 2025 में मोहन सरकार ने इस राशि में बढ़ोत्तरी की और 1500 रुपए की किश्त लाड़ली बहनों के खाते में आने लगी. पूरे प्रदेश में एक करोड़ 25 लाख महिलाएं इस योजना की लाभार्थी हैं.

