मध्य प्रदेश में खाद की कितनी टेंशन! पर्याप्त स्टॉक के दावों के बाद किसान क्यों हो रहे पैनिक?
वैश्विक युद्ध का फर्टिलाइजर्स पर असर, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती यूरिया की कीमतों का मध्यप्रदेश के किसानों पर कितना असर. आलोक कुमार श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 12, 2026 at 9:19 PM IST
|Updated : May 13, 2026 at 5:22 PM IST
हैदराबाद: अमेरिका और ईरान के बीच भले ही अभी सीजफायर हुआ है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमोनिया और सल्फर की आपूर्ति प्रभावित होने से खाद की कमी महसूस की जा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत तेजी से बढ़ रही हैं और लगभग दोगुनी हो चुकी हैं. देश के साथ मध्य प्रदेश में भी वर्तमान स्थिति में फर्टिलाइजर के वितरण में कमी आई है.
हालांकि केन्द्र और राज्य सरकारें स्थिति को संभालने का दावा जरूर कर रही हैं. दूसरी तरफ पीएम नरेंद्र मोदी की अपील में रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग ज्यादा करने की सलाह और वैश्विक हालातों के चलते खाद को लेकर किसान के माथे पर बल पड़ने लगे हैं.
मध्य प्रदेश में खाद की कितनी टेंशन?
मध्य प्रदेश में 2025 में खरीफ के सीजन में जो खाद की मांग थी, उसके मुकाबले प्रदेश में फिलहाल एक तिहाई खाद की उपलब्धता है. ऐसे में किसानों को साफ नजर आ रहा है कि हर साल के मुकाबले इस साल खाद का संकट और भीषण होने वाला है. ग्वालियर, चंबल, रीवा, सतना, सागर, पन्ना और टीकमगढ़ समेत दर्जनों जिलों में खाद वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. किसान परेशान हो रहे हैं.
पुलिस और प्रशासन जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी कर रहे हैं बावजूद इसके किसान खाद की कालाबाजारी की लगातार शिकायत कर रहे हैं. इधर किसान संगठनों का कहना है कि सरकार किसानों को वस्तु स्थिति से अवगत नहीं करा रही हैं और अपील के जरिए उनकी चिंता बढ़ा रही हैं.

किसान दामोदर सिंह कहते हैं, "वैसे भी पिछले कई सालों से हर सीजन में खाद की मारामारी रहती है. जब अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध शुरू हुआ था, तो संकेत मिल गए थे कि लंबे समय तक तनाव बरकरार रहेगा तो खाद का संकट और ज्यादा बढ़ जाएगा. अब जब प्रधानमंत्री ने अपील की, तो साफ हो गया कि आगामी खरीफ सीजन के लिए खाद मिलना आसान नहीं होगा.
वैसे भी किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिलती थी और अब संकट गहराने के कारण किसान सोच रहा है कि खाद मिलेगी भी या नहीं. टोकन व्यवस्था के बावजूद खाद की मारामारी अभी से खाद वितरण केन्द्रों पर दिख रही है."
मध्य प्रदेश में खाद के पर्याप्त स्टॉक का दावा
केन्द्र और राज्य सरकार ने दावा किया है कि खरीफ 2026 के लिए खाद का स्टॉक पर्याप्त है लेकिन सप्लाई चेन में बाधा के कारण जमीनी स्तर पर किल्लत देखी जा रही है. सरकार किसानों को यूरिया के बजाय नैनो यूरिया और अन्य विकल्पों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है.
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद सप्लाई चेन टूटने से देश के साथ मध्य प्रदेश में भी खाद की किल्लत हो रही है. अधिकांश जिलों में खाद वितरण केन्द्रों में टोकन होने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है. हालांकि सरकार सब्सिडी के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने के दावे जरुर कर रही है लेकिन खाद के लिए किसानों की लाइनें बता रही हैं कि प्रदेश में फर्टिलाइजर्स की कमी बनी हुई है.

कृषि विभाग ने किसानों से की अपील
कृषि विभाग के उप संचालक राजेश त्रिपाठी बताते हैं, "प्रदेश में खाद की मात्रा पर्याप्त मात्रा है, खाद की कोई कमी नहीं है. सरकार ने अभी ऑनलाइन सिस्टम जारी किया है. जिसके बारे में हम सतत रूप से किसानों को बता रहे हैं. किसान ई विकास प्रणाली के पोर्टल पर जाकर अपना ई कूपन जारी करके अपनी मनचाही जगह से जरूरत के हिसाब से खाद ले सकते हैं. इसके साथ-साथ कृषि विभाग ने पहल की है कि किसानों को जमीन पर ज्यादा रासायनिक खाद उपयोग नहीं करना चाहिए."
राजेश त्रिपाठी ने कहा, "हमारे विभाग की कोशिश है कि किसानों को जैविक खाद से खेती के लिए प्रोत्साहित करें. किसान भाईयों को कहूंगा कि खरीफ के सीजन में खाद की किसी प्रकार की कमी नहीं रहेगी. खाद का कहीं कोई मुद्दा नहीं है. हम लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं. किसान खाद के ई टोकन के जरिए जहां से चाहें, जितनी मात्रा में चाहे खाद ले सकते हैं."

'खाद के लिए मारा-मारा फिरेगा किसान'
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है, "गेंहू खरीदी के दौरान पूरे प्रदेश में किसान परेशान हो रहे हैं. अब सबसे बड़ी समस्या खाद की आने वाली है. प्रधानमंत्री की अपील के बाद साफ दिखाई दे रहा है कि किसान खाद के लिए मारा मारा फिरेगा. किसानों से यह अपील करना कि आप 50 रासायनिक खाद का उपयोग करें और जैविक की तरफ जाएं लेकिन इतनी जल्दी संभव नहीं है."
उन्होंने कहा कि "किसान समझ रहे हैं कि युद्ध काल है लेकिन सरकार को चाहिए कि अन्य देशों की तरह भारत में खाद की व्यवस्था कराए. हर साल की यही कहानी है और लगता है कि इस बार खाद की बहुत समस्या आने वाली है. सरकार उत्पादन पर अपनी पीठ थपथपाती है कि हमने इतना उत्पादन बढ़ा दिया लेकिन व्यवस्थाओं की बात आती है,तो सरकार पीछे हट जाती है."

मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के लिए खाद की जरुरत
मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के लिए कृषि विभाग ने उर्वरकों की कुल जरुरत लगभग 390.54 लाख मीट्रिक टन (राष्ट्रीय स्तर पर) का आंकलन किया है. जिसमें राज्य के लिए भी पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है. प्रदेश में खरीफ फसलों सोयाबीन, मक्का और धान के लिए किसानों को फर्टिलाइर्जस की जरुरत है.
- यूरिया: लगभग 7.25 लाख मीट्रिक टन
- डी.ए.पी (DAP): लगभग 3.00 लाख मीट्रिक टन
- एन.पी.के(NPK): लगभग 2.50 लाख मीट्रिक टन
- एस.एस.पी(SSP): लगभग 2.00 लाख मीट्रिक टन
- एम.ओ.पी(MOP): लगभग 0.80 लाख मीट्रिक टन
खरीफ सीजन 2026 के लिए देश में 51% से अधिक खाद का स्टॉक पहले से ही मौजूद है और सरकार ने अतिरिक्त 97 लाख मीट्रिक टन खाद का इंतजाम किया है ताकि किसानों को परेशानी न हो. केन्द्र सरकार का दावा है कि सामान्यतः 33% खाद का स्टॉक रहता है लेकिन यह फिलहाल 51 प्रतिशत से अधिक है.
खरीफ सीजन के लिए खाद का स्टॉक
प्रदेश के कृषि अधिकारियों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 की बोवनी के लिए खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. राज्य के विभिन्न जिलों में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है. मई 2026 की स्थिति में यूरिया का लगभग 5627 मीट्रिक टन, डीएपी लगभग 2393 मीट्रिक टन, एनपीके लगभग 9986 मीट्रिक टन, एसएसपी लगभग 9281 मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है.

प्रदेश में खाद की उपलब्धता (मई 2026 की स्थिति में)
- यूरिया- लगभग 5627 मीट्रिक टन
- डीएपी (DAP)-लगभग 2393 मीट्रिक टन
- एनपीके (NPK)-लगभग 9986 मीट्रिक टन
- एसएसपी (SSP): लगभग 9281 मीट्रिक टन
खाद वितरण के लिए ई-टोकन व्यवस्था
मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू है, जिससे लंबी लाइनों से राहत मिलेगी. 15 जून के बाद यूरिया की 100% आवश्यकता पूरी की जाएगी, जबकि अन्य खाद का वितरण शुरू हो चुका है. किसान ई-विकास पोर्टल पर सोसायटी या निजी दुकानों के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकते हैं. प्रदेश के कई जिलों में खाद वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. किसान खाद की भारी किल्लत और 275 रुपये की खाद कालाबाजारी के बाद 600 रुपए तक में खरीदने को मजबूर हैं.
सरकार ने यूरिया के लिए 50% की बाध्यता खत्म कर दी है और टोकन व्यवस्था के तहत एक क्लिक पर यूरिया उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है. पुलिस और प्रशासन जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किसानों से जरुरत के अनुसार खाद का उपयोग करने और कालाबाजारी करने वालों की शिकायत करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि "प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक है और किसानों को पैनिक होकर ब्लैक में खाद खरीदने की जरुरत नहीं है."
कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल का कहना है, "प्रदेश में पर्याप्त खाद उपलब्ध है, किसानों को खाद की कमी नहीं आने दी जाएगी. कालाबाजारी और जमाखोरी को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. "
होर्मुज जलमार्ग में तनावपूर्ण हालात का असर
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ दिखाई देने लगा है. खासकर होर्मुज जलमार्ग में तनावपूर्ण हालात के चलते तेल और गैस की आवाजाही काफी हद तक प्रभावित हुई है. यह वही महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा और कच्चे माल का परिवहन होता है.जिसका सीधा प्रभाव भारत के फर्टिलाइजर उत्पादन पर भी पड़ा है.
पिछले वर्ष की तुलना में फर्टिलाइजर उत्पादन 24.6 प्रतिशत गिरा
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का फर्टिलाइजर उत्पादन पिछले वर्ष मार्च 2025 की तुलना में लगभग 24.6 प्रतिशत गिर गया है. सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गिरावट की प्रमुख वजह प्राकृतिक गैस (नेचुरल गैस) की सप्लाई में बाधा है. जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से यूरिया उत्पादन में किया जाता है.

यूरिया भारत की कृषि व्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण फर्टिलाइर्जस में से एक है और इसका उत्पादन सीधे तौर पर गैस आपूर्ति और कीमतों पर निर्भर करता है. सीजफायर के बावजूद फॉस्फेट उर्वरक बनाने के लिए आवश्यक सल्फर और प्राकृतिक गैस की सप्लाई अभी भी प्रभावित है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें दोगुनी हो गई हैं.
इधर, केंद्र सरकार ने यूरिया और डीएपी की बढ़ी हुई कीमत का बोझ खुद उठाने के लिए सब्सिडी बढ़ाकर 1.71 लाख करोड़ रुपए कर दी है.
प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं भारत की फर्टिलाइजर इंडस्ट्रियां
भारत की फर्टिलाइजर इंडस्ट्री काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं. ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई बाधित होती है या कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है तो इसका सीधा असर घरेलू उत्पादन पर पड़ता है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फर्टिलाइजर उत्पादन में गिरावट आने से आने वाले समय में कृषि लागत पर दबाव बढ़ सकता है. खासकर खरीफ सीजन से पहले यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो किसानों को खाद की उपलब्धता और कीमत दोनों स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
कृषि अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर नजर रखी जा रही है और वैकल्पिक आपूर्ति के स्रोतों पर भी विचार किया जा रहा है. ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसके अलावा ऊर्जा आयात को सरल बनाने और स्थिर आपूर्ति को सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं.
'नहीं बढ़ेंगी खाद की कीमतें'
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में ग्वालियर दौरे के दौरान कहा था कि "युद्ध की वजह से अभी रासायनिक खाद का कोई संकट नहीं है. देश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है. केन्द्र सरकार अलग-अलग स्तर पर इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है. पश्चिम एशिया में पैदा हुई परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लगातार बैठकें की जा रही हैं.
शिवराज सिंह ने कहा "युद्ध के चलते कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है. इससे डीएपी और यूरिया के रेट में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन सरकार ने तय किया है कि डीएपी और यूरिया के दाम पहले के तरह ही रहेंगे. खाद की कीमतों में बढ़ोत्तरी नहीं की जाएगी. इसके लिए केन्द्र सरकार ने अपनी पिछली कैबिनेट बैठक में 41 हजार करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की है ताकि बढ़ती कीमतों का बोझ किसानों पर न पड़े. इसके अलावा खाद की उपलब्धता जहां से हो सकती है, उसके प्रयास किए जा रहे हैं."
शिवराज सिंह ने कहा कि "मैं यह नहीं कहूंगा कि कोई परेशानी है ही नहीं है, जाहिर है कि संकट तो है, लेकिन संकट से निपटने के लिए हम प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिन और रात कोशिश कर रहे हैं कि जनता और किसानों पर इसका असर ना पड़े."
57 लाख टन यूरिया और अन्य उर्वरक आयात के लिए टेंडर जारी
नई दिल्ली में उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस.शर्मा ने 4 मई 2026 को जारी किए आंकड़ों में बताया कि उर्वरकों का घरेलू उत्पादन 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गया है. जबकि, आयात लगभग 15 लाख मीट्रिक टन है. इसके साथ ही देश में वर्तमान अवधि के लिए उर्वरक का कुल स्टॉक लगभग 78 लाख मीट्रिक टन हो गया है. उन्होंने बताया कि 38 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 19 लाख मीट्रिक टन फॉस्फेटिक और पोटैशियम युक्त उर्वरकों की खरीद के लिए वैश्विक टेंडर जारी किए गए हैं. यानी 57 लाख मीट्रिक टन उर्वरक विदेशों से मंगाई जा रही है. इस हिसाब से 78 लाख मीट्रिक टन उत्पादन की गई और 57 लाख मीट्रिक टन मंगाई जा रही उर्वरक को जोड़ दें तो 135 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक बैठता है.

'देश में खाद का पर्याप्त भंडार'
देश के उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस.शर्मा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में 11 मई को देश के खाद भंडार का पूरा ब्यौरा पेश किया है. उन्होंने बताया कि "खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और स्टॉक की निगरानी कर रही हैं. भारत के पास पर्याप्त उर्वरक भंडार है और पश्चिमी एशिया की स्थिति का घरेलू आपूर्ति पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ने दिया जाएगा. खरीफ सीजन के लिए मांग की तुलना में 51% से अधिक का रिकॉर्ड स्टॉक पहले से उपलब्ध है. घरेलू उत्पादन के साथ-साथ सरकार ने बड़े पैमाने पर आयात के सौदे भी पक्के कर लिए हैं ताकि 15-20 दिनों में शुरू होने वाले पीक सीजन में कोई दिक्कत न आए."
देश में खाद का भंडार (4 मई तक की स्थिति)
- यूरिया- 74.48 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी (DAP)- 22.47 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके (NPK)- 59.53 लाख मीट्रिक टन
- एसएसपी (SSP- 26.71 लाख मीट्रिक टन
- एमओपी(MOP)- 12.52 लाख मीट्रिक टन
'कालाबाजारी और जमाखोरी पर निगरानी'
अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस.शर्मा ने बताया, "राज्यों को जमाखोरी और खाद के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के निर्देश दिए गए हैं. सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह हर हफ्ते स्थिति की समीक्षा कर रहा है. शुरुआती दौर में कुछ इलाकों में पैनिक स्थिति देखी गई थी, जिसे रोकने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन सामान्य शेड्यूल पर है और यूरिया प्लांट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं."
For Kharif season 2026, based on the fertilizer requirement that has been assessed by the Department of Agriculture and Farmers welfare, the current stock is more than 51%, significantly higher than the usual level of requirement that we usually maintain at 33%. Therefore, the… pic.twitter.com/sEDR76gKFL
— PIB India (@PIB_India) May 11, 2026
सब्सिडी का बोझ और पीएम मोदी की रणनीति
अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस.शर्मा ने बताया, "बजट 2026-27 में केंद्र ने 170805 करोड़ रुपए की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया है.वैश्विक बाजार में यूरिया जैसी खादों की कीमतें दोगुनी होने के कारण यह बिल बढ़ सकता है. प्रधानमंत्री मोदी की अपील का मुख्य उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते आयात बिल काफी बढ़ गया है, ऐसे में खाद का संतुलित और कम उपयोग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा."
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की किसानों से अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में रसायनिक उर्वरकों के जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने 11 मई 2026 को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान मंच से किसानों से रसायनिक उर्वरकों के उपयोग में 50 प्रतिशत तक कटौती करने की अपील की है. उन्होंने धरती मां के संरक्षण के लिए प्राकृतिक खेती के बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा, यूरिया समेत कई फर्टिलाइजर का भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है और इसके चलते विदेशी मुद्रा का उपयोग होता है और उसे डॉलर में ये रकम चुकानी होती है.
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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रासायनिक खाद को लेकर कही गई मुख्य बातें
- पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि रसायनों के ज्यादा इस्तेमाल से धरती मां को बहुत पीड़ा हो रही है और जमीन बंजर हो रही है.
- किसानों से यूरिया और अन्य रसायनिक खादों का इस्तेमाल 50% तक कम करने का संकल्प लेने का आह्वान किया है.
- यूरिया और अन्य फर्टिलाइजर को भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है. इसमें विदेशी मुद्रा की बड़ी संख्या में खपत होती है.
- खेती की लागत कम करने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया.
- रासायनिक उर्वरकों के बजाय वैकल्पिक और जैविक खादों के इस्तेमाल की सलाह दी.
- जैसे शरीर के लिए दवा की सही मात्रा जरूरी है, वैसे ही मिट्टी के लिए सही मात्रा में खाद जरूरी है.

