करियर का दबाव भारी! शहरों में ज्यादा बच्चों से कतरा रहे परिवार, कम हुई प्रजनन दर
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की चौंकाने वाली रिपोर्ट, शहरी इलाकों में घट रही प्रजनन दर, ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 2.3.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 31, 2026 at 7:42 PM IST
भोपाल: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 6 की ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की प्रजनन दर को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में प्रजनन दर घट रही है. मध्य प्रदेश में औसत प्रजनन दर 2.1 है, जो कि जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए औसत मानी जाती है, लेकिन जबकि प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में इस दर में बड़ा अंतर है. विशेषज्ञ इसकी वजह करियर की चिंता, अधिक उम्र में होने वाली चिंता और महंगाई को मानते हैं.
क्या कहते हैं ताजा आंकड़े
नेशनल फैमिली सर्वे 6 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक "देश में जनसंख्या के स्थिरीकरण के लिए कुल प्रजनन दर 2.1 होना जरूरी है. यानी माता-पिता कम से कम से एक बच्चे को जन्म दे रहे हैं. मध्य प्रदेश की औसत प्रजनन दर तो इस औसत के बराबर है, लेकिन शहरी क्षेत्रों की प्रजनन दर इस औसत से काफी कम है. प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.7 है, यानी महिला अपने जीवनकाल में पहले के मुकाबले कम बच्चों को जन्म दे रही है.
जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 2.3 है. हालांकि राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों के मुकाबले प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की स्थिति थोड़ी बेहतर है. राष्ट्रीय स्तर पर शहरी क्षेत्रों में प्रजनन दर के आंकड़े 1.6 है.
महंगाई, करियर का दवाब पड़ रहा भारी
नेशनल हेल्थ मिशन के रिटायर्ड डायरेक्टर डॉक्टर पंकज शुक्ला कहते हैं "शहरी क्षेत्रों में प्रजनन दर कम होने के पीछे कई कारण हैं. शहरी क्षेत्रों में महंगाई के दबाव का असर परिवार बढ़ाने पर पड़ रहा है. लोग छोटे परिवार की तरफ बढ़ रहे हैं. इसके अलावा करियर की चिंता की वजह से लोग देरी से शादी कर रहे हैं और बाद में परिवार बढ़ाने से भी कतराते हैं, हालांकि ग्रामीण इलाकों में लाइफ स्टाइल पर होने वाले कम खर्चों आदि की वजह से अभी भी 1 से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं. पहले आमतौर पर हर परिवार में 3 से 4 बच्चे होना आम बात होती थी, जबकि अब ज्यादातर परिवार 1 या 2 बच्चों तक ही सीमित हो जाते हैं."
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प्रदेश में उम्र में शादी का प्रतिशत
उधर प्रदेश में कम उम्र में शादी का प्रतिशत थोड़ा कम हुआ है. प्रदेश में 20 से 24 साल की आयु वर्ग की 20 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो रही है. ग्रामीण इलाकों में 23.4 फीसदी युवतियों की शादी 18 साल के पहले हो जाती है, जबकि शहरी इलाकों में भी बाल विवाह के मामले सामने आ रहे हैं. शहरी इलाकों में 9 फीसदी युवतियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है. हालांकि साल 2019-21 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 23.1 फीसदी था. इसी तरह प्रदेश में 25 से 29 साल के 25 फीसदी युवाओं की शादी विवाह की उम्र 21 साल के पहले ही हो गई.

