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संविदा का संकट: पद विषय विशेषज्ञ की पगार मजदूर से कम, 9000 के वेतन में कर्मी हो रहे रिटायर

मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के बुरे हालात, प्यून से कम पगार में काम करने को मजबूर आर्टिस्ट, 9000 की तनख्वाह पर हो रहे रिटायर.

MP CONTRACT EMPLOYEES
संविदा कर्मचारियों की नहीं बढ़ रहा वेतन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 7:04 PM IST

7 Min Read
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भोपाल: विजय सप्रे शास्त्रीय संगीत के गायक हैं. शास्त्रीय संगीत में उन्हें भारत सरकार के संस्कृति विभाग से फेलोशिप मिली है. 2011 में सरकारी नौकरी में आए. बाल भवन में संविदा पर म्यूजिक टीचर की नौकरी मिली थी. तब करीब 5000 रुपये के वेतन पर काम शुरू किया. 15 साल की नौकरी के बाद 62 साल की उम्र में जब रिटायरमेंट के मुहाने पर खड़े हैं तब इनकी तनख्वाह कुल 9961 रुपए है. इनके ही विभाग में भृत्य (प्यून) की पगार 45,000 रुपये के आस पास है.

संघ रत्ना ड्रामा टीचर हैं. वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के भारत रंग महोत्सव का हिस्सा रही हैं. ये बाल भवन में बच्चों को आधुनिक थियेटर की ट्रेनिंग देती हैं. संघ रत्ना 2013 में संविदा पर अपनी काबिलियत और इंटरव्यू के बाद नौकरी में आईं. 13 साल बीतने को हैं और तनख्वाह पूरी 10000 भी नहीं हो पाई है. वे कहती हैं मजदूर मुझसे ज्यादा कमा लेता है. नौकरी भले मेरी विषय विशेषज्ञ की हो. ये दो उदाहरण भर हैं. मध्य प्रदेश में कमोबेश इतनी ही तनख्वाह पर कभी नियमित हो जाने की उम्मीद में काम कर रहे कर्मचारियों की तादाद 1 लाख 72 हजार है.

संविदा पर प्यून से कम पगार में काम करने को मजबूर आर्टिस्ट (ETV Bharat)

भारत सरकार ने जिन्हें फैलोशिप दी, उस कलाकार की 9000 पगार

15 वर्ष की संविदा की अपनी नौकरी में विजय सप्रे हर साल ये उम्मीद बांधे रहे कि इस बरस वे नियमित हो जाएंगे. इंतजार अब रिटायरमेंट तक आ गया. मार्च 2026 में विजय रिटायर होने वाले हैं. रिटायरमेंट के बाद पेंशन तो दूर ग्रेच्युटी और किसी भी अन्य सरकारी कर्मचारी को मिलने वाली सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी. सप्रे 9000 रुपए की तय पगार में ही रिटायर भी हो जाएंगे. विजय सप्रे महिला बाल विकास विभाग के अधीन बाल भवन में संगीत के शिक्षक हैं.

ड्यूटी के मुताबिक उन्हें केवल शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देनी है, लेकिन कलाकारों के संकट में वे तबला सिंथेसाइजर सहित बाकी वाद्य यंत्र सिखाते हैं. डांस क्लास में संगतकार भी बन जाते हैं. सप्रे बताते हैं, "मैंने डबल एमए किया है, इस पद के लिए जो अर्हता है वो पूरी करता हूं. मैंने निमाड़ के संत सिंगाजी महाराज के पदों को शास्त्रीय पदों में निबद्ध किया. उसके बाद मुझे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की फेलोशिप भी मिली.

यही फैलोशिप कुमार गंधर्व को मिल चुकी है. मेरे विभाग में जो सरकारी चपरासी है वो 45000 रुपए वेतन ले जाता है. सफाई कर्मी मुझसे ज्यादा वेतन पाता है, लेकिन मेरा वेतन रिटायरमेंट के 2 महीने पहले तक 9961 रुपए है, पूरे दस हजार भी नहीं है. सरकार भरोसा दिलाती रही संविदा वाले नियमित होंगे. आदेश भी निकला पर कुछ नहीं हुआ."

'मजदूर से भी गए बीते हैं हम क्वालिफाईड कलाकार'

संघ रत्ना 2013 में ड्रामा टीचर के तौर पर बाल भवन में संविदा पर काम करने आई थीं. मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा के पहले बैच की स्टूडेंट संघ रत्ना ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के भारत रंग महोत्सव में भी हिस्सा लिया है. 2013 से बाल भवन में संविदा पर काम कर रही हैं. वे कहती हैं, "2023 में जब संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किए जाने और खाली पदों में पचास प्रतिशत आरक्षण का अवसर दिए जाने का आदेश आया था, तो लगा कि अब सब्र का फल मिल जाएगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ. कल्पना कीजिए एक मजदूर से कम तनख्वाह पर हम कलाकार तैयार कर रहे हैं."

'साहब ने ड्राइविंग भी करवा ली, लेकिन नौकरी पक्की नहीं हुई'

मुकेश यादव बतौर स्पोर्ट्स टीचर काम कर रहे हैं, लेकिन हिम्मत हार चुके हैं. वे बताते हैं, "2018 तक मुझसे हमारे अफसर ने अपने घर पर भी काम करवाया. 12-12 घंटे काम 9000 की पगार में किया है. लेकिन फिर मैंने हार मान ली. अफसरों के घरों का काम करना छोड़ दिया. बस उसी का खामियाजा है कि हम अभी तक संविदा पर ही काम कर रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हम संविदा कर्मियों को नियमित करने को लेकर साल 2023 में आदेश भी निकाला था, लेकिन 2 साल पूरे होने के बाद भी कुछ नहीं हुआ."

Bhopal Bal Bhavan
बाल भवन में प्यून से कम पगार पर काम करने को आर्टिस्ट (ETV Bharat)

मंत्री के यहां ड्राइवर पिता कोरोना में चले गए अब गुजर मुश्किल

रितिक प्रजापति के पिता प्रीतम सिंह प्रजापति दिवंगत मंत्री लक्ष्मण सिंह गौड़ के ड्राइवर थे. बाद में भी वो अलग अलग विभागों में सरकारी गाड़ी चलाते रहे. 2020 में कोविड में उनकी मौत हो गई. रितिक बताता हैं, "पिता की मौत कोरोना से हुई तब कहा गया था कि अनुकम्पा नियुक्ति मिलेगी. लेकिन मुझे ना तो कोरोना से हुई पिता की मौत की वजह से ना संविदा कर्मचारी के आधार पर अब तक अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल पाई."

1 लाख 72 हजार संविदा कर्मचारियों के यही हाल

मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर बताते हैं, "संविदा कर्मचारियों के लिए 4 जुलाई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि उन्हें नियमित किया जाएगा. फिर 22 जुलाई 2023 को आदेश निकला कि 50 प्रतिशत जो नियमित पदों पर भर्ती में आरक्षण संविदा कर्मचारियों को दिया जाएगा. अनुकम्पा नियुक्ति भी मिलेगी और ग्रेच्युटी भी, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं."

राठौर कहते हैं, "पौने दो लाख कर्मचारियों में से मध्य प्रदेश में मुश्किल से 10-15 कर्मचारी नियमित हो पाए हैं और गजब ये है कि हममें से कई लोगों की तीस साल की नौकरी हो गई है. रिटायर होने वाले हैं, लेकिन नियमित नहीं हो पाए. हमने 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा को सौंपा है." जिसमें हमने बताया कि "संविदा कर्मचारी को नियमित किए जाने के साथ उन्हें भी नियमित कर्मचारी की तरह पेंशन ग्रेच्युटी अनुकम्पा नियुक्ति का लाभ दिया जाए. इसके अलावा विशेष अवकाश दिए जाएं."

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सरकार के हर विभाग की रीढ़ हैं ये संविदा कर्मचारी

  • मध्य प्रदेश के 54 विभागों में संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं.
  • पूरे प्रदेश में 1 लाख 72 हजार संविदा कर्मचारी हैं.
  • सबसे ज्यादा संविदा कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग में करीब 45 हजार के लगभग हैं.
  • महिला बाल विकास में संविदा पर कलाकार भी काम कर रहे हैं.
  • संविदा कर्मियों का न्यूनतम वेतन 9000 से लेकर अधिकतम 45 हजार तक है.
  • 20 साल से संविदा कर्मचारी नियमित किए जाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं

जो संभव होगा उचित रास्ता निकाला जाएगा

इस संबंध में जब डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा से बात की गई तो उनका कहना था कि "इस मामले में जो भी उचित होगा मुख्यमंत्री से चर्चा के पश्चात रास्ता निकाला जाएगा."