बुंदेलखंड का कश्मीर बना छतरपुर, न दिन में धूप ना रात में चैन, 5 डिग्री से नीचे पहुंचा तापमान
छतरपुर में कड़ाके की ठंड जारी, न्यूनतम तापमान 4 से 4.5 डिग्री दर्ज, कलेक्टर ने स्कूलों का बदला टाइम, पढ़ें ठंड से बचाव के उपाय.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 3, 2026 at 5:18 PM IST
छतरपुर: साल बदलते ही मौसम ने भी अपना रंग बदलना शुरू कर दिया है. बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ना शुरू हो गई है. ठंड इतनी ज्यादा पड़ रही है कि बिना आग के रहना मुश्किल हो गया है. रात के 9 बजते ही कोहरा शहर को अपने आगोश में ले लेता है. यह नजारा सुबह 10 बजे तक रहता है. जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित होता है. सावधानी हटते ही दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है. छतरपुर जिले में पिछले दो-तीन दिनों से तापमान में लगातार परिवर्तन हो रहा है.
कोहरे के चलते लेट आ रही ट्रेनें-बसें
वहीं, खजुराहो के मौसम केंद्र के प्रभारी आरएस परिहार कहते कि, ''फिलहाल चार दिनों तक जिले में घना कोहरा छाने की आशंका है. रात के समय कोहरा धुंध में बदल रहा है. सर्द हवाएं भी दिन में चलने से मौसम में परिवर्तन आया है. अभी ठंड से राहत मिलना मुश्किल है. वहीं, घने कोहरे के कारण रात को चलने वाली यात्री बसे छतरपुर से दिल्ली, भोपाल, इंदौर, कानपुर, रीवा, जबलपुर भी एक से ढेड़ घंटे लेट चल रही हैं. जिससे यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, खजुराहो, छतरपुर में कोहरे के कारण ट्रेन और फ्लाइट भी अपने समय से लेट हो रही है. जिसका असर सीधा यात्रियों पर पड़ रहा है.
वहीं, भीषण ठंड को देखते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने स्कूलों के समय में बदलाव का ऐलान कर दिया है. न्यूनतम तापमान 4 से 4.5 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है. जिसने प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में नौगांव को प्रमुख स्थान पर लाकर खड़ा करता है. हाल के दिनों में यहां तापमान 3-4 डिग्री तक गिर चुका है. छतरपुर जिले के नौगांव और खजुराहो सबसे ज्यादा ठंडे रहते हैं.
किसानों की फसल पर ठंड का असर
छतरपुर जिले में पड़ रही भीषण ठंड के कारण किसानों को भी अब चिंता सताने लगी है. बहुत ज्यादा ठंड और लगातार कोहरे के कारण कुछ पौधों का बढ़ना रुक जाता है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. खासतौर पर रबी सीजन की फसलें जैसे आलू, मटर, चना, सरसों और सब्जियां बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं. जो ठंड नहीं झेल पाती और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.

कृषि उपसंचालक केके वैध कहते हैं. ''ठंड और पाले से बचाव के लिए खेतों में हल्की सिंचाई करना बेहद जरूरी है. क्योंकि नमी पाले के प्रभाव को कम करती है. रात के समय खेतों में धुआं करना, फसलों पर सूखी घास या मल्च बिछाना और पॉलीथिन शीट का उपयोग भी कारगर उपाय है. जिससे किसानों के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता.''

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ग्रेनाइट पत्थर बना भीषण ठंड का कारण
छतरपुर जिले के नौगांव को छावनी के नाम से भी लोग जानते हैं. अंग्रेजों के द्वारा नौगांव को बसाया गया था. नौगांव की भौगोलिक स्थिति ही सबसे अगल है. नौगांव में ग्रेनाइट के पहाड़ों के चलते भी मौसम का असर बढ़ जाता है. इसी तरह खजुराहो में भी भौगौलिक स्थिति व ग्रेनाइट के पहाड़ों के कारण भीषण सर्दी, गर्मी में भीषण गर्मी का असर दिखाई देता है. कर्क रेखा के उत्तर में नौगांव विशेष स्थान पर बसा है, जिससे सूर्य की किरणें कम प्रभाव से पहुंचती हैं. जिससे ठंडा ज्यादा होती है. नौगांव के नीचे चट्टानी मिट्टी की पथरीली परत है, जो जमीन की ऊर्जा की क्षमता को प्रभावित करती है. ठंड में ज्यादा ठंड व गर्मी में ज्यादा गर्मी पड़ती है ठीक ऐसे ही हालात खजुराहो में होते हैं.
डॉक्टर ने दी ठंड से बचाव की सलाह
छतरपुर जिला हॉस्पिटल में पदस्थ डॉक्टर रवि सोनी ने बताया, ''ठंड के बढ़ने के साथ ही सांस रोगियों, सर्दी, जुकाम व बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. ऐसे मौसम में सभी को एहतियात बरतने की जरूरत होती है. थोड़ी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है. जब जरूरी हो तभी घर से निकलें. आग का सहारा लें, अगर घर से निकलते हैं तो कानों में मफलर, टोपा, पैर में मोजे, जूते ओर सीने का बचाव जरूर करें. बाइक से निकलने और पैदल चलने से बचें. बच्चों और बुजुर्गों का ठंड से वचाव करें.

रिक्शा चलाने वाले धर्मेंद्र कुशवाहा बताते हैं, ''ठंड बहुत तेज पड़ रही है. दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. रिक्शा खड़ा करके आग ताप कर राहत ले रहे हैं. छतरपुर जिले के खजुराहो में पदस्थ मौसम अधिकारी आरएस परिहार ने बताया कि, ''बादलों की वजह से जिले में मौसम बदल रहा है. अभी ठंड से राहत मिलना मुश्किल है. न्यूनतम तापमान 4 से 4.5 डिग्री दर्ज किया गया है. बीते दिन रात का तापमान 3 डिग्री दर्ज किया गया था.''

