ETV Bharat / state

बुंदेलखंड में होली पर गाते हैं मृत्यु गीत, ढोल-हारमोनियम लेकर घर पहुंचते हैं लोग

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में होली पर उमंग और उल्लास से भरें गीतों के अलावा गाए जाते है मृत्यु गीत,शोक संवेदना प्रकट करने का तरीका.

MP BUNDELKHAND FUNERAL SONG
बुंदेलखंड में होली पर गाते हैं मृत्यु गीत (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 3, 2026 at 8:16 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

रिपोर्ट: कपिल तिवारी

सागर: वैसे तो होली रंगों और मस्ती का त्यौहार है, इस त्यौहार पर मृत्यु के गीतों की बात असहज करने वाली और अटपटी लगती है. हालांकि ये होली का दूसरा पहलु है कि ये आपसी भाईचारे और सद्भाव का त्यौहार भी है. होली के अवसर पर बुंदेलखंड में होने वाली फागों में ये रंग अलग नजर आता है. वैसे तो बुंदेली फागें 14 तरह की होती है, लेकिन इन फागों में एक फाग अनरय की फाग भी होती है. आमतौर पर ये फाग बुंदेलखंड के ग्रामीण और कस्बाई जीवन की होली में आराम से देखने मिल जाती है.

दरअसल बुंदेलखंड में जिस साल में किसी के यहां कोई मृत्यु होती है, तो मृत्यु के बाद अगले एक साल के त्यौहार दुख के त्यौहार होते हैं और बुंदेली में लोग इसे अनरय कहते हैं. ऐसे में बुंदेलखंड के गांवों में जिस के यहां दुख का यानि अनरय का त्यौहार होता है, वहां गांव के लोग फागें गाते हुए पहुंचते हैं और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करके अनरय की फागें गाते हैं. अनरय की फागें में शरीर की नश्वरता.

बुंदेलखंड में शोक वाली फाग (ETV Bharat)

बुंदेली संस्कृति में होली और फागों में मृत्यु गीत

वैसे तो बुंदेलखंड की लोककला और संस्कृति की बात की जाए, तो कई तरह के रंगों से भरी पूरी बुंदेली संस्कृति में लोकजीवन से जुड़े त्यौहार और मानव जीवन के संस्कारों के तरह-तरह के गीत और नृत्य देखने मिलते हैं. जिनमें हर्ष और उल्लास होता है, वैसे ही बुंदेलखंड में होली के त्यौहार में फागें गायी जाती है. जिनकी परंपरा सदियों से आज तक चली आ रही है. खासकर बुंदेली लोकनृत्य राई और बधाई त्यौहार और उत्सव से जुड़े हैं, तो ढिमरयाई और दूसरे गीत मानव जीवन से जुड़े हुए हैं.

इसी तरह बुंदेली गायन में बुंदेली फागों का एक अलग स्थान है. बुंदेली फागें वैसे तो 14 तरह की होती है. जिसमें देवस्मरण, रामायण और महाभारत पर आधारित और मौज मस्ती से जुड़ी फागें भी होती है, लेकिन इन फागों में मृत्यु से जुडे़ गीत भी सुनने मिलते हैं. होली के समय पर बुंदेली में जो अनरय की फागें होती है, वो एक तरह से मृत्युगीत होते हैं.

Bundeli Faag Sung on Holi
होली पर गाई जाती हैं फागें (ETV Bharat)

कितने तरह की होती है बुंदेली फागें

बुंदेली कला संस्कृति पर शोध करने वाले डाॅ ओमप्रकाश चौबे बताते हैं कि "बुंदेली फागों की बात करें, तो मैंने सारे अंचल की फागें देखी है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रकार बुंदेली फागों के हैं. सबसे पहले नारदी फाग, सुमरनी फागों में देवस्मरण किया जाता है. सबसे पहले जब फाग की शुरूआत की जाती है, तो देव स्मरण किया जाता है. जैसे “पहले देवी शारदा गाइए फिर लिए राम के नाम ” क्योंकि हमारे यहां बुंदेलखंड में जब किसी भी तरह का गायन होता है, तो पहले देवस्मरण किया जाता है. चाहे गणेश जी, चाहे हनुमान जी का हो या फिर शारदा मां का हो.

इसके बाद सखआऊ फाग या साखी की फाग होती है. जिसमें पहले एक व्यक्ति गाते हुए रूक जाता है और फिर आगे सब साथ में गाते हैं. फिर छंदआऊ फाग होती है, जिसमें छंद होते हैं, फिर चौकड़िया फाग होती है, जो चार कड़ी की होती है. चौकड़िया फाग काफी मशहूर है. फिर डेढ़पदी फाग, लाल की फाग, अनरय और झगढ़े की फाग होती है. झगड़े की फाग में महाभारत या रामायण या आल्हा खंड में जो भी लड़ाइयां हुई हैं.

SAGAR ANRAY CULTURE ON FESTIVAL
होली पर बुंदेली फागों की मांग (Getty Image)

उनकी एक लड़ाई पर एक फाग बनायी गयी. जैसे रामायण में मेघनाद और लक्ष्मण का युद्ध हुआ है, तो “समर में ठाड़ों शूरमा लड़बे खो, फिर लक्ष्मण मारे बाण ” ये शुरूआत होती है. ये पूरा क्रम है और एक फाग पूरे युद्ध को व्यक्त करती है. ऐसी लगभग 14 तरह की बुंदेली फागें होती है.

क्या होते हैं मृत्यु गीत या अनरय की फागें

अनरय की फाग की बात करें, तो डाॅ ओमप्रकाश चौबे बताते हैं कि अपने बुंदेलखंड में अगर किसी के यहां कोई गमी (मृत्यु) हो जाती है. बुंदेलखंड में जन्म और विवाह दो संस्कारों में गीत गाए जाते हैं, लेकिन मृत्यु संस्कार ऐसा है कि उसमें किसी तरह का कोई गीत नहीं गाया जाता है. जब किसी के यहां गमी होती है, तो फाग के समय में अनरय की फागें गायी जाती है. जिसमें देह की नश्वरता, भगवत भक्ति को प्राथमिकता का इस तरह का अनरय की फागों का आशय होता है. आज भी लोग ग्रामीण अंचलों में मंडली लेकर उन घरों में जाते हैं, जहां मृत्यु होती है, वहां अनरय की फागें गाते हैं. जैसे...

Madhya Pradesh Holi Faag Culture
शोक वाले घर पर मृत्युगीत वाले फाग गाए जाते (ETV Bharat)

“ एक दिन राम घरे सोई जाने लीप पोतकर भौमें पारे, घर के लोग डराने”

“ एक तो टटिया टाट करते हैं, एक तो टटिया टाट करत है, एक तो लेत उमाने ”

इस फाग में देह की नश्वरता और मृत्यु की यथार्थता बतायी गयी है. जिसमें कहा गया है कि मृत्यु अटल है, एक दिन सबको जाना है और मृत्यु के बाद जब मृतक को घर में लीप पोतकर लिटाया जाता है और अंतिम संस्कार की तैयारी की जाती है, तो उसका चेहरा देखकर घर के लोग भी डर जाते हैं. मृत्यु के बाद अर्थी बनायी जाती है और चार लोग लेकर जाते हैं और तब शरीर को होली की तरह जलाकर आ जाते हैं. इस अनरय गीत में देह की नश्वरता बताने की कोशिश की गयी है."