मध्य प्रदेश विधानसभा में ऊठा शव वाहन का मुद्दा, सरकार ने बताया 22 जिलों में 4 शव वाहन
मध्य प्रदेश विधानसभा में शव वाहनों को लेकर सवाल, जवाब में बोले डिप्टी सीएम 55 में से 22 जिलों में केवल 4 शव वाहन.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 7:08 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के राजमार्ग गांव में किसी परिवार में अगर मौत हो जाए तो परिजन विलाप से पहले इस इंतजाम में जुटते हैं कि अंतिम संस्कार होगा कहां और कैसे शव को श्मशान तक ले जाया जा सकेगा. आदिवासी जिले मंडला के बमहनी बंजर में जब कोई इंतजाम नहीं हुआ तो दान में मिली वैन को जुगाड़ से शव वाहन में बदल लिया गया. विधानसभा में सरकार ने मंजूर किया है कि पूरे प्रदेश में ब्लाॉक स्तर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अलग से कहीं भी शव वाहन का इंतजाम नहीं है.
जबकि कायदा ये कहता है कि एक से डेढ़ लाख की आबादी पर एक शव वाहन होना चाहिए, लेकिन सरकार की विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक बुरहानपुर जैसे जिले में 7 लाख की आबादी पर केवल 2 शव वाहन है. जबकि राजधानी भोपाल जहां 27 लाख से ज्यादा आबादी है, वहां 6 लाख से ज्यादा आबादी के लिए केवल एक शव वाहन उपलब्ध है.
यहां अंतिम यात्रा में ट्रैक्टर ही सहारा
बीते दिनों सुर्खियों में आए नरसिंहपुर के राजमार्ग गांव की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब सहानुभूति बटोरती रही. तस्वीर जिसमें कड़ी धूप में शव को टैक्ट्रर में डालकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है. राजस्व में दर्ज नहीं हो सकी राजमार्ग गांव में करीब 1200 की बसाहट है. श्मशान घाट नहीं और शव वाहन भी उपलब्ध नहीं. अंतिम संस्कार के लिए ये सीमा से सटे गांव लोलरी जाते हैं. ये केवल राजमार्ग नहीं आस-पास के गांव लोलरी देवरी पलोहा कटंगी यहां कहीं भी शव वाहन की उपलब्धता नहीं है.
लोलरी गांव पंचायत सचिव उमा श्रीवास्तव बताती हैं ऐसे कोई दिक्कत नहीं है. वैसे तो गांव में भी अब लोग दुखी बीमारी में जुट जाते हैं और कंधे पर ही श्मशान तक ले जाते हैं, लेकिन अगर दूरी हो तो एक दूसरे को टैक्ट्रर ट्राली देने में भी पीछे नहीं हटते. बुनियादी जरूरत के इंतजाम के लिए वाकई ये गांव सरकार की तरफ नहीं देखते."
जुगाड़ की वैन से शव पहुंचते हैं श्मशान
मंडला के बम्हनी बंजर में कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर के भी यही हालात हैं. यहां तो आदिवासियों की बड़ी आबादी है. तो गांव वालों ने खुद ही रास्ता निकाला. यहां से कांग्रेस से विधायक रहे संजीव उइके ने कभी अपने पिता की स्मृति में वैन एंबुलेंस हेल्थ सेंटर को दान में दी थी. अब उसी वैन का इस्तेमाल गांव वाले शव वाहन के रूप में भी कर लेते हैं.
आखिरी सफर पर विधानसभा में भी उठा सवाल
विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला से सवाल किया था कि क्या आप ये बताने की कृपा करेंगे मध्य प्रदेश राज्य के सभी शासकीय ब्लॉक स्तरीय एवं जिला स्तरीय चिकित्सालय में शव वाहनों की व्यवस्था है. यदि हां तो ब्लाकवार और कुल जिलावार कुल कितने वाहन उपलब्ध हैं, संख्या बताएं?
क्या विभाग व सरकार ने प्रदेश के ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और जिला स्तरीय चिकित्सालयों में शव वाहन उपलब्ध कराने के लिए कोई निर्णय लिया है. यदि हां तो जानकारी उपलब्ध कराएं. क्या विभाग इस गंभीर समस्या के निराकारण के लिए राज्य के सभी ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और जिला स्तरीय चिकित्सालयों में एक-एक शव वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था किए जाने का निर्णय लेगा. यदि हां तो कब तक यदि नहीं तो कारण बताएं.

सरकार ने मंजूर किया यहां नहीं है शव वाहन का इंतजाम
विधानसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने मंजूर किया कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर पर अलग से शव वाहन का इंताजम नहीं है. स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने विधानसभा में दिए लिखित उत्तर में ये जानकारी दी कि प्रदेश में ब्लॉक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र में अलग से शव वाहन की व्यवस्था नहीं है. लेकिन सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों और जिला चिकित्सालयों में शव वाहन की व्यवस्था है.
ब्लॉक स्तर पर केवल संस्थागत मृत्यु होने पर जिला चिकित्सालय, चिकित्सा महाविद्यालय में आवश्यकता अनुसार शव वाहन उपलब्ध कराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयीन जिलों में चार व शेष जिलों में 2 शव वाहनों के मान से पूरे प्रदेश में 148 शव वाहन उपलब्ध है. उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि ब्लाक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक-एक शव वाहन उपलबध कराने की वर्तमान में कोई योजना नहीं है.
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विधानसभा में दी गई जानकारी में केवल इन जिलों में चार शव वाहन
विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से 22 जिले ऐसे हैं, जहां तीन व चार शव वाहन उपलब्ध हैं. इनमें 27 लाख से ज्यादा आबादी वाली राजधानी भोपाल में केवल तीन शव वाहन हैं. इसके बाद जबलपुर और सिंगरौली में भी केवल तीन शव वाहन है. बाकी छिंदवाड़ा, दतिया, देवास , ग्वालियर, इंदौर, खंडवा, खरगौन, मंदसौर, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, विदिशा और शाजापुर में चार शव वाहन उपलब्ध हैं. बाकी 33 जिले प्रदेश के ऐसे हैं, जहां केवल दो शव वाहन ही उपलब्ध हैं.

