मध्य प्रदेश सरकार ने माना भागीरथपुरा में हुई 22 मौतें, मोहन यादव ने बढ़ाया मुआवजा
मध्य प्रदेश विधानसभा में गूंजा भागीरथपुरा मामला, कांग्रेस बोली कुत्ता-बिल्ली काटने पर 4 लाख, सिस्टम की लापरवाही पर 2 लाख, सदन में कांग्रेस का हंगामा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 1:48 PM IST
|Updated : February 19, 2026 at 3:29 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने सदन का माहौल गरमा दिया. प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दूषित पानी से हुई मौतों और दिए गए मुआवजे का आंकड़ा पूछा तो सरकार के जवाब से नई सियासत शुरू हो गई. दरअसल स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने 22 मौतों और 44 लाख रुपए मुआवजे की जानकारी दी, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए आसंदी का घेराव किया और नीचे धरने पर बैठ गए.
मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग के बीच हालात इतने बिगड़े कि विधानसभा को दो बार स्थगित करना पड़ा.
भागीरथपुरा पर चर्चा से बचना चाहती थी सरकार
विधानसभा के प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में 21 दिसंबर से अब तक दूषित पानी से हुई मौतों, अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या और पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे को लेकर सवाल उठाया. जैसे ही चर्चा आगे बढ़ने लगी, पंचायती राज मंत्री प्रहलाद पटेल ने नियम 55/7 का हवाला देते हुए कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जांच जारी है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा नहीं होनी चाहिए, इससे जांच प्रभावित हो सकती है. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने भी इसी आधार पर चर्चा टालने की मांग की.
हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि नियमावली का परीक्षण करने के बाद सीमित दायरे में इस विषय पर चर्चा कराई जा सकती है. इस पर नेता प्रतिपक्ष ने तर्क दिया कि व्यापम और मंदसौर गोलीकांड जैसे मामलों में भी जांच के बावजूद सदन में चर्चा हुई थी.

मुख्यमंत्री का जवाब, कलेक्टर निलंबित
प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई की गई. उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम और जांच को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए संबंधित क्षेत्र के कलेक्टर को निलंबित किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी प्रशासनिक कदम संभव थे, वे उठाए गए हैं और सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है. सीएम ने कहा की 2 लाख क्या पीड़ितों को 4 और 5 लाख का मुआवजा भी देंगे, लेकिन कांग्रेस इस पर संवेदनशीलता दिखाए.
स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार की 22 मौतें
स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने सदन में बताया कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया जैसी शिकायतों के साथ मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी. अब तक सैंपल जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अब तक 22 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2-2 लाख रुपए के हिसाब से कुल 44 लाख रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है.
कुत्ता-बिल्ली काटने पर 4 लाख, सिस्टम की लापरवाही पर 2 लाख
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में सांप, कुत्ता या बिल्ली काटने से मौत होने पर 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है, लेकिन सरकारी सिस्टम की लापरवाही से हुई मौतों पर केवल 2 लाख रुपए दिए गए. उन्होंने इसे पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय बताया और कहा कि कांग्रेस विधायकों ने अपनी ओर से 50-50 हजार रुपए की सहायता भी दी है.
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मौतों के आंकड़े पर भी टकराव, इस्तीफे की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि वास्तविक मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से अधिक यानि 35 से ज्यादा है. उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की. इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आसंदी के सामने पहुंचकर नारेबाजी करने लगे और धरने पर बैठ गए. लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को पहले 5 मिनट के लिए और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए सदन स्थगित करना पड़ा.

