नालंदा विश्वविद्यालय और इजरायल की हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के बीच हुआ अहम समझौता
नालंदा विश्वविद्यालय और हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के बीच एमओयू साइन हुआ है. संयुक्त शोध, छात्र-फैकल्टी आदान-प्रदान और सभ्यतागत संवाद बढ़ेगा. पढ़ें पूरी खबर-

Published : February 28, 2026 at 9:02 AM IST
नालंदा: बिहार के नालंदा जिले में स्थित राजगीर के नालंदा विश्वविद्यालय और इजरायल की हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त शोध, अकादमिक आदान-प्रदान और सभ्यतागत संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दौरान यह साझेदारी और अधिक चर्चा में आई, जहां दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया.
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के बाद आभार: गुरुवार को इजरायली संसद (नेसेट) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद हिब्रू यूनिवर्सिटी ने इस एमओयू का जिक्र करते हुए आभार व्यक्त किया. विश्वविद्यालय ने इसे दोनों राष्ट्रों की गहरी साझेदारी का शैक्षणिक क्षेत्र में परिलक्षण बताया. यह समझौता पिछले कुछ समय से दोनों संस्थानों के बीच चल रहे निरंतर अकादमिक संवाद का परिणाम है, जो अब औपचारिक रूप ले चुका है.
समझौते के प्रमुख प्रावधान: एमओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संकाय (फैकल्टी) और छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा. विभिन्न विषयों में संयुक्त अध्यापन कार्यक्रम और गहन शोध पहलों पर सहयोग किया जाएगा. विशेष रूप से बौद्ध अध्ययन, पुरातत्व, गणित और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है. यह साझेदारी दोनों देशों की प्राचीन सभ्यताओं के बीच नए सेतु का निर्माण करेगी.
पिछली तैयारियों और दौरों का योगदान: समझौते की रूपरेखा पहले से ही तैयार थी. हाल ही में हिब्रू यूनिवर्सिटी के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष प्रो. गाय हारपाज और उनकी टीम ने नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी सहित अन्य शिक्षकों के साथ विस्तृत चर्चा की. इसी क्रम में इस माह के प्रारंभ में हिब्रू यूनिवर्सिटी के बौद्ध अध्ययन निदेशक एवं इतिहास, धर्म और क्लासिक्स अध्ययन संस्थान के प्रमुख प्रो. एवीअतार शुलमैन ने नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया और एक विशेष व्याख्यान दिया. इन प्रयासों ने समझौते को मजबूत आधार प्रदान किया.
कुलपति का उत्साहपूर्ण बयान: नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने इस साझेदारी को एक बड़ा कदम करार दिया. उन्होंने कहा कि हिब्रू यूनिवर्सिटी के साथ हुआ यह समझौता दोनों देशों के प्राचीन संबंधों को और सुदृढ़ करेगा. इससे विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों को वैश्विक स्तर पर बेहतर शोध अवसर मिलेंगे, जो उनके शोध कौशल, नवाचार क्षमता और करियर संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
"हिब्रू विश्वविद्यालय के साथ हुआ यह समझौता दोनों देशों के प्राचीन संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा. इससे विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए वैश्विक स्तर पर बेहतर शोध अवसर सृजित होंगे. यह पहल विद्यार्थियों के शोध कौशल, नवाचार क्षमता और करियर की संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी."-प्रो. सचिन चतुर्वेदी, कुलपति, नालंदा विश्वविद्यालय
अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा: नालंदा विश्वविद्यालय अंतर-सांस्कृतिक समझ को प्रोत्साहित करने और स्थायी शैक्षणिक सेतु निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है. यह एमओयू न केवल अकादमिक सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि भारत और इजरायल के बीच सांस्कृतिक और बौद्धिक आदान-प्रदान को नई दिशा देगा. प्राचीन नालंदा की वैश्विक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है.
द्विपक्षीय संबंधों में नया आयाम: यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे के दौरान हस्ताक्षरित कई समझौतों में से एक है, जिसने भारत-इजरायल संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया. शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे, जो वैश्विक स्तर पर शांति और विकास के लिए योगदान देगा.
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