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झारखंड के विश्वविद्यालयों में नेतृत्व संकट: प्रभारियों के भरोसे उच्च शिक्षा, सेशन लेट और छात्र बेहाल

झारखंड के अधिकांश विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं हैं. ये विश्वविद्यालय प्रभारी कुलपति के भरोसे चल रहे हैं.

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रांची विश्वविद्यालय (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 26, 2026 at 10:51 PM IST

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रांची : झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर नेतृत्व संकट से गुजर रही है. राज्य में लगभग 13 सरकारी विश्वविद्यालय (12 राज्य विश्वविद्यालय और एक केंद्रीय/विशिष्ट विश्वविद्यालय) संचालित हैं. इसके अलावा रांची स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL) भी मौजूद है.

प्रमुख विश्वविद्यालयों में रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय शामिल हैं. लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से अधिकतर विश्वविद्यालय स्थायी कुलपतियों के अभाव में प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं.

झारखंड के विश्वविद्यालयों में नेतृत्व संकट (Etv Bharat)

रांची विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय और झारखंड राज्य मुक्त विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है. कई विश्वविद्यालयों में प्रति कुलपति और कुलसचिव जैसे अहम प्रशासनिक पद भी खाली पड़े हैं. कोल्हान विश्वविद्यालय से संबद्ध जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में भी स्थायी कुलपति का अभाव बना हुआ है.

नेतृत्व के इन खाली पदों का सीधा असर शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ रहा है. अधिकांश विश्वविद्यालयों में सत्र लेट चल रहे हैं, परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं हो पा रही हैं और परिणामों में भी अनावश्यक विलंब हो रहा है. इससे विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन करते समय छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है

प्रोफेसर संगठन के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों के मुख्य पद ही खाली हैं, जो पूरे प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं. उनके अनुसार, जब शीर्ष नेतृत्व ही स्थायी नहीं होगा तो नीतिगत निर्णयों में स्थिरता कैसे आएगी. उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के हित में नहीं है.

छात्र नेता प्रताप कुमार ने भी राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाया. उनका कहना है कि 2025 में राजभवन द्वारा सर्च कमेटी का गठन किया गया था, लेकिन उसके बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया में कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है. छात्र संगठनों का आरोप है कि इस मुद्दे पर गंभीर पहल नहीं की जा रही, जिससे झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था पिछड़ती जा रही है.

डीएसपीएमयू के सीनेट सदस्य संतोष कुमार ने कहा कि झारखंड में उच्च शिक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है. विद्यार्थी परेशान हैं, शिक्षक असमंजस में हैं और प्रशासनिक अनिश्चितता बनी हुई है. उनका कहना है कि यदि जल्द स्थायी नियुक्तियां नहीं की गईं तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थायी और सक्षम नेतृत्व की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है. जब तक कुलपति, प्रति कुलपति और कुलसचिव जैसे पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं होंगी, तब तक शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार संभव नहीं है. झारखंड सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को इस दिशा में शीघ्र पहल करनी होगी, ताकि विश्वविद्यालयों की साख और विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके.

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