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जलीय जीवों का आशियाना बना चंबल अभयारण्य, डॉल्फिन की 44 की छलांग, मगरमच्छों की तादाद ने डराया

चंबल अभयारण्य से आई खुशखबरी, घड़ियालों और मगरमच्छों का हुआ विस्तार, गंगेटिक डॉल्फिन की छलांग और प्रवासी पक्षियों की बढ़ी चहचहाहट.

MORENA WATERBIRD CENSUS
चंबल अभयारण्य में जलीयजीवों का सर्वे (Credit: Forest Department)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 21, 2026 at 3:38 PM IST

3 Min Read
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मुरैना: चंबल नदी में प्रकृति का अनोखा उत्सव देखने को मिल रहा है. कभी जलीय जीवों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में पहचानी जाने वाली यह धारा अब जीवन से और भी समृद्ध हो गई है. ताजा सर्वे में 440 नन्हे मगरमच्छों के जन्म के बाद उनकी संख्या बढ़कर 1512 हो गई, जबकि घड़ियालों की संख्या 2938 तक पहुंच गई है. डॉल्फिन और दुर्लभ इंडियन स्कीमर की मौजूदगी भी बढ़ी है. खास बात यह कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में मुरैना से पचनदा तक का इलाका सबसे सुरक्षित पाया गया.

जलीय जीवों की वार्षिक गणना पूरी
यह सर्वे 4 से 16 फरवरी के बीच किया गया, जिसने चंबल के स्वस्थ पर्यावरण की मजबूत तस्वीर पेश कर दी. मुरैना जिले से गुजरने वाली चंबल नदी एक बार फिर जीवन से लबालब दिखाई दे रही है. जलीय जीवों और प्रवासी पक्षियों की वार्षिक गणना पूरी हो चुकी है और इस बार के आंकड़े उत्साह बढ़ाने वाले हैं. 435 किलोमीटर क्षेत्र में फैले राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में 12 दिन चले सर्वे ने साफ कर दिया कि नदी का पारिस्थितिक तंत्र लगातार मजबूत हो रहा है.

चंबल नदी में जलीय जीवों की वार्षिक गणना पूरी (ETV Bharat)

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य अधीक्षक देवरी मुरैना श्याम चौहान ने बताया कि, ''यह गणना 4 फरवरी से शुरू होकर 16 फरवरी तक चली. सर्वे की शुरुआत बड़ौदिया-बिंदी घाट से हुई और अटारघाट, राजघाट होते हुए पचनदा तक पूरी की गई. घड़ियालों के फैलाव को देखते हुए सर्वे टीम पार्वती नदी में भी करीब 60 किलोमीटर अंदर तक पहुंची. साफ मौसम और बेहतर विजिबिलिटी के कारण इस बार गणना अपेक्षाकृत आसान रही, जिससे आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ी.

CROCODILE CONSERVATION CHAMBAL
चंबल में घड़ियालों और मगरमच्छों का हो रहा विस्तार (Credit: Forest Department)

सबसे सुखद खबर राष्ट्रीय जलीय जीव गंगेटिक डॉल्फिन को लेकर सामने आई है. जहां पहले हर साल 5 से 15 तक की मामूली बढ़ोतरी दर्ज होती थी, वहीं इस बार इनकी संख्या में रिकॉर्ड 44 की छलांग लगी और कुल संख्या 155 तक पहुंच गई. घड़ियालों की संख्या 476 बढ़कर 2938 हो गई, जबकि दुर्लभ इंडियन स्कीमर की संख्या 266 बढ़कर 1055 तक पहुंच गई.''

Rare Indian Skimmers CHAMBAL
चंबल अभयारण्य से आई खुशखबरी (Credit: Forest Department)
Rare Indian Skimmers CHAMBAL
प्रवासी पक्षियों की बढ़ी चहचहाहट (Credit: Forest Department)

चंबल में मिला जलीय जीवन
दूरबीन और हाई क्वालिटी कैमरों की मदद से पानी की सतह, रेत के टापुओं और किनारों पर बैठे जीवों की बारीकी से गिनती की गई. इस अभियान में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के विशेषज्ञ भी शामिल रहे. कुल मिलाकर चंबल का यह बढ़ता जलीय संसार सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि स्वच्छ और संतुलित प्रकृति की जिंदा तस्वीर है. यहां बहती धारा अब जीवन का भरोसा भी बहा रही है.

wildlife team survey chambal river
चंबल नदी में सर्वे कर रही टीम (Credit: Forest Department)

अधीक्षक श्याम चौहान ने चंबल नदी में मगरमच्छों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि, ''जहां एक ओर घड़ियाल और गंगेटिक डॉल्फिन की बढ़ती संख्या नदी के स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र का संकेत है, वहीं मगरों की तेजी से बढ़ती मौजूदगी संतुलन के लिए चुनौती बन सकती है.'' उन्होंने बताया कि ''मगरमच्छों का फैलाव अन्य जलीय जीवों के व्यवहार और आवास पर असर डाल सकता है. इसलिए लगातार निगरानी, वैज्ञानिक अध्ययन और प्रबंधन रणनीति जरूरी है, ताकि चंबल का जैविक संतुलन सुरक्षित बना रहे.''