दूरबीन तने-लहरों पर निगाहें, चंबल में उतरी 3 राज्यों की सर्वे टीम, नदी से निकलेगी जलीयजीवों की तादाद
चंबल नदी में विशेषज्ञों की संयुक्त टीम जुटी सर्वे में. घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन के बढ़ते कुनबे से संरक्षण की बड़ी आस.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 15, 2026 at 3:51 PM IST
मुरैना: मध्य भारत की धड़कन बनी चंबल नदी इन दिनों रोमांच से उफान पर है. यहां शिकार नहीं बल्कि जल के असली राजाओं की जनगणना का महाअभियान चल रहा है. राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में विशेषज्ञ लहरों के साथ कदम मिलाकर घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और कछुओं की दुनिया गिन रहे हैं. सफर 5 फरवरी से शुरू हुआ श्योपुर के पाली घाट से और अब मुरैना से भिंड तक पहुंच चुका है. तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विशेषज्ञ मिलकर आंकड़ों की नई कहानी लिख रहे हैं. यह अभियान आगे यूपी के पचनदा तक जाएगा. जहां तय होगा इस बार चंबल के परिवार में कितने नए सदस्य जुड़े हैं.
चंबल में जलीय जीवों की सालाना जन गणना जारी
मध्य भारत की धड़कन कही जाने वाली चंबल नदी इन दिनों रोमांच और उम्मीदों की लहरों से भरी हुई है. यहां बंदूकों की नहीं, बल्कि दूरबीनों की नजरें तनी हैं, क्योंकि जलीय दुनिया के असली शासकों की सालाना जनगणना जारी है. राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में हर साल की तरह इस बार भी फरवरी में सर्वे की शुरुआत श्योपुर जिले के पाली घाट से हुई. यह सर्वे 16 जनवरी को यूपी के पचनदा घाट पर समापन होगा. सर्वे टीम मुरैना के कुथियाना घाट से 14 फरवरी को उसैद घाट होते हुए अब भिंड पहुंच चुकी है, जबकि अंतिम पड़ाव पचनदा रहेगा.
मुरैना से पचनदा तक का इलाका घड़ियालों के लिए सुरक्षित
करीब 500 किलोमीटर लंबे इस नदी क्षेत्र में 12 दिन तक चलने वाला यह सर्वे केवल गिनती नहीं, बल्कि चंबल नदी के स्वास्थ्य की पूरी रिपोर्ट तैयार करता है. विशेषज्ञ घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन, कछुओं और अप्रवासी इंडियन स्कीमर पक्षियों के साथ-साथ नदी की गहराई, चौड़ाई और बहाव का भी वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं. खास बात यह कि मुरैना से पचनदा तक का इलाका घड़ियालों का सबसे सुरक्षित घर माना जाता है.
पिछले वर्ष के आंकड़ों ने संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता दिखाई थी. घड़ियाल 2564 और मगरमच्छों की संख्या 1385 तक पहुंची, जबकि डॉल्फिन 111 पर स्थिर रहीं, जो स्वच्छ जल का संकेत मानी जाती हैं. इस बार उम्मीद है कि ये रिकॉर्ड और आगे बढ़ेंगे. संयुक्त अभियान में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के वन विभागों की टीमें शामिल हैं.

घड़ियाल केंद्र के केयरटेकर ज्योति डंडोतिया का कहना है कि, ''सर्वे के दौरान घड़ियाल, मगरमच्छ और पक्षी भी दिखाई दे रहे हैं.'' बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री की सदस्य प्रवीना शेख ने बताया की, हम जलीयजीवों की गणना करने के लिए चंबल आए थे. जो पक्ष प्रजनन करने के लिए आते हैं, वह यहां सबसे ज्यादा दिखाई दिे हैं.''

मध्य प्रदेश वन विभाग, उत्तर प्रदेश वन विभाग और राजस्थान वन विभाग के साथ वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और स्थानीय घड़ियाल केंद्र के केयरटेकर ज्योति इंडोतिया भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. चंबल नदी की लहरों के बीच चल रही यह गिनती. एक संदेश है चंबल सिर्फ नदी नहीं, जीवंत पारिस्थितिकी का धड़कता हुआ संसार है, जिसकी हर सांस भविष्य की कहानी लिख रही है.

- चंबल नदी से आया सोन रक्षक, 132 बच्चों के जनक की मौत के बाद सोन नदी में छोड़ा घड़ियाल
- तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए वन्यजीवों को मिली आजादी, कोर्ट के आदेश के बाद चंबल में लगाएंगे गोते
- चंबल के 24 एलिगेटरों का नया ठिकाना बना सीधी का सोन घड़ियाल अभयारण्य, फिर बढ़ेगी रौनक
संयुक्त प्रयासों से चल रहा यह सर्वे चंबल नदी की धड़कनों को पढ़ने जैसा रोमांच समेटे है. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में जुटी टीमें जैव विविधता की असली तस्वीर सामने लाने में लगी हैं. यह सिर्फ गिनती नहीं बल्कि संरक्षण की कामयाबी की परीक्षा भी है. अगर यही रफ्तार बनी रही तो चंबल जलीय जीवों का सबसे सुरक्षित और समृद्ध आश्रय बनकर उभरेगी. अब सबकी नजरें 16 फरवरी पर टिकी हैं जब सर्वे पूरा होगा और उम्मीद है. खुशखबरी की लहर पर्यावरण प्रेमियों के चेहरों पर मुस्कान बनकर जरूर दौड़ेगी. क्योंकि हर बढ़ती संख्या प्रकृति के संतुलन और भविष्य की उम्मीद भी जगाती है.

चंबल नदी में घड़ियाल की स्थिति
वर्ष - घड़ियाल की संख्या
2015- 1,151
2016- 1,162
2017- 1,255
2018- 1,681
2019- 1,876
2020- 1,859
2021- 2,176
2022- 2,114
2023- 2,108
2024- 2,456
2025- 2,564

