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मुरैना के पहाड़गढ़ में मिले सबसे अधिक गिद्ध, स्वच्छता दूतों की संख्या दे रही शुभ संकेत

मुरैना में हुई गिद्धों की गणना, जिलेभर में मिले 370 गिद्ध, वल्चर की बढ़ती संख्या पर्यावरण के लिए शुभ संकेत.

MORENA VULTURE CENSUS
बढ़ती गिद्धों की संख्या प्रयावरण के लिए शुभ संकेत (Forest Department Morena)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 24, 2026 at 6:34 PM IST

3 Min Read
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मुरैना: विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके स्वच्छता दूत अब फिर आसमान में मंडराने लगे हैं. मुरैना वन विभाग द्वारा हाल ही में कराई गई गणना के बाद जारी परिणामों ने गिद्धों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद जगा दी है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक जिले में गिद्धों की संख्या 370 हो गई है, जिनमें सबसे अधिक पहाड़गढ़ रेंज में पाए गए हैं.

पहाड़गढ़ में मिले सबसे अधिक गिद्ध

पर्यावरण प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई है. इकोसिस्टम में स्वच्छता दूत कहे जाने वाले गिद्धों का कुनबा अब चंबल अंचल में फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. मुरैना वन विभाग द्वारा 20 फरवरी से 3 दिवसीय शीतकालीन गिद्धों की गणना की गई. इसमें जिले की 61 बीट और चंबल के 44 घाटों पर मुरैना वन विभाग की विशेष टीमों ने लगातार निगरानी की. 20 फरवरी को 131 गिद्ध, 21 फरवरी को 115 और 22 फरवरी को 124 गिद्ध दिखाई दिए. इस तरह कुल गणना में जिले में 370 गिद्ध दर्ज किए गए. जिसमें सबसे अधिक 129 गिद्ध पहाड़गढ़ रेंज में पाए गए, जो इस क्षेत्र को गिद्धों का प्रमुख आश्रय स्थल साबित करता है.

Morena endangered Vulture
आसमान में लौटे स्वच्छता दूत गिद्ध (Forest Department Morena)

बढ़ती गिद्धों की संख्या प्रयावरण के लिए शुभ संकेत

चंबल अंचल में गिद्धों की वापसी पर्यावरण संतुलन के लिए शुभ संकेत मानी जा रही है. इनकी पाचन शक्ति एसी होती है कि ये मृत, सड़े-गले और बैक्टीरियल फूड को भी खा सकते हैं. जिससे वातावरण स्वच्छ रहता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि गिद्धों की बढ़ती संख्या पर्यावरण संतुलन के लिए सकारात्मक संकेत है. चंबल के बीहड़ों में फिर से मंडराते गिद्ध न सिर्फ प्रकृति की सेहत का पैमाना हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि संरक्षण के प्रयास ईमानदारी से किए जाएं, तो खोई विरासत भी लौट सकती है.

Morena Vulture census
मुरैना में हुई गिद्धों की गणना (Forest Department Morena)

जागरूकता अभियान चलाकर किया सरंक्षण

मुरैना वन विभाग के एसडीओ श्याम सिंह चौहान ने बताया, "वर्ष 1992 से 2007 के बीच गिद्धों की संख्या 99 प्रतिशत कम हो गई थी. इसलिए इसे विलुप्तप्राय पक्षी घोषित किया गया था. विशेषज्ञों ने इस पर अपनी खोज की तो पता चला कि मृत पशुओं का मांस, विशेषकर दुधारू पशु जैसे गाय-भैंस का मांस इनके प्राण ले रहा है. पशुओं में दर्द तथा बुखार के लिए दी जाने वाली दवा डाइक्लोफिनेक इनके जीवन के लिए हानिकारक है. इसके बाद गांव-गांव टीम भेजकर पशु पालकों को जागरूक किया गया. इसका परिणाम यह हुआ कि अब गिद्धों का कुनबा दोबारा बढ़ने लगा है."