मुरैना के बेटे ने किया कमाल, इंटरनेशनल टूर्नामेंट में श्रीलंका की धरती पर बल्ला घुमाएंगे मनोज
मुरैना के खेरा मानगढ़ गांव के रहने वाले मनोज धाकड़ का लायन व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन इंडिया की भारतीय टीम में हुआ सेलेक्शन.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 25, 2026 at 2:49 PM IST
मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना के मनोज धाकड़ अब श्रीलंका में भारत का नाम रोशन करने जा रहे हैं. कभी सड़क हादसे के बाद जिंदगी से हार मान चुके मनोज आज व्हीलचेयर क्रिकेट के जरिए अंतरराष्ट्रीय मैदान में तिरंगा लहराने के लिए तैयार हैं.
हादसे के बाद मनोज की जिंदगी जैसे थम सी गई थी, एक ऐसा पल आया जब उन्हें लगा कि अब आगे कुछ नहीं बचा. लेकिन परिवार का साथ और खुद पर अटूट विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया. उन्होंने ठान लिया कि व्हीलचेयर उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी असली पहचान और शक्ति है. खेरा मानगढ़ जैसे छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई. उनका संघर्ष, जज़्बा और सफलता की कहानी हजारों दिव्यांग युवाओं के लिए प्रेरणा और उम्मीद की नई रोशनी बन गई है.

2021 में हुए सड़क हादसे में मनोज के दोनों पैर काम करना बंद कर दिया था
मुरैना जिले की कैलारस तहसील के छोटे से गांव खेरा मानगढ़ के रहने वाले मनोज धाकड़ ने बताया कि साल 2021 में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद उनके दोनों पैर काम करना बंद कर चुके थे. परिवार और गांव वालों को लगा कि अब मनोज की जिंदगी घर की चारदीवारी तक सीमित हो जाएगी, लेकिन चंबल के इस बेटे ने हालात से लड़ने की ठान ली. महीनों तक बिस्तर पर रहने के बाद उन्होंने खुद को संभाला और खेल को अपनी नई पहचान बना लिया.
मनोज का लायन व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन इंडिया की भारतीय टीम में हुआ चयन
धीरे-धीरे मनोज ने व्हीलचेयर क्रिकेट में कदम रखा. पहले जिला स्तर, फिर राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा. अब उनका चयन लायन व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन इंडिया की भारतीय टीम में हुआ है. वे “भारत बनाम श्रीलंका 2026 अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट 3T-20 चैंपियनशिप” में हिस्सा लेंगे. यह प्रतियोगिता 26 से 28 मई तक कोलंबो में होगी.
हजारों दिव्यांग युवाओं की उम्मीद बन चुके हैं मनोज
भारतीय टीम की कप्तानी कबीर भदौरिया करेंगे, जबकि मनोज खिलाड़ी के रूप में मैदान में उतरेंगे. खास बात यह है कि मनोज धाकड़ मुरैना के पहले ऐसे व्हीलचेयर क्रिकेटर बन गए हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह मिली है. आज चंबल का यह बेटा सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि उन हजारों दिव्यांग युवाओं की उम्मीद बन चुका है जो मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं.
चयन की खबर मिलते ही खेरा मानगढ़ गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. परिजनों, दोस्तों और खेल प्रेमियों ने मनोज धाकड़ को मिठाई खिलाकर बधाइयां दी. पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल बन गया. बुजुर्गों का कहना है कि मनोज ने साबित कर दिया कि मुश्किल परिस्थितियां इंसान को रोक नहीं सकतीं. अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ता खुद बन जाता है.

